मुआवजे में किसानो को दे दी जनशताब्दी ट्रेन
ऊना। आपने बाईक, कार सहित कई चीजों को जब्त किये जाने के आदेश सुने होंगे। लेकिन कोर्ट ने जनशताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन को जब्त करने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मुआवजे से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया।

उत्तर क्षेत्र की रेलवे के खिलाफ जनशताब्दी एक्सप्रेस पर बड़ा मुआवजा का मामला काफी समय से अटका हुआ है। दरअसल जिस वक्त ऊना से तलवाड़ा के बीच रेललाइन का विस्तार हो रहा था उस वक्त रेलवे ने इससे प्रभावित लोगों को मुआवजा देने की बात कही थी।
दिलवां के मेला राम व मदन लाल ने ट्रेन के ट्रैक के लिए उनकी भूमि के अधिग्रहण के बदले कम मुआवजा मिलने के खिलाफ कोर्ट में अपील की थी। रेलवे ट्रेक के विस्तार के बदले कोर्ट ने मेला राम को 8,91,424 रुपये और मदन लाल को 26,53,814 रुपये के मुआवजा देने का आदेश दिया था। वहीं कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ रेलवे ने उच्च न्याालय में अपील की थी जो दिसंबर 2013 को खारिज हो गई थी।
कोर्ट ने सख्त रुख में अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि लगता है रेलवे जानबूझकर मामले को लटका रही है। ऐसे में कोर्ट को रेलवे की संपत्ति को जब्त करने का आदेश सुनाती है। कोर्ट ने अपने फैसले में जनशताब्दी एक्सप्रेस को मुआवजा नहीं पाने वालों को कब्जे में देने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
कोर्ट के फैसले के बाद करोड़ों रुपये की इस ट्रेन को प्रभावित व्यक्तियों के कब्जे में दिलाने के लिए कोर्ट ने अपने कर्मचारियों को साथ भेजा था। वहीं रेलवे को अपनी ट्रेन को बचाने के लिए 35 लाख रुपए का मुआवजा भरना होगा। कोर्ट ने इस राशि के भुगतान के लिए रेलवे को 2 साल पहले आदेश दिया था।
लेकिन बार-बार रेलवे की हीलाहवाली के चलते प्रभावितों से रेलवे की स्थानीय स्तर पर संपत्ति का ब्योरा मांगा था। वहीं इस मामले में प्रभावितों के अधिवक्ता ने अदालत को यहां आने वाली चार प्रमुख ट्रेनों के संबंध में जानकारी दी थी। अदालत ने इनमें ऊना से दिल्ली के बीच चलने वाली जनशताब्दी को जब्त करने का आदेश दिया। कोर्ट ने अदालत के कर्मियों को 16 अप्रैल तक यह संपत्ति प्रभावितों के हवाले कराने को कहा है।












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