क्या कोरोना काल में बच्चों के जीवनरक्षक वैक्सीनेशन में हुई है बड़ी चूक? जानें सच्चाई
नई दिल्ली, 16 जुलाई। कोरोना महामारी के दौरान कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह आरोप लगाया गया है कि लाखों भारतीय बच्चों को उनको रुटीन में लगने वाली वैक्सीन नहीं लग पाई है। सरकार ने इन दावों पर अपना बयान जारी किया है। सरकार ने कहा ये रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और सच्ची तस्वीर नहीं दर्शाती हैं।

बता दें मीडिया रिपोर्ट में ये दावा किया गया कि COVID के कारण हुए व्यवधानों के कारण अपने नियमित टीकाकरण से चूक गए हैं, जिससे भविष्य में प्रकोप और मृत्यु का खतरा बढ़ गया है। लेकिन सरकार ने कहा ये रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और सच्ची तस्वीर नहीं दर्शाती हैं।
गौरतलब है कि मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2020 में 2.3 करोड़ बच्चों को जीवनरक्षक वैक्सीन नहीं लग पाई है। बच्चों का वैक्सीनेशन न होने से इसका असर भविष्य में बच्चों पर पड़ सकता है। बच्चे कोरोना काल में वैक्सीनेशन से महरूम रह गए हैं इसका खुलासा डब्लूएचओ की रिपोर्ट में किया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनाइटेड नेशन चिल्ड्रेन इमरजेंसी फंड (यूनिसेफ) ने अपनी संयुक्त रिपोर्ट में ये खुलासा किया है कि 2020 में 1.7 करोड़ बच्चे ऐसे रहे जिन्हें किसी भी टीके की एक भी डोज नहीं लगी, वहीं कुल 2.3 करोड़ बच्चे किसी न किसी तरह के जीवनरक्षक टीके से वचिंत रह गए।
इन रिपोर्ट के अनुसार कोरोना महामारी फैसने से पहले डीपीटी, खसरा और पोलियों के टीकाकरण की दर 86 फीसदी थी और डब्ल्यूएचओ का मानक 95 फीसदी है। 2019 में 35 लाख बच्चों को डीटीपी-1 वैक्सीन की पहली डोज भी नहीं लगी थी। वहीं तीस लाख बच्चे खसरे के टीके से वंचित रहे।












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