हवा के जरिए कोरोना वायरस फैलने के दावे पर क्या बोले भारत के डॉक्टर?

नई दिल्ली। केंद्रीय विज्ञान औद्योगिक अनुसंधान के महानिदेशक शेखर मंडे का कहना है कि किताबों में लिखी परिभाषा के अनुसार, कोरोना वायरस हवा में फैलने वाली बीमारी नहीं है। मगर, एरोसोल यानी हवा में फैली पानी की छोटे कणों के जरिये से वायरस कुछ फीट तक हवा में जा सकता है। वायरस कभी-कभी रोगी की खांसी या छींक के माध्यम से एरोसोल के रूप में फैल सकता है। उधर एयरबोर्न कोरोना संक्रमण को लेकर न्यू यार्क टाइम्स में छपी 239 वैज्ञानिकों की चेतावनी रिपोर्ट के बाद दुनियाभर में फिक्र और बहस बढ़ गई है।

हवा से फैलने वाली बीमारी नहीं है कोरोना संक्रमण

हवा से फैलने वाली बीमारी नहीं है कोरोना संक्रमण

एयरबोर्न रोग फैलाने वाले वायरस या बैक्टीरिया जैसे चिकनपॉक्स, खसरा या इन्फ्लूएंजा हवा के माध्यम से यात्रा कर सकते हैं और इसे फैला सकते हैं। महानिदेशक शेखर मंडे ने कहा कि, एरोसोल तब बनता है, जब श्वसन छोटी-छोटी बूंदें थोड़ी देर के लिए हवा में तैर सकती हैं, लेकिन यह हवा के साथ यात्रा नहीं करती हैं और "जल्द ही खत्म हो जाती हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 32 देशों 239 वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह के साक्ष्य हैं कि हवा के साथ छोटे कणों में चिपककर कोरोनावायरस लोगों को संक्रमित कर सकता है।

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    कुछ फीट तक जा सकता है वायरस

    कुछ फीट तक जा सकता है वायरस

    वैज्ञानिकों ने कहा कि उन्हें इस बात के सबूत मिले हैं और उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन से इस बीमारी से जुड़े दिशा-निर्देशों को संशोधित करने की मांग की है। उन्होंने इस मुद्दे को हरी झंडी दिखाते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन को एक खुला पत्र भी लिखा है और अगले सप्ताह इसे एक वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित करने की योजना है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि वायरस बड़ी बूंदों द्वारा फैल सकता है, जो छींकने के बाद हवा के माध्यम से फैलते हैं। इन बूंदों को श्ववसन के जरिये लेने पर व्यक्ति संक्रमित हो सकता है, जो कमरे में तैर सकती हैं।

     शोध को देखकर जारी किए जा सकते हैं नए दिशा-निर्देश

    शोध को देखकर जारी किए जा सकते हैं नए दिशा-निर्देश

    इस तरह की चिंताओं को पहले भी उठाया गया था, लेकिन डब्ल्यूएचओ ने कहा कि वायरस के इन्फ्लूएंजा या खसरे की तरह हवा में फैलने में सक्षम होने के लायक कहने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। डॉक्टर मैंडे ने कहा कि हम इस समय डब्ल्यूएचओ को नहीं लिख रहे हैं। डब्ल्यूएचओ के वैज्ञानिक सबूतों को देख रहे हैं और विचार-विमर्श के बाद दिशा-निर्देश जारी करेंगे। अगर जरूरत हुई, तो वे इस शोध को देखकर नए दिशा-निर्देश जारी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अभी के लिए, लोगों को सावधान रहना चाहिए क्योंकि इस तरह के प्रसार की आशंका "बंद कार्यालय स्थानों के भीतर" बढ़ जाती है। मगर, इन परिस्थितियों में फेस कवर का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए एन-95 मास्क पहनने चाहिए।

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