'केंद्र की कुर्सी' को लेकर अब सोनिया ने अपने खास 'सिपहसालार' को सौंपी अहम जिम्मेदारी

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 के लिए मतदान का सातवां और आखिरी चरण ही बचा हुआ है। ऐसे में देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस केंद्र की गद्दी तक पहुंचने के लिए अभी से जुगत में लग गई है। इसमें अहम भूमिका मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ निभा रहे हैं, क्योंकि जिम्मेदारी उन्हीं को दी गई। वैसे इस बार के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने काफी कम सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। ऐसे में अगर लोकसभा चुनाव परिणाम में त्रिशंकु की स्थिति बनती है तो केंद्र की सत्ता तक वही पहुंचेगा जिसके बाद क्षेत्रीय पार्टियों का समर्थन हासिल होगा।

कमलनाथ निभाएंगे अहम भूमिका

कमलनाथ निभाएंगे अहम भूमिका

राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चा है कि कांग्रेस ने बीजद प्रमुख नवीन पटनायक, वाईएस कांग्रेस के जगनमोहन रेड्डी और टीआरएस के के चंद्रशेखर राव तक पहुंचने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ के अलावा पार्टी के कुछ सीनियर नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। बताया जा रहा है कि कमलनाथ और इन नेताओं के बीच बातचीत भी शुरू हो गया है। कहा ये भी जा रहा है कि 23 मई को चुनाव परिणाम वाले दिन सोनिया गांधी विपक्षी नेताओं के साथ एक बैठक भी करेंगी।

विपक्षी नेताओं को फोन कर सोनिया गांधी ले रहीं जानकारी

विपक्षी नेताओं को फोन कर सोनिया गांधी ले रहीं जानकारी

लोकसभा चुनाव के दौरान सोनिया गांधी पूरी तरह से शांत थी लेकिन अब जब सत्ता हासिल करने की बारी आ रही है तो वो एक्टिव हो गईं हैं। इसलिए वो दिल्ली में बैठेकर ही चुनावी रणनीति तैयार कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सोनिया गांधी ने प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं को फोन करे उनसे जानकारी ली है कि वे चुनाव परिणाम के समय दिल्ली में रहेंगे की नहीं। इसलिए सोनिया गांधी पूरे प्लान के तहत उन पार्टी के नेताओं को एकजुट करने में जुटी हुईं है जिनका मोदी सरकार या फिर बीजेपी से मतभेद है।

त्रिशंकु की स्थिति में क्षेत्रिय पार्टियों की भूमिका होगी अहम

त्रिशंकु की स्थिति में क्षेत्रिय पार्टियों की भूमिका होगी अहम

राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो अगर मौजूदा एनडीए की मोदी सरकार लोकसभा चुनाव में बहुमत हासिल नहीं कर पाती है तो सरकार बनाने में क्षेत्रिय पार्टियों की भूमिका अहम हो जाएगी। खासकर बीजद, टीआरएस और वाईएसआरसीपी जैसी पार्टियां हैं जिनके सहयोग से दूसरी पार्टी केंद्र की गद्दी हासिल कर सकती है। लेकिन कहा ये भी जा रहा है कि इन पार्टी के नेताओं को राजी करना आसान नहीं है। क्योंकि इधर यूपी में सपा-बसपा गठबंधन भी है जो फिलहाल तो कांग्रेस से दूरी बनाए हुई हैं लेकिन चुनाव बाद ये किसको समर्थन देंगी कोई नहीं जानता है।

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