कोरोना का डेल्टा वेरिएंट चिंता का विषय नहीं : रणदीप गुलेरिया
नई दिल्ली, जून 16: एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने बुधवार को कहा कि कोरोना वायरस का डेल्टा प्लस संस्करण भारत में उपलब्ध टीकों की प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकता है, लेकिन यह अभी भी वैरिएंट के खिलाफ प्रभावी होगा। डेल्टा प्लस अभी तक चिंता का विषय नहीं है। वरिष्ठ डॉक्टर ने कहा कि लोग टीका लगने के बाद ही वायरस से संक्रमित हो सकते हैं लेकिन हमारा मुख्य उद्देश्य मौतों और गंभीर बीमारी को रोकना है।

कोविशील्ड वैक्सीन की दो खुराकों के बीच बढ़ाए गए गैप को लेकर डॉक्टर गुलेरिया ने कहा कि, एनटीएजीआई को सबूत मिले हैं कि दो डोज के बीच में बढ़ाए गए गैप के कारण कोविड-19 के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। हालाँकि, उन्होंने कहा, जैसे ही डेटा सामने आता है, उसे अधिकारी प्रोटोकॉल को बदल सकते हैं, लेकिन वर्तमान अवधि मे डेटा काफी सॉलिड है।
कोविशील्ड की दो खुराक के बीच के अंतर को चार-छह सप्ताह से बढ़ाकर 12-16 सप्ताह करने के सरकार के फैसले को लेकर गुलेरिया ने बताया, "जब डेटा का मूल्यांकन किया गया था, तब अल्फा संस्करण प्रमुख था और यह बदल गया है। डेल्टा संस्करण अब अधिक प्रभावी है। दोनों वेरिएंट संक्रामक हैं, यहां तक कि अल्फा वेरिएंट भी पिछले वेरिएंट की तुलना में अधिक संक्रामक पाया गया है।
इसके अलावा डॉ गुलेरिया ने कोविड-उपयुक्त व्यवहार के महत्व को दोहराया। उन्होंने लोगों से भीड़ से बचने, मास्क पहनने, हाथों को साफ करने और सामाजिक दूरी बनाए रखने की अपील की। एम्स निदेशक ने आगे हॉटस्पॉट का पता लगाने और वहां वायरस को रोकने के उपायों का सुझाव दिया। उन्होंने कहा, "यह देखने के लिए बुनियादी शोध करें कि उभरते हुए वेरिएंट टीकों की प्रभावशीलता को तो कम नहीं कर रहे है और अगर ऐसा है, तो हमें अपने टीकों को जल्दी से संशोधित करना चाहिए ताकि वे नए वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी हों।












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