Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

कोरोना वायरस: बनारस में मणिकर्णिका की आग भी ठंडी हुई

बनारस
Getty Images
बनारस

हिन्दू धर्म में मान्यता है कि काशी में जिसकी मृत्यु होती है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसी काशी नगरी में गंगा नदी के किनारे स्थित महाश्मशान मणिकर्णिका घाट को मोक्ष का मार्ग कहा जाता है और मान्यता है कि यहां चिता की आग कभी ठंडी नहीं होती है. यानी यहां हर समय शवों का दाह संस्कार होता रहता है.

लेकिन विश्वव्यापी कोरोना संकट ने मणिकर्णिका घाट को भी लगभग ठंडा कर दिया है.

वाराणसी में गंगा किनारे बने चौरासी घाटों में सो दो घाटों- मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर शवों का दाह-संस्कार किया जाता है.

इन दोनों घाटों पर हर रोज़ सैकड़ों की संख्या में शवों के दाह-संस्कार किए जाते हैं लेकिन लॉकडाउन के बाद उपजी स्थिति की वजह से इस संख्या में भारी गिरावट आई है.

दाह संस्कार कराने वाले डोम राजा के परिवार के एक सदस्य पवन चौधरी बताते हैं कि इस समय आठ-दस शव भी बहुत मुश्किल से आ रहे हैं.

वो कहते हैं, "यहां रात-दिन दाह संस्कार होता है और अमूमन एक दिन में 150-200 शवों का अंतिम संस्कार होता था. लेकिन अब तो दहाई का आँकड़ा भी नहीं छू रहा है. इसकी वजह ये है कि बाहर के लोग तो शव ला नहीं पा रहे हैं. जो बनारस के लोग हैं, वो भी आस-पास ही कहीं अंतिम संस्कार कर ले रहे हैं क्योंकि इतनी दूर लाना भी अपने आप में समस्या है. इस समय लोगों का निकलना और वो भी कई लोगों के साथ निकलना असंभव-सा है."

कोरोना संकट, मणिकर्णिका घाट
Samiratmaj Mishra /BBC
कोरोना संकट, मणिकर्णिका घाट

हालांकि वाराणसी के ज़िलाधिकारी कौशलराज शर्मा कहते हैं कि प्रशासन की ओर से शवों के अंतिम संस्कार को लेकर कोई रोक-टोक नहीं है.

उनके मुताबिक, "लोग अभी भी शवों को लेकर आ रहे हैं और अंतिम संस्कार कर रहे हैं. बाहर से आने वाले शवों के लिए भी कोई रोक-टोक नहीं है. लोगों से यही अपील की जा रही है कि अंतिम संस्कार के लिए ज़्यादा भीड़ न लाएं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें."

मणिकर्णिका घाट पर लॉकडाउन के बाद न सिर्फ़ शवों की कमी हो गई है बल्कि जो शव आ भी रहे हैं उन्हें जलाने के लिए ज़रूरी सामान, यहां तक कि कफ़न भी नहीं मिल रहा है.

पवन चौधरी बताते हैं, "दुकानें सभी बंद हैं. यहां आस-पास जो दुकानें खुली हैं उनके पास जमा स्टॉक से अभी तक काम चल रहा था लेकिन अब वह भी ख़त्म होने के कगार पर है."

मणिकर्णिका घाट के पास लकड़ी की दुकान चलाने वाले राजू बताते हैं कि लकड़ी का भी स्टॉक ख़त्म होने वाला है.

वो कहते हैं, "अब तो हमारे पास जो लकड़ियां थीं, वो ख़त्म होने वाली हैं और आगे कैसे इंतज़ाम होगा, पता नहीं. उम्मीद है कि हमें भी पास मिल जाए. यदि मिल जाता है तो लकड़यों का इंतज़ाम हो जाएगा, नहीं तो दिक़्क़त हो जाएगी."

कोरोना संकट, मणिकर्णिका घाट
Samiratmaj Mishra /BBC
कोरोना संकट, मणिकर्णिका घाट

मणिकर्णिका घाट पर बड़ी संख्या में शवों के दाह संस्कार की वजह से यहां कई लोगों को रोज़गार मिला हुआ है तो कई लोग उससे संबंधित वस्तुओं के व्यापार से आजीविका चला रहे हैं.

यहां काम करने वाले लालमुनि चौधरी कहते हैं कि हर समय चालीस-पचास लोग यहां काम करते हैं लेकिन अब जबकि काम ही नहीं है तो कई लोग घाट छोड़कर दूसरी जगहों पर चले गए हैं.

वाराणसी के रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार विक्रांत दुबे बताते हैं, "यहां आस-पास के कई ज़िलों के अलावा बिहार, झारखंड जैसे दूसरे राज्यों से भी लोग दाह संस्कार के लिए आते हैं. चूंकि आना-जाना बिल्कुल बंद है और लोग ख़ुद भी डरे हुए हैं इसलिए जितना संभव हो रहा है, घर के पास ही अंतिम संस्कार कर रहे हैं."

"चूंकि कई तरह की पाबंदियां हैं, इसलिए लोग आने से कतरा भी रहे हैं. लेकिन इसका विपरीत प्रभाव यह पड़ा है कि क़रीब तीन सौ परिवारों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट आ गया है जो काम में लगे हुए थे."

कोरोना संकट, मणिकर्णिका घाट, लालमुनि चौधरी
Samiratmaj Mishra /BBC
कोरोना संकट, मणिकर्णिका घाट, लालमुनि चौधरी

पवन चौधरी बताते हैं कि हरिश्चंद्र श्मशान घाट पर बिजली से भी दाह संस्कार किया जाता. उनके मुताबिक, एक कोरोना पॉज़िटिव व्यक्ति की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार भी यहीं किया गया था.

चौधरी बताते हैं कि कोरोना संक्रमित की मौत से पहले घाट को पूरी तरह खाली करवाया गया था और वहां सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की टीम मौजूद थी लेकिन कुछ लोगों में इस बात का भी डर है कि कहीं उसका प्रभाव अब तक न मौजूद हो.

यूं तो लॉकडाउन के कारण यहां के सभी घाटों पर सन्नाटा है लेकिन मणिकर्णिका घाट पर इतने सन्नाटे की उम्मीद किसी को नहीं थी.

बनारस के ही रहने वाले ज्ञान प्रकाश सोनकर कहते हैं, "यहां तो तब भी दाह संस्कार चलते रहते हैं जब बाढ़ में घाट की सारी सीढ़ियां डूब जाती हैं या फिर कई दिनों तक घनघोर वर्षा होती रहती है."

"आंधी-पानी कोई मुसीबत यहां जलने वाली चिताओं की लौ को नहीं कम कर पाई है लेकिन कोरोना के भय ने सब ठंडा कर दिया है."

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+