One Nation One Election कमेटी का सदस्य बनने से कांग्रेस सांसद अधीर रंजन ने किया इनकार, जानें क्या कहा?
One Nation One Election: मोदी सरकार लंबे समय से एक राष्ट्र एक चुनाव की पैरवी कर रही है। केंद्र सरकार ने अब इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए वन नेशन वन इलेक्शन के संबंध में पूर्व राष्ट्रपति कोविंद की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर दिया है। वहीं शनिवार को कानून मंत्रालय ने इस कमेटी के सदस्यों को भी नियुक्त कर दिया है।

पूर्व राष्ट्रपति की अध्यक्षता में गठित इस कमेटी में गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस सासंद अधीर रंजन के अलावा अन्य लोगों को सदस्य नियुक्त किया है। वन नेशन वन इलेक्शन पर बनाई गई कमेटी का सदस्य नियुक्त किए जाने पर अधीर रंजन ने प्रतिक्रिया देते हुए एक पत्र भेजा है।
अधीर रंजन बोले- ये पूरी तरह से धोखा है
कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' की जांच के लिए केंद्र द्वारा गठित 8 सदस्यीय समिति का हिस्सा बनने के निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया है। अधीर रंजन ने पत्र में लिखा कि "मुझे उस समिति में काम करने से इनकार करने में कोई झिझक नहीं है, जिसके संदर्भ की शर्तें इसके निष्कर्षों की गारंटी के लिए तैयार की गई हैं। मुझे डर है कि यह पूरी तरह से धोखा है।"
इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है
इसके अलावा अधीर रंजन ने इस पत्र में आगे लिखा "मुझे लगता है कि राज्यसभा में मौजूदा एलओपी को बाहर रखा गया है। यह संसदीय लोकतंत्र की प्रणाली का जानबूझकर किया गया अपमान है। इन परिस्थितियों में, मेरे पास आपके निमंत्रण को अस्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।"
जानिए कानून मंत्रालय ने किन लोगों को बनाया है सदस्य
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली कमेटी में अमित शाह अधीर रंजन, पूर्व राज्यसभा सांसद गुलाम नबी आजाद, वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष एनके सिंह, लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष सी कश्यप, सीनियर हरीश साल्वे और पूर्व सीवीसी संजय कोठारी को कानून मंत्रालयल में सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है। इनके अलावा कानून मंत्री अर्जुन राम मेघावाल और विधि मंत्रालय के सचिव इस कमेटी के विशेष आमंत्रि सदस्य बनाए गए हैं।
कमेटी क्यों की गई है गठित
बता दें इस कमेटी एक राष्ट्र एक कानून पर तुरंत काम शुरू कर देगी। इस कमेटी का हेड ऑफिस दिल्ली होगा। वन नेशन वन इलेक्टशन प्रस्ताव पर पूर्व राष्ट्रपति की अध्यक्षता में गठित की गई कमेटी दल-बदल कानून, अविश्वास प्रस्ताव और त्रिशंकु विधानसभा या लोकसभा की परिस्थितियों का विश्लेषण करेगी और उसी आधार पर केंद्र सरकार को इस बिल पर सुझाव देगी।












Click it and Unblock the Notifications