Coronavirus:किन्हें है सबसे ज्यादा खतरा, एक स्टडी में मिले पुख्ता संकेत
नई दिल्ली- कोरोना वायरस ने अभी तक दुनिया भर में लगभग 3,000 लोगों को मौत की नींद सुला दिया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार तक दुनिया भर के 61 देशों में यह 86,000 से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ले चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसके खतरे को देखते हुए शुक्रवार को इसे वैश्विक जोखिम मूल्यांकन की श्रेणी में सबसे ऊपर रखा है और यह तेजी से वैश्विक महामारी का शक्ल अख्तियार करता जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस बीमारी से सबसे ज्यादा खतरा किन्हें है। यानि अभी तक जितने लोग भी इसकी चपेट में आए हैं, वे किस उम्र के हैं और जिनकी मौत हुई है, उनमें भी सबसे ज्यादा किस उम्र के लोगों की हैं?

किन्हें है मौत का सबसे ज्यादा खतरा ?
एफपी की एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा खतरा उन्हें है, जिनकी उम्र ज्यादा है और जो पहले से ही हृदय रोगों या हाइपरटेंशन के मरीज हैं। क्योंकि, चीन के 72,000 मरीजों समेत दुनिया भर में इसके मरीजों की जो स्टडी की गयी है, उनमें से यही बात निकल कर आई है। फरवरी के मध्य तक चीन में जिन 44,700 मरीजों में कोरोना वायरस की पुष्टि हो चुकी थी, उनमें से 80 फीसदी की उम्र 60 साल या उससे ज्यादा थी। उनमें से आधे से ज्यादा मरीज तो 70 साल से भी ज्यादा के थे। यह स्टडी चीन के आधिकारिक सीडीसी वीकली के हवाले से सामने आई है। चीन के बाहर की शुरुआती रिपोर्ट भी इसी तरह के मिले हैं। मसलन, इटली में इसकी चपेट में आने वाले पहले 12 लोगों में से अधिकतर 80 साल से भी ज्यादा के हैं और कोई भी 60 साल से कम का नहीं है। इनमें से ज्यादातर हृदय रोग के भी मरीज हैं। चीन की एक स्टडी में यह भी बात सामने आई है कि इस बीमारी से मरने वालों में पुरुषों की संख्या महिलाओं के अनुपात में ज्यादा है। मतलब हर तीन पुरुषों की मौत में महिलाओं का आंकड़ा सिर्फ दो है। हालांकि, इसकी वजह साफ नहीं हो पाई है कि क्या पुरुष महिलाओं की तुलना में ज्यादा स्मोकिंग करते हैं, इसलिए ऐसा हो रहा है या इसके पीछे कोई और जीव वैज्ञानिक कारण है?

बच्चों में खतरा कम है ?
अभी तक यह भी अंदाजा लगाया जा रहा है कि शायद यह वायरस बच्चों को उतना ज्यादा शिकार नहीं बना पा रहा है, जितना की यह व्यस्कों पर कहर बरपा रहा है। हालांकि, इसकी वजह साफ तौर पर बताना अभी कठिन है। चीन में अगर 10 से 19 आयु वर्ग के बच्चों की बात करें तो इनकी संख्या कुल मरीजों के सिर्फ 1 फीसदी है और इस उम्र के सिर्फ एक की इस बीमारी के चलते मौत हुई है। 10 साल से कम उम्र के बच्चों का आंकड़ा तो 1 फीसदी से भी कम है और किसी भी मरीज की मौत की खबर नहीं है। अमेरिकी नेशनल इंस्ट्टीट्यूट ऑफ हेल्थ फॉगेर्टी इंटरनेशनल सेंटर के महामारी विशेषज्ञ सिसिल विबॉड के मुताबिक 'हम अभी तक इसपर दिमाग खपा रहे हैं कि 20 साल के नीचे के लोगों में इसका प्रभाव कम क्यों है।......क्या बच्चों को व्यस्कों के मुकाबले संक्रमित होने का कम खतरा है इसलिए नहीं संक्रमित होते ? या फिर वे संक्रमित होते भी हैं तो उनमें बीमारियां कम होती हैं?' उन्होंने कहा कि यह बहुत ही चौंकाने वाली बात है कि कम उम्र में इसका संक्रमण कम है, जबकि सांस संबंधी रोगों, चाहे वो वायरल हो या बैक्ट्रिटल वो बहुत ज्यादा प्रभावित होते हैं।

क्या इस वजह से संक्रमित बच्चों की संख्या कम तो नहीं ?
कुछ एक्सपर्ट अलग राय जाहिर कर रहे हैं। टोरेंटो यूनिवर्सिटी में एक महामारी विशेषज्ञ डेविड फिसमैन ने एक ईमेल में लिखा है 'इंफेक्टेड बच्चे कहा हैं????' उन्होंने आशंका जताई है कि 'यह महत्वपूर्ण है.....शायद बच्चों की जांच नहीं की जा रही है, क्योंकि उनमें हल्के लक्षण ही पाए जा रहे है।' दूसरा तर्क य दिया जा रहा है कि चीन में जनवरी में जब यह वायरस महामारी का शक्ल अख्तियार कर रहा था, तब वहां चल रही छुट्टियों के चलते बच्चे स्कूल नहीं जा रहे थे। इसपर सिसिल विबॉड का आंकलन है कि छोटे बच्चे घर पर हैं तो वहां भी उन्हें माता-पिता से संक्रमित होने की आशंका है। वैसे 2002-2003 में SARS से भी बच्चे कम प्रभावित हुए थे। यह चीन के गुआनडॉन्ग प्रांत में फैला था, जिसके 8,096 मरीजों में 774 की मौत हो गई थी।

बार-बार संक्रमण की चपेट में आना खतरनाक
कोरोना वायरस के व्हीस्लब्लोअर माने जाने वाले वुहान के डॉक्टर ली वेन्लियांग की भी फरवरी की शुरुआत में ही इसी बीमारी से मौत हो चुकी है। वो महज 34 साल के ही थे। कई और स्वास्थ्य कर्मचारी भी इस बीमारी की वजह से मर चुके हैं, जो 30 वर्ष से भी कम आयु के थे। उनके बारे में अनुमान है कि उनके साथ ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि वह बार-बार संक्रमित मरीजों के पास गए।
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आखिर कितना जानलेवा है कोरोना वायरस ?
सबसे बड़े सवाल का जवाब अभी तक सामने नहीं आ सका है कि आखिरकार कोरोना वायरस कितना जानलेवा साबित होने वाला है। अभी तक के अनुमानों के मुताबिक इससे मरने वाले मरीजों की संख्या कुल संक्रमित लोगों का सिर्फ 3 से 4 फीसदी है। कुछ एक्सपर्ट इससे होने वाली मौतों की दर महज 2 फीसदी होने का ही दावा कर रहे हैं। क्योंकि, कई ऐसे भी रिसर्च सामने आ रहे हैं जिसका मानना है कि मौत का आंकड़ा और भी कम होगा, क्योंकि चीन या दुनिया भर में करीब दो-तिहाई संक्रमण का केस सामने ही नहीं आ पा रहा है। लेकिन, SARS के वक्त में भी शुरू में मृत्यु दर बहुत कम रहने का ही दावा किया गया था, क्योंकि उससे प्रभावित लोगों की मौत तत्काल नहीं हुई थी। लेकिन, आखिरकार उसका मृत्य दर 10 फीसदी दर्ज हुआ था और हर 10 में से एक मरीजों ने उसकी चपेट में आकर दम तोड़ दिया था।












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