Coronavirus से बचाव ही नहीं बल्कि 'नमस्ते' करने के और भी हैं फायदे, जानिए इस परंपरा से जुड़े राज को

नई दिल्ली। भारत में कोरोना की दस्तक ने खलबली मचा दी है, दिल्ली-एनसीआर में नए मामले सामने आने के बाद केंद्र और दिल्ली सरकार की हरकत तेज हो गई है, देश में इस बीमारी को लेकर अलर्ट जारी है तो वहीं इस वायरस से बचने के लिए लोग अब भारतीय परंपरा 'नमस्ते' का सहारा ले रहे हैं। दरअसल, कोरोना वायरस शारीरिक संपर्क से फैल रहा है। लोग अभिनंदन करने के लिए एक-दूसरे से हाथ मिलाकर 'हैलो' नहीं कर रहे हैं, वे अब दूर से ही 'नमस्ते' कर रहे हैं।

ना तो हाथ मिलाएं और ना ही गले मिले बल्कि 'नमस्ते' कीजिए

ना तो हाथ मिलाएं और ना ही गले मिले बल्कि 'नमस्ते' कीजिए

मशहूर फिल्म अभिनेता अनुपम खेर ने भी सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी करके लोगों से अपील की है कि वो कुछ दिनों तक लोगों से ना तो हाथ मिलाएं और ना ही गले मिले बल्कि 'नमस्ते' करके एक-दूसरे को ऊर्जावान करें।

'नमस्ते' करने से आप बहुत सारी बीमारियों से बच सकते हैं

'नमस्ते' करने से आप बहुत सारी बीमारियों से बच सकते हैं

वैसे यह तो हुई कोरोना वायरस से बचने की बात लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि 'नमस्ते' करने से आप और बहुत सारी बीमारियों से बच सकते हैं, भारत में बरसों से चली आ रही इस परंपरा के पीछे का राज जानकर आप हैरान रह जाएंगे क्योंकि ये परंपरा ना केवल आपको सभ्य भारतीय होने का गौरव प्रदान करती है बल्कि ये आपको गंभीर बीमारियों से छुटकारा भी दिलाती है। दरअसल 'नमस्ते' या 'नमस्कार' करना हमारी संस्कृति का प्रतीक है, हिंदुस्तानियों की पहचान बना 'नमस्कार' केवल एक परंपरा ही नहीं बल्कि इसके कई भौतिक और वैज्ञानिक फायदे हैं।जिनके बारे में आप में से बहुत कम लोग जानते होंगे।

'नमस्कार' शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के 'नमस' शब्द से हुई

'नमस्कार' शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के 'नमस' शब्द से हुई

वैसे 'नमस्कार' का अर्थ होता है सभी मनुष्यों के हृदय में एक दैवीय चेतना और प्रकाश। नमस्कार शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के नमस शब्द से हुई है, जिसका अर्थ होता है एक आत्मा का दूसरी आत्मा से आभार प्रकट करना। इसी कारण जब इंसान एक-दूसरे से मिलता है और विदाई लेता है तो लोग 'नमस्कार' या 'नमस्ते' या 'प्रणाम' करते हैं।

दोनो हाथों को 'अनाहत चक' पर रखा जाता है

दोनो हाथों को 'अनाहत चक' पर रखा जाता है

'नमस्ते' करने के लिए, दोनो हाथों को 'अनाहत चक' पर रखा जाता है, आंखें बंद की जाती हैं और सिर को झुकाया जाता है। हाथों को हृदय चक्र पर लाकर दैवीय प्रेम का बहाव होता है। सिर को झुकाने और आँखें बंद करने का अर्थ है अपने आप को हृदय में विराजमान प्रभु को अपने आप को सौंप देना।

 'नमस्कार' करने से क्रोध शांत हो जाता है

'नमस्कार' करने से क्रोध शांत हो जाता है

जब इंसान को बहुत गुस्सा आये तो उसे तुरंत लोगों को 'नमस्कार' कर देना चाहिए क्योंकि 'नमस्कार' करने पर आपके दोनों हाथ जुड़ जाते हैं तो आप गुस्सा नहीं कर पाते हैं और आपको यूं देखकर सामने वाले का भी गु्स्सा शांत हो जाता है क्योंकि जब आप हाथ जोड़कर 'नमस्ते' करते हैं तो उस वक्त हथेलियों को दबाने से या जोड़े रखने से हृदयचक्र और आज्ञाचक्र में सक्रियता आती है जिससे जागरण बढ़ता है, आप का मन शांत हो जाता है जिसकी वजह से खुद ब खुद आप के चेहरे पर हंसी आ जाती है।

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