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कोरोना वैक्सीन जब आएगी तब आएगी, लेकिन तब तक ऐसा करके भी खुद को रख सकते हैं सुरक्षित?

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बेंगलुरू। कोरोनावायरस महामारी से अकेले भारत में 40 लाख से अधिक मरीजों की संख्या बेहद डरावनी है। अब तक करीब 70 हजार लोग काल के गाल में समा चुके हैं, लेकिन कोरोना से बचाव के लिए अभी तक वैक्सीन की कोई सूचना नहीं है। वैक्सीन के संभवतः 2021 के मध्य में आने की उम्मीद है, लेकिन रोजाना सामने आ रहे 80000-85000 से नए मरीजों की संख्या पर लगाम कैसे लगेगी। यह बड़ा सवाल बन गया है, क्योंकि ऐसा ही रहा तो वह दिन दूर नहीं जब रोजाना नए मामलों की संख्या एक लाख पार कर जाएगी।

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    कोरोना से बचाव के लिए वैकल्पिक साधनों पर फोकस करना जरूरी है

    कोरोना से बचाव के लिए वैकल्पिक साधनों पर फोकस करना जरूरी है

    ऐसे में यह सवाल गंभीर हो जाता है कि जब तक वैक्सीन हमारे बीच उपलब्ध नहीं है, तब कोरोना के विरूद्ध लड़ाई और उससे बचाव के लिए वैकल्पिक साधनों पर फोकस किया जाए। यह सच है कि दुनियाभर में करीब 170 वैक्सीनों के निर्माण पर काम बेहद ही तेज गति चल रहा है, जिनमें से तो 30 वैक्सीनों का ट्रायल आखिरी चरण में है, लेकिन गुंजाइस कितनी है कि वो बाजार में कब उपलब्ध हो जाएंगे, इसका दावा कोई नहीं कर सकता है। खुद डब्ल्युएचओ कह चुकी है कि वैक्सीन 2021 के मध्य तक ही लोगों के लिए उपलब्ध हो सकेगी।

    2021 के मध्य से पहले वैक्सीन वितरण शुरू होने की उम्मीद नहींः WHO

    2021 के मध्य से पहले वैक्सीन वितरण शुरू होने की उम्मीद नहींः WHO

    हालांकि रूस, अमेरिका और चीन के साथ भारत भी एंटी नोवल कोरोना वैक्सीन ट्रायल जारी है, लेकिन उपलब्धता को लेकर सभी आशंकित हैं। इस मामले पर WHO की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने शुक्रवार को जारी एक बयान में स्पष्ट भी कर दिया कि 2021 के मध्य से पहले कोरोना वैक्सीन का वितरण शुरू होने की उम्मीद नहीं है। यानी 2020 के बाद ही कोरोना वायरस वैक्सीन आम लोगों तक पहुंच हो पाएगी, लेकिन तब तक क्या, यह सवाल काफी महत्वपूरण हो जाता है।

    विटामिन डी कोरोना से सुरक्षा में काफी मददगार साबित हो सकता है

    विटामिन डी कोरोना से सुरक्षा में काफी मददगार साबित हो सकता है

    ऐसे में जरूरी हो जाता है कि कोरोना से सुरक्षा के लिए वैकल्पिक साधनों में फोकस किया जाए। एक नए अध्ययन के हवाले से पता चला है कि विटामिन डी कोरोना से सुरक्षा में काफी मददगार साबित हो सकता है और विटामिन डी की कमी के चलते भी कोरोना का खतरा बढ़ जाता है। जी हां, विटामिन डी एक हार्मोन है, जिसकी उत्पत्ति हमारी त्वचा सूर्य की रोशनी के संपर्क में आने पर करती है। यह शरीर में कैल्शियम और फॉस्फेट की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद करता है, जो हड्डियों, दांतों और मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी है।

    कोरोना काल में घरों में बंद लोगों को नहीं मिल रहीं है सूर्य की रोशनी

    कोरोना काल में घरों में बंद लोगों को नहीं मिल रहीं है सूर्य की रोशनी

    शोधकर्ताओं की मानें तो विटामिन डी की कमी और कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच संबंध पाया गया है। अमेरिका की शिकागो यूनिवर्सिटी से जुड़े इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता डेविड मेल्टजर के मुताबिक हमारी इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) की कार्यप्रणाली के लिहाज से विटामिन डी अहम स्रोत है। यह पहले ही पता चल चुका है कि विटामिन डी सप्लीमेंट से श्वसन तंत्र में वायरल संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है। इस विश्लेषण से भी यही जाहिर होता है कि कोरोना संक्रमण के मामले में भी यह बात सच हो सकती है। अब जरूरी है कि घरों में बंद लोगों सोशल डिस्टेंसिंग का पालने करते हुए खुले आसमान के नीचे सूर्य की रोशनी में बैठना चाहिए।

    सुबह 11 बजे तक सूर्य की रोशनी में मात्रा प्रचुर रहती है विटामिन डी

    सुबह 11 बजे तक सूर्य की रोशनी में मात्रा प्रचुर रहती है विटामिन डी

    कहा जाता है कि धूप विटामिन-डी का प्राकृतिक स्त्रोत है और सुबह 11 बजे तक इसकी मात्रा प्रचुर रहती है। रोजाना करीब 30 मिनट तक सूर्य की रोशनी में बैठने से शरीर में विटामिन डी की कमी की पूर्ति की जा सकती है। शरीर में विटामिन-डी की कमी की आपूर्ति के लिए विटामिन का इंजेक्शन, सीरप बेहतर भी सरल उपाय हैं, लेकिन सूर्य की रोशनी सबसे बेहतर विकल्प है, जिसे छत पर बैठकर या खुले आंगन में बैठकर शऱीर की जरूरत के मुताबिक पूरा किया जा सकता है। विटामिन-डी की टैबलेट और पाउडर का भी विकल्प है।

    विटामिन डी ही नहीं, विटामिन सी और जिंक सेवन भी है बेहतर सप्लीमेंट

    विटामिन डी ही नहीं, विटामिन सी और जिंक सेवन भी है बेहतर सप्लीमेंट

    राजधानी दिल्ली के मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्टिल से रिकवर हुए एक मरीज की जुबानी की मानें तो उनके स्वस्थ होने में कोरोना की मुख्य दवा के साथ दी गईं जिंक, विटामिन सी और विटामिन डी की गोलियों ने उनके जल्द स्वस्थ होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाईं। दरअसल, जिंक, विटामिन सी और विटामिन डी दवाइयों का सप्लीमेंट कोरोना वायरस से सुरक्षा में बेहद मददगार हैं। इन तीनों का उपयोग कोरोना संक्रमित ही नहीं, बल्कि संक्रमण से सुरक्षा के लिए भी उतने ही कारगर है, क्योंकि तीनों की कमी शरीर में प्रतिरोधी क्षमता को कमजोर बनाती है।

    विटामिन सी इम्यून सिस्टम को मज़बूत कर रोगों से लड़ने की शक्ति देता है

    विटामिन सी इम्यून सिस्टम को मज़बूत कर रोगों से लड़ने की शक्ति देता है

    विटामिन सी हमारे इम्यून सिस्टम को मज़बूत करके रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। यह एक एंटी ऑक्सीडेंट भी है। यह हमारे रक्त में मौजूद ल्यूकोसाइट-व्हाइट ब्लड सेल्स के काम करने के लिए ज़रूरी है। जिससे हमारे शरीर की श्वेत रक्त कोशिकायें किसी भी संक्रमण से मज़बूती से लड़ पाती हैं। लखनऊ के मेदांता अस्पताल में वरिष्ठ डॉक्टर रूचिता शर्मा ने बताया कि इन विटामिन की मदद से उन्होंने कोरोना मरीज़ों की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखा।

    वयस्क के लिए रोज़ विटामिन सी की 65 से 90 मिलीग्राम की डोज निर्धारित है

    वयस्क के लिए रोज़ विटामिन सी की 65 से 90 मिलीग्राम की डोज निर्धारित है

    एक वयस्क के लिए रोज़ विटामिन सी की 65 से 90 मिलीग्राम की डोज निर्धारित है। इसकी अधिकतम सीमा 2000 मिलीग्राम रोज़ है। विटामिन सी पानी में घुलनशील है। विटामिन सी न तो शरीर के भीतर बनता है न ही स्टोर हो पाता है। इसलिए यदि इसकी मात्रा ज़्यादा भी हो जाए तो नुक़सानदायक नहीं क्योंकी शरीर अधिक मात्रा को फ़िल्टर करके बाहर कर देता है।

    जिंक कोरोना वायरस को नाक और गले में बढ़ने से रोकता है

    जिंक कोरोना वायरस को नाक और गले में बढ़ने से रोकता है

    कोरोना वायरस का सबसे पहले अध्ययन करने वालों में एक पैथोलॉजिस्ट और वायरोलॉजिस्ट जेम्स रौब्ब के मुताबिक़ जिंक कोरोना वायरस को नाक और गले में बढ़ने से रोकता है। शोध से यह साबित हुआ है कि जिंक सर्दी के असर को कम करता है। जुखाम को जल्दी ठीक करता है। साथ ही यह विटामिन सी के शरीर में सोखने की क्षमता को भी बढ़ाता है। यह व्हाइट ब्लड सेल्स के परिपक्व होने में मदद करता है फलस्वरूप शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक है।

    कोरोना के आरएनए पॉलीमर को बाधित कर उसे बढ़ने से रोकता है जिंक

    कोरोना के आरएनए पॉलीमर को बाधित कर उसे बढ़ने से रोकता है जिंक

    शरीर के भीतर मौजूद सौ से ज़्यादा विभिन्न एन्जाइम को सुचारू रूप से काम करने के लिए जिंक की ज़रूरत होती है। शरीर ज़्यादा जिंक स्टोर नहीं कर सकता है, इसलिए इसकी लगातार आपूर्ति ज़रूरी है। अध्ययन के मुताबिक़ जिंक कोरोना वायरस के आरएनए पॉलीमर को बाधित कर उसे बढ़ने से रोकता है। जिंक की कमी से न्यूमोनिया होने का ख़तरा होता है। इन सभी खूबियों की वजह से जिंक भी कोरोना वायरस से लड़ाई का एक प्रमुख हथियार है। यह हमारे स्वाद और गंध की क्षमता के लिए ज़रूरी है जो कि कोरोना होने पर कई बार प्रभावित हो जाती है।

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    English summary
    The number of patients in India alone is more than 4 million due to the coronavirus epidemic. So far, about 70 thousand people have died in the cheek of the time, but there is no information about the vaccine to protect against corona. The vaccine is expected to arrive in mid-2021, but how will the number of new patients from 80000-85000 coming out daily be controlled. This has become a big question, because if this remains so then the day is not far when the number of new cases will cross one lakh daily.
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