Coromandel Mishap: लाशों के बीच चल रही थीं सांस, ट्रक में जिंदा पाया गया शख्स, रोंगटे खड़े करने वाली दास्तां

Coromandel Mishap 275 लोगों की मौत का कारण बना। ओडिशा के इस हादसे मेें एक ऐसा शख्स भी है जो लाशों की ढेर के बीच जिंदा बचने में कामयाब रहा। ट्रक में भरी लाशों के बीच इस शख्स की कहानी रोंगटे खड़ी करने वाली है।

Coromandal Mishap

Coromandel Mishap के बीच कई लोग ऐसे हैं जो बाल-बाल बचे। ऐसा इसलिए क्योंकि कोई झाड़ियों में जिंदा बरामद हुआ, कोई सीट एक्सचेंज के कारण जिंदा बच गया। ऐसी ही कहानी है लाशों के ढेर में जिंदा बचे शख्स की।

दरअसल, ओडिशा के बालासोर में तीन ट्रेनों की टक्कर में एक घायल, बेहोश व्यक्ति को गलती से शवों के साथ एक ट्रक में डाल दिया गया। होश आने पर उसने खुद को लाशों के बीच पाया जो मुर्दाघर में ले जाए जा रहे थे।

बिस्वजीत मलिक नाम का ये शख्स समय रहते बचाव दल को संकेत देने में कामयाब रहे, जिसके बाद उन्हें स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, मलिक के पिता हेलाराम मलिक ने कोलकाता में ये जानकारी दी।

24 वर्षीय बिस्वजीत गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हालांकि, जिजीविषा ऐसी की बुरी तरह डैमेज हो चुकी रेलवे बोगी के बाहर अपने दम पर निकलने में सफल रहे। क्षतिग्रस्त कोच से बाहर निकलने के बाद रेल की पटरी पर रेंगकर सुरक्षित बचने की कोशिश में वह बेहोश हो गया था।

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    बचावकर्मियों ने बिस्वजीत को मृत समझकर अन्य शवों के साथ एक ट्रक में डाल दिया। ट्रक में अचानक बिस्वजीत को होश आया और वह बचाव दल का ध्यान आकर्षित करने में कामयाब रहे। पिता कोलकाता में एक आयरनमॉन्गर के रूप में काम करते हैं। उन्होंने बिस्वजीत की रोंगटे खड़े करने वाली दास्तां बताई।

    बिस्वजीत के पिता हेलाराम मलिक के अनुसार, "उसने किसी तरह ट्रेन से खुद निकलने के बाद हमें फोन किया। अपने हाथ की हालत और खून बहता देखते ही वह बेहोश हो गए। जब होश आया तो उसने खुद को 8-10 लाशों के ढेर के नीचे पाया।

    पिता के अनुसार, बिस्वजीत दाहिना हाथ घायल हो गया, लेकिन उसका बायां हाथ ठीक था। इसलिए उसने हाथ लहराना शुरू कर दिया। बचाव कर्मियों का ध्यान पड़ने के बाद उन्हें लाशों की ढेर से अलग कर अस्पताल भेजा गया।

    गोपालपुर से अपने बेटे को कार से कोलकाता ले जाने वाले मलिक ने कहा, लाशों की ढेर से अलग कर बिस्वजीत को मुर्दाघर के बदले गोपालपुर अस्पताल भेजा गया। अस्पताल के अधिकारियों ने उनके बेटे को छुट्टी देने से मना कर दिया, उन्हें एंबुलेंस देने से भी मना कर दिया।

    बिस्वजीत मलिक वर्तमान में एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती हैं। डॉक्टरों ने कहा है कि उनका हाथ टूट गया है और उनका पैर में भी चोट लगी है। हादसे के बाद रेल मंत्रालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच की सिफारिश की है। तृणमूल कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने घटना को कवर-अप का प्रयास बताया जा रहा है।

    बता दें कि ओडिशा के बालासोर में शुक्रवार को तीन ट्रेनों की टक्कर हुई। देश के सबसे खराब रेल हादसों में एक बालासोर एक्सिडेंट में 275 लोगों की मौत हुई। इसके अलावा 1,170 से ज्यादा लोग घायल भी हुए, करीब 300 लोग अस्पताल में हैं।

    रेलवे के बयान के अनुसार "सिग्नल में हस्तक्षेप" के कारण कोरोमंडल एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हुई। इसका इंजन और कोच लूप लाइन पर खड़ी लौह अयस्क से लदी मालगाड़ी से टकराए। बोगियां भी तीसरे ट्रैक में गिरीं। इस पटरी पर तेज गति से आ रही बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस बोगियों से टकराईं। दोनों यात्री ट्रेनों के 17 डिब्बे बेपटरी हो गए।

    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि "मूल कारण और आपराधिक कृत्य के लिए जिम्मेदार लोगों" की पहचान कर ली गई है। उन्होंने कहा, 'प्वाइंट मशीन की सेटिंग बदली गई थी। यह कैसे और क्यों की गई, इसका खुलासा जांच रिपोर्ट में होगा।'

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