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Coronavirus:विशाल रूस में लक्जमबर्ग जैसे छोटे देश से भी कम मरीज क्यों ? जानिए

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नई दिल्ली- रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसी हफ्ते दावा किया था कि उनका देश कोरोना वायरस के संक्रमण को लोगों में व्यापक पैमाने पर फैलने से रोकने में कामयाब रहा है। उनका दावा था कि ऐसा इसीलिए हुआ क्योंकि, रूस ने शुरू में ही पुख्ता उपाय अपनाने शुरू कर दिए थे और इसे वहां महामारी बनने से रोक दिया। पहली नजर में रूस के दावों में काफी सच्चाई भी नजर आ रहा है। लेकिन, रूस की कमान पुतिन के हाथों में है और इतिहास सोवियत संघ का रहा है। इसलिए वहां के दावों पर पहली बार में रूस की जनता भी आंख मूंद कर स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। आइए जानते हैं कि जो रूस आधिकारिक तौर पर कह रहा है, वही सच्चाई है या उसमें कुछ झोल भी हो सकता है।

रूस में अब तक सिर्फ 253 कंफर्म केस

रूस में अब तक सिर्फ 253 कंफर्म केस

सवाल उठता है कि क्या वाकई रूस के दावों में दम है? रूस से मिली आधिकारिक सूचना के मुताबिक राष्ट्रपति पुतिन की रणनीति वहां काफी कारगर साबित हुई है। आश्चर्यजनक रूप से वहां कोरोना वायरस के मामले बहुत ही कम सामने आए हैं। जबकि, रूस और चीन के बीच सीमाएं काफी बड़ी हैं। आज की हकीकत ये है कि- 14.6 करोड़ की आबादी वाले रूस में लक्जमबर्ग जैसे दुनिया के सबसे छोटे यूरोपीय देशों में से एक के मुकाबले भी कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या बेहद कम है। रूस में सिर्फ 253 लोगों को कोविड-19 का संक्रमण हुआ है। जबकि, लक्जमबर्ग की जनसंख्या महज 6,28,000 है, लेकिन वहां शनिवार तक 670 पॉजिटिव केस पाए गए थे, जिनमें से 8 की मौत हो चुकी है।

रूस के दावों के समर्थन में डब्ल्यूएचओ

रूस के दावों के समर्थन में डब्ल्यूएचओ

कुछ विशेषज्ञों की राय में रूस में अब तक कोरोना पॉजिटिव लोगों की तादाद बेहद कम रहने का कारण ये है कि उसने 30 जनवरी से पहले ही चीन से लगने वाली अपनी 2,600 मील लंबी सीमा को पूरी तरह बंद कर दिया था और क्वारंटाइन जोन स्थापित करने शुरू कर दिए थे। सीएनएन के मुताबिक रूस में विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थाई प्रतिनिधि और डायरेक्टर जनरल डॉक्टर मिलिता वुज्नॉविक ने बताया कि इसका कारण सिर्फ और सिर्फ टेस्ट है। रूस ने टेस्ट करने की शुरुआत जनवरी के आखिर में ही शुरू कर दी थी। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ ने वायरस संदिग्धों की पहचान, उसके संपर्क में आए लोंगों की पहचान, आइसोलेशन जैसे जो भी उपाय सुझाए रूस ने उसपर तत्काल अमल किया। उनके मुताबिक 'और सोशल डिस्टेंसिंग दूसरी मुख्य वजह है, जिसे भी बाकियों की तुलना में जल्दी शुरू कर दिया गया।'

आंकड़ों पर रूस में भी उठ रहे हैं सवाल

आंकड़ों पर रूस में भी उठ रहे हैं सवाल

जानकारी के मुताबिक शनिवार तक रूस में 1,56,000 टेस्ट किए जा चके थे और इसकी शुरुआत फरवरी के शुरू में ही हो चुकी थी। उसने फरवरी से ही ईरान, चीन और दक्षिण कोरिया से आने वाले यात्रियों पर नजर रखना शुरू कर दिया था। हालांकि, रूस ने यही तत्परता इटली से आने वाले लोगों पर नहीं दिखाई और रूस में जितने लोग भी पॉजिटिव पाए गए हैं, उनमें से ज्यादातर का कनेक्शन इटली से ही जुड़ा है। यहां ये बात गौर करने लायक है कि भारत में भी चीन से मामले नहीं आए हैं और जो भी आए हैं उसमें इटली का बहुत बड़ा आंकड़ा है। यही नहीं रूस का इतिहास वामपंथी सोनियत संघ से भी जुड़ा रहा है और वहां की पारदर्शिता पर खुद वहीं के लोग पूरी तरह यकीन करने के लिए तैयार नहीं है। सोशल मीडिया पर लोग उनके दावों पर कई तरह के सवाल भी उठा रहे हैं। 20 हजार से ज्यादा पॉजिटिव केस के मैसेज वायरल भी हो चुके हैं। हालांकि, रूस आधिकारिक तौर पर उन सबको यही बता रहा है कि उन्हें जो सूचनाएं मिल रही हैं, वो सही नहीं हैं।

अब तेजी से बढ़ रहे हैं आंकड़े

अब तेजी से बढ़ रहे हैं आंकड़े

सवाल उठने के बाद पिछले कुछ हफ्तों में रूस में टेस्ट का दायरा और बढ़ाने के बाद वहां भी मरीजों की संख्या में इजाफा नजर आ रहा है और रोजाना 30 से 50 मरीज सामने आ रहे हैं। वैसे विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्थानीय प्रतिनिधियों का अभी भी कहना है कि रूस में कोरोना वायरस पॉजिटिव केसों की संख्या बाकी देशों की तुलना में बहुत ही कम है। इसी कड़ी में रूस की एक आधिकारिक संस्था ने कोरोना वायरस के संदिग्ध मामलों की जो एक नई संख्या जारी की है, उससे लग रहा है कि रूस के अब तक के दावों में कुछ न कुछ झोल जरूर है।

पुतिन कर रहे हैं आगे की तैयारी

पुतिन कर रहे हैं आगे की तैयारी

नई रिपोर्ट के मुताबिक वहां शनिवार को 36,540 संदिग्धों को निगरानी में रखा गया है। यानि अब तक के कंफर्म मामलों और इस नए आंकड़े में बहुत बड़ा अंतर है और हो सकता है कि आने वाले दिनों रूस भी उतना पीछे न रहे जितना कि वह दावा करता रहा है। जहां तक विश्व स्वास्थ्य संगठन का सवाल है तो उसपर चीन को लेकर पहले भी गंभीर सवाल उठ चुके हैं कि इसे वैश्विक महामारी तब घोषित किया गया, जब चीन ने उस पर काबू पा लेने के दावे शुरू कर दिए। उधर, पुतिन खुद को 2036 तक सत्ता में बनाए रखने के लिए एक जनमत संग्रह की तैयारी में भी लगे हुए हैं, जिसके लिए 22 अप्रैल की तारीख रखी गई है। ऐसे में क्या रूस क्या अपनी वास्तविक स्थिति दुनिया से साझा कर रहा है यह एक बड़ा सवाल है।

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English summary
Coronavirus-Why is the number of patients in Russia less than a small country like Luxembourg?
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