सिंधिया के चचेरे भाई का दावा-राहुल गांधी से मिलने के लिए महीनों से कोशिश कर रहे थे ज्योतिरादित्य

नई दिल्ली। राहुल गांधी के करीबी सहयोगी के तौर माने जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया अब कांग्रेस का हिस्सा नहीं हैं।18 साल तक कांग्रेस में रहे सिंधिया जल्द ही बीजेपी का दामन थामने वाले हैं। इसी बीच अब सिंधिया के चचेरे भाई ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। त्रिपुरा शाही के सदस्य और सिंधिया के चचेरे भाई प्रद्युत देब बर्मन ने कहा कि, ज्योतिरादित्य राहुल गांधी से मिलने के लिए महीनों से कोशिश कर रहे थे, लेकिन वह उनसे नहीं मिल सके। बर्मन ने कहा कि, जब हमारे नेता हमारी सुनवाई नहीं कर रहे हैं और पुराने साथी एक-एक करके बाहर निकल रहे हैं, तो यह आगे बढ़ने का समय है।

अगर वह (राहुल गांधी) हमें नहीं सुनना चाहते थे तो ....

अगर वह (राहुल गांधी) हमें नहीं सुनना चाहते थे तो ....

पिछले साल सितंबर में त्रिपुरा कांग्रेस चीफ के पद से इस्तीफा देने वाले प्रद्युत देब बर्मन ने कहा कि, मुझे पता है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया महीनों से राहुल गांधी से मिलने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन उन्हें राहुल गांधी से मिलने का समय नहीं दिया जा रहा था। अगर वह (राहुल गांधी) हमारी नहीं सुनना चाहते थे, तो वे हमें पार्टी में क्यों लाए? देब बर्मन ने हालिया घटनाक्रम को लेकर फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर की है। इस पोस्ट में देब बर्मन ने राहुल गांधी, सिंधिया, अपनी और अपनी मां के साथ की एक तस्वीर भी शेयर की है।

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    ' पार्टी को देखकर दुख होता है'

    ' पार्टी को देखकर दुख होता है'

    देब बर्मन ने फेसबुक पर लिखा कि, पार्टी को देखकर दुख होता है कि अगले एक दशक में भारत अपने सभी युवा नेताओं को खो देगा। मैंने देर रात ज्योतिरादित्य सिंधिया से बात की और उन्होंने मुझे बताया कि, उन्होंने इंतजार किया और इंतजार किया, लेकिन हमारे नेता ने मिलने के लिए कोई समय नहीं दिया। जब मैंने त्रिपुरा में कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में इस्तीफा दे दिया था तो मैंने कहा था कि राहुल गांधी के अध्यक्ष पद अचानक छोड़ने से युवा नेता 'अनाथ' महसूस करते हैं। उन्होंने हम सभी को अकेला छोड़ दिया।

    'राहुल 'के जाने के बाद अचानक हमारे विचारों को दरकिनार कर दिया गया'

    देब बर्मन ने लिखा कि, राहुल गांधी के जाने के बाद अचानक हमारे विचारों को दरकिनार कर दिया गया और पार्टी के दिग्गजों ने प्रमुख मुद्दों पर हमारी नीतियों की अवहेलना शुरू कर दी। 2018 में जब बीजेपी ने मुझे और मेरी मां से संपर्क किया, तो मैंने विशेष रूप सिंधिया और राहुल से कहा कि वे सुनिश्चित करेंगे कि कांग्रेस त्रिपुरा और पूर्वोत्तर के स्वदेशी लोगों के लिए बोले और मैं कांग्रेस में वापस आ गया।

     'राहुल शीत निद्रा में चले गए हैं'

    'राहुल शीत निद्रा में चले गए हैं'

    इसके दो साल बाद और राहुल शीत निद्रा में चले गए हैं। मुझे खुशी है कि सिंधिया ने पार्टी छोड़ दी है और मैं भी इस बात के लिए तैयार हूं। मुझे लगा कि यह मेरे क्षेत्र के लोगों के अधिकारों के लिए सही निर्यण है। जो न तो भाजपा में है और न ही कांग्रेस में। क्या त्रासदी है कि, एक बड़ी पुरानी पार्टी एक साधारण पुरानी पार्टी बनकर रह गई है। यह देखना वास्तव में दिल तोड़ने वाला है कि क्या हो रहा है।

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