किन राज्यों को केंद्र वैक्सीन कोटे में 1 मई से प्राथमिकता देगा ? जानिए
नई दिल्ली, 23 अप्रैल: 1 मई से देश में 18 साल से ज्यादा उम्र के सभी लोगों को कोविड वैक्सीन लगनी शुरू हो जाएगी। लेकिन, केंद्र सरकार ने पहले से ही कुछ मापदंड निर्धारित कर दिए हैं कि उसके पूल से किन राज्यों को वैक्सीन दिए जाने में प्राथमिकता दी जाएगी। क्योंकि, 1 मई के बाद से मोदी सरकार ने राज्यों को सीधे कंपनियों और विदेशों से भी टीका खरीदने की छूट दे दी है। लेकिन, केंद्र के 50 फीसदी कोटे से मिलने वाली वैक्सीन के लिए राज्यों की दिलचस्पी बनी रहेगी। पर इसके लिए केंद्र सरकार ने कुछ शर्तें तय कर दी हैं। और जो राज्य उस कसौटी पर खरे उतरेंगे उन्हें ही केंद्र से ज्यादा वैक्सीन की सप्लाई मिलेगी।

जो राज्य परफॉर्म करेंगे उन्हें मिलेगी ज्यादा वैक्सीन
केंद्र सरकार अपने कोटे से राज्यों को वैक्सीन की डोज उपलब्ध करवाने में उनकी ओर से हासिल किए गए वैक्सिनेशन कवरेज (स्पीड), वहां पर कोविड के ऐक्टिव केस के साथ-साथ वैक्सीन की बर्बादी न होने का भी मापदंड तय किया है। जाहिर है कि जो राज्य बैक्सीन की बर्बादी करेंगे, उनको केंद्र से वैक्सीन लेने में दिक्कत होगी। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा है, 'जैसे कि हम अभी कर रहे हैं, भारत सरकार राज्यों को वैक्सीन में उनका हिस्सा देती रहेगी। वैक्सीन डोज 15 दिनों की अवधि के लिए आवंटित की जाएगी। राज्यों को पहले से ही बता दिया जाएगा कि अगले 15 दिनों में उन्हें कितनी वैक्सीन मिलेगी।' उनके मुताबिक, 'आवंटन राज्यों की परफॉर्मेंस के आधार पर किया जाएगा, जो कि राज्यों की ओर से वैक्सीन की सात दिनों की औसत खपत के आधार पर तय होगा। दूसरा पैरामीटर राज्यों में इंफेक्शन की स्थिति पर निर्धारित किया जाएगा यानी की ऐक्टिव केसों की संख्या पर।' उन्होंने दो टूक कह दिया कि 'तीसरा, हम बर्बादी पर बहुत ध्यान देंगे। यह निगेटिव क्राइटेरिया है। अगर ज्यादा बर्बादी होगी तो उस राज्य को नहीं मिलेगा।'

50 फीसदी वैक्सीन राज्यों को या बाहर बेच सकेंगी कंपनियां
16 जनवरी से वैक्सिनेशन ड्राइव शुरू होने के बाद से केंद्र सरकार ज्यादा केस-लोड वाले जिलों को प्राथमिकता देने को कह रही थी। लेकिन यह पहली बार है कि राज्यों को वैक्सीन का कोटा तय करने के लिए मापदंड बना दिया गया है। केंद्र सरकार ने अब जो नीति अपनाई है, उसके बाद वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां अपनी प्रोडक्शन का 50 फीसदी सप्लाई राज्य सरकारों और खुले बाजार में पहले से तय कीमतों पर बेच सकती हैं। यह नीति विदेशों से आयात की जाने वाली वैक्सीन जैसे कि जॉनसन एंड जॉनसन, फाइजर और मॉडर्ना के लिए भी लागू होगी। यहां खुले बाजारों से मतलब निजी अस्पतालों से है, जो कंपनियों से सीधे वैक्सीन खरीद सकते हैं।

कुछ राज्यों में करीब 10 फीसदी तक बर्बाद हुई वैक्सीन
केंद्र सरकार को इस तरह के मापदंड इसीलिए अपनाने पड़े हैं, क्योंकि अभी तक कुछ राज्यों ने वैक्सीन मैनेजमेंट में काफी लापरवाही बरती है, जिससे काफी सारी वैक्सीन बर्बाद हो गई। तमिलनाडु, हरियाणा, बिहार और राजस्थान उन बड़े राज्यों में शामिल हैं जहां 6 फीसदी तक बर्बादी हुई है। वैसे असम में सबसे ज्यादा 9.6 फीसदी और मणिपुर में 8.4 फीसदी वैक्सीन बर्बाद हो गई है। आंध्र प्रदेश, यूपी और दिल्ली में भी 5 फीसदी से ज्यादा बर्बाद गई है। वहीं कुछ राज्य ऐसे भी हैं, जिन्होंने टीकाकरण अभियान में शानदार प्रदर्शन करके दिखाया है,जहां 'शून्य बर्बादी' है। ये राज्य हैं- हिमाचल प्रदेश, केरल, मिजोरम और गोवा, जहां वैक्सीन की हर डोज का सही इस्तेमाल किया गया है।

गुरुवार तक 13.5 करोड़ डोज लगाई गई
नई पॉलिसी के तहत वैक्सीन कंपनियां हर महीने अपना 50 फीसदी प्रोडक्शन केंद्र सरकार को सप्लाई करेंगी, जिसमें से वो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनका हिस्सा मुहैया करवाएगी। राज्य अपनी बाकी की जरूरत बाहर से खरीदकर कर पूरा कर सकते हैं। गुरुवार को रात 8 बजे तक देशभर में कुल 30 लाख लोगों को वैक्सीन की डोज लगाई गई थी। अब तक देश में कुल मिलाकार 13.5 करोड़ वैक्सिनेशन की डोज पूरी हो चुकी है।












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