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हरियाणा का चुनावी दंगल: विजनरी संकल्प पत्र और भूपिंदर के अनुभव से बाजी पलटने की उम्मीद में कांग्रेस

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नई दिल्ली- हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने अपने-अपने घोषणापत्र जारी कर दिए हैं। चुनाव प्रचार के लिए अब सिर्फ हफ्ते भर का वक्त बचा है और सभी दलों ने इसके लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। बीजेपी की ओर से खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी प्रदेश में धुआंधार रैलियों के जरिए मतदाताओं को रिझाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। बीजेपी को जनता के सामने पिछले पांच साल की मनोहर लाल खट्टर सरकार के कार्यकाल का हिसाब देने की भी चुनौती है। मैदान में इंडियन नेशनल लोकदल और उससे अलग होकर बनी जननायक जनता पार्टी भी है, जो अपनी-अपनी ताकत के मुताबिक मैदान में जोर लगा रही हैं। वैसे जहां तक मैनिफेस्टो का सवाल है तो उसमें कांग्रेस ने महिला, दलित, युवा रोजगार और किसानों के जितने आयाम को समेटा है, उससे उसके दायरे का विस्तार भाजपा के 'संकल्प पत्र' पर भारी पड़ता दिख रहा है। ऊपर से कांग्रेस के लिए राहत की बात ये है कि उसने पार्टी के आंतरिक कलह पर बड़े ही बेहतरीन तरीके से काबू पा लिया है और पूरी पार्टी भूपिंदर सिंह हुड्डा के अनुभवी नेतृत्व में चुनाव मैदान में डटी हुई है।

कांग्रेस का 'संकल्प पत्र'

कांग्रेस का 'संकल्प पत्र'

कांग्रेस के मैनिफेस्टो में उसे तैयार करने वाले का विजन हर जगह नजर आता है। क्योंकि, इसमें महिला, युवा, रोजगार, दलित और किसान हर वर्गों पर फोकस रखा गया है। हम इन सबके बारे में कांग्रेसी घोषणापत्र में किए गए मुख्य वादों का जिक्र करेंगे और आगे उसकी भाजपा के 'संकल्प पत्र' में किए गए वादों से तुलना करेंगे।

महिलाएं- पिछले लोकसभा चुनाव में हरियाणा में कुल वोट प्रतिशत 70.34 इतना रहा था। अगर इनमें महिलाओं के वोट शेयर की बात करें तो कुल महिला वोटरों में से 69.55 वोटरों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। यानि हरियाणा में अब महिलाएं खुलकर वोट डालने के लिए घरों से बाहर निकल रही हैं। कांग्रेस के घोषणापत्र में महिलाओं के लिए सरकारी और निजी संस्थानों में 33% आरक्षण का वादा किया गया है। पार्टी पंचायती राज संस्थानों, नगर पालिका, नगर निगम और नगर परिषदों में भी इन्हें 50% आरक्षण देगी। महिलाओं की स्वामित्व वाली संपत्ति में हाउस टैक्स में 50% की छूट रहेगी। महिलाओं के लिए अलग बसें भी चलाई जाएंगी, जिसमें महिला ड्राइवर और कंडक्टर ही रहेंगे। विधवा, विकलांग, तलाकशुदा और अविवाहित महिलाओं का 5,100 रुपये महीना पेंशन मिलेगा। बीपीएल महिलाओं का हर महीने चूल्हा खर्च के तौर पर 2,000 रुपये दिए जाएंगे। हरियाणा रोडवेज में महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी। महिलाओं को बुढ़ापा पेंशन 55 साल की उम्र में ही मिलेगी, जिसके तहत 5,100 रुपया महीना पेंशन दिया जाएगा। गर्भवती महिलाओं को बच्चे के जन्म तक 3,500 रुपये मासिक और बच्चे के 5 साल के होने तक 5,000 रुपये हर महीने दिए जाएंगे।

युवा और रोजगार पर फोकस- कांग्रेस ने हरियाणा में हर परिवार में योग्यतानुसार एक नौकरी सुनिश्चित करने का वादा किया है। रोजगार मिलने तक ग्रेजुएट को 7,000 रुपये महीना और पोस्ट ग्रेजुएट को 10,000 रुपये महीना बेरोजगारी भत्ता देने का वादा। हरियाणा के स्थानीय लोगों को नौकरियों में 75% आरक्षण दिया जाएगा, निजी क्षेत्र में भी। पिछड़े जिलों में नए उद्योग लगाने के लिए जमीन खरीदने में स्टाम्प ड्यूटी में 50% की छूट देने की भी बात कही गई है। एक बात और खास है कि सरकारी नौकरियों के लिए परीक्षा का इंतजाम अभ्यर्थियों के गृह जिले में ही किया जाएगा।

किसानों पर पूरा ध्यान- किसानों का कर्ज सरकार बनने के 24 घंटे के अंदर माफ कर दिया जाएगा। भूमिहीन किसानों को भी कर्जमाफी का लाभ देगी कांग्रेस। दो एकड़ तक जमीन वाले किसानों को मुफ्त बिजली का वादा भी किया गया है। फसल बीमा की किश्त सरकार ही देगी। सूखा या प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होने पर सरकार प्रति एकड़ 12,000 रुपये का मुआवजा सुनिश्चित करेगी। खेत में काम करते समय किसान की मौत होने पर 5 लाख रुपये और खेती कर रहे मजदूर की मौत पर 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता सरकार उसके आश्रितों को देगी। हर जिले में एक आधुनिक कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना की जाएगी। किसानों की फसल उचित समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा। किसान पराली न जलाएं, इसलिए उसका मुआवजा भी सरकार देगी।

दलित और पिछड़े समाज को अधिकार- पहली से 10वीं तक 12,000 रुपये और 11वीं से 12वीं तक के छात्रों को 15,000 रुपये सालाना स्कॉलरशिप दिया जाएगा। अनुसूचित जाति के लिए अनुसूचित जाति आयोग का पुनर्गठन किया जाएगा और क्रीमी लेयर का दायरा 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख सालाना किया जाएगा। सरकारी और अर्ध-सरकारी, बोर्ड निगमों में खाली पदों के एससी/बीसी के बैकलॉग को भरा जाएगा। स्वच्छता के मद्देनजर 50,000 सफाई कर्मचारी बहाल करेंगे। यानि कांग्रेस मतदाताओं को आकर्षित करने वाले हर मुद्दों पर गहराई से फोकस रखा है और उसके संकल्प पत्र का विजन पूरी तरह से साफ है, उसमें कन्फ्यूजन की कहीं कोई जगह नहीं छोड़ी गई है।

बीजेपी का 'संकल्प पत्र'

बीजेपी का 'संकल्प पत्र'

बीजेपी ने भी अपने 'संकल्प पत्र' में महिलाओं, युवा, किसान और दलितों की बात की है, लेकिन कांग्रेस के विस्तृत दृष्टिकोण और भाजपा के नजरिए में अंतर महसूस किया जा सकता है।

महिलाएं- बीजेपी ने वादा किया है कि फिर से सत्ता में लौटने पर वह राज्य की महिलाओं और बच्चों को एनीमिया मुक्त बनाएगी। जिन परिवारों की सालाना आय 1,80,000 रुपये या जोत 5 एकड़ से कम है उनकी महिलाओं को केजी से पीजी तक सरकारी संस्थानों में मुफ्त शिक्षा का इंतजाम करेगी। ग्रामीण और शहरी इलाकों में विशेष छात्रा परिवहन सुरक्षा बस/वैन सेवा देना सुनिश्चित करेगी। पुलिस में महिलाओं की संख्या बढ़ाई जाएगी। हर कस्बे में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के सामानों की बिक्री के लिए स्टोर खुलेंगे। गांव-शहरों में सार्वजनिक स्थलों पर सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन लगाएंगे। सार्वजनिक क्षेत्रो में सीसीटीवी की संख्या 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख करेंगे। हर स्कूल जाने वाली लड़की को मुफ्त सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दी जाएगी। महिलाओं के अत्याचार के मामलों में जरूरत पड़ने पर फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना। हर शहर में नारी निकेतन विकसित करेंगे। शहरों की सिटी बस सेवा में जरूरत के हिसाब से पार्टी पिंक बस सेवा शुरू करेगी।

हर हाथ को काम देने का वादा- हरियाणा के स्थानीय लोगों को 95% से अधिक रोजगार देने वाले उद्योगों को विशेष लाभ दिया जाएगा। हरियाणा के हर क्षेत्र में रोजगार की कल्पनाको वास्तविक बनाएंगे। नया युवा विकास एवं स्वरोजगार मंत्रालय गठन करेंगे। हरियाणा स्टार्टअप मिशन की शुरुआत की जाएगी, जिसके तहत 4 एंटरप्रोन्योरशिप हब बनाए जाएंगे। 'मुद्रा' लोन योजना के प्रभावी इस्तेमाल पर जोर रहेगा। कौशल विकास केंद्रों को बढ़ाकर प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का प्रभावी तरीके से उपयोग। 500 करोड़ रुपये खर्च करके 25 लाख युवाओं को कुशल बनाएंगे। सभी जिला रोजगार कार्यालयों को मॉडल करियर केंद्रों के रूप में अपग्रेड करेंगे। उच्च एव व्यावसायिक शिक्षा के लिए बिना गारंटी लोन उपलब्ध कराया जाएगा। 1.8 लाख से कम सालाना आय या 5 एकड़ से कम जोत वाले परविरा के बच्चों को मुफ्त कोचिंग की सुविधा।

खेती और किसान- 2022 तक किसान की आय दोगुना करेंगे। 19 लाख किसानों को 6 हजार रुपये सालाना देकर पीएम-किसान का लाभ देंगे। लोन से सवा गुणा से ज्यादा जमीन गिरवी नहीं रखने का कानून बनाएंगे। किसान कल्याण की सभीयोजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के लिए उनको मुख्यमंत्री परिवार समृद्धि योजना (6 हजार रुपये) की राशि क्रियान्वित करेंगे और बची हुई राशि उनके खातों में डालेंगे। 5 एकड़ से कम जोत वाले सभी 14 किसानों को किसान मान-धन के तहत 3,000 रुपये मासिक पेंशन देंगे। 3 लाख रुपये तक ब्याज मुक्त फसली ऋण प्रदान करेंगे। हर फसल की खरीद एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित करेंगे। हर 5 गांव पर एक माइक्रोल लैब और हर मंडी में मिट्टी जांच लैब की व्यवस्था करेंगे। किसानों की योजनाओं का लाभी डीबीटी के जरिए सीधे उनके खातों में डालेंगे। हर मंडी और शुगर मिल में फसल बेचने आने वाले किसानों के लिए 10 रुपये में किसान थाली की व्यवस्था शुरू करेंगे। खेतों के रास्ते को पक्के करेंगे। किसान कल्याण प्राधिकरण को 1,000 करोड़ रुपये का बजट। किसानों के लिए एक लाख से अधिक सौर पंप स्थापित करेंगे। पशुओं को पहचान टैग देंगे। दुधारु पशुओं को बीमा के दायरे में लाएंगे। गोमूत्र और गोबर बेचने के लिए संग्रह केंद्र स्थापित करेंगे।

दलित और पिछड़ा वर्ग- संत कबीर, संत रविदास, महर्षि वाल्मीकि और डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर के विचारों को बढ़ाने के लिए प्रेरणा स्थल स्थापित करेंगे और इनसे जुड़े मुख्य स्थानों की यात्रा के लिए योजना शुरू करेंगे। एससी के उद्यमियों को स्टैंड अप इंडिया के तहत दी जाने वाली राशि बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये करेंगे। एससी वर्ग के युवाओं का अपना कारोबार शुरू करने केलिए बिना गारंटी 3 लाख रुपये तक का ऋण देंगे। सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग का बैकलॉग अभियान चलाकर पूरा करेंगे। कानून बनाकर सीवर में सफाई के लिए मानव के घुसने पर पाबंदी लगाई जाएगी।

इस तरह से कांग्रेस ने ऊपर के सभी मुद्दों पर जितना करीब से फोकस किया है और जो मतदाता जिससे सीधे आकर्षित होंगे, उसका बीजेपी के मैनिफेस्टो में पूरी तरह से अभाव नजर आता है। दूसरे शब्दों में कहें तो बीजेपी के संकल्प पत्र में कई चीजें गोल-मटोल कही गई हैं या उससे कन्फ्यूजन पैदा हो सकता है।

आईएनएलडी-जेजेपी के वादों का पिटारा

आईएनएलडी-जेजेपी के वादों का पिटारा

हरियाणा के चुनाव में बाजी मारने के लिए इंडियन नेशनल लोकदल और जननायक जनता पार्टी ने भी अपना पूरा जोर लगा रखा है। वादे और नारे देने में ये दोनों पार्टियों भी भाजपा और कांग्रेस से पीछे नहीं है। अलबत्ता ये बात अलग है कि ये परिवार की आतंकरिक कलह से ही ज्यादा परेशान हैं। वैसे जहां तक आईएनएलडी की बात है तो उसने भी किसानों और छोटे कारोबारियों के लिए कर्जमाफी का वादा किया है। उसने फसलों की कीमत स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर तय किए जाने की बात कही है और खेती के लिए मुफ्त बिजली का वादा किया है। पार्टी किसानों और छोटे कारोबारियों का 10 लाख रुपये तक का कर्ज माफ करेगी। जबकि, 200 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वाले किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं का बिल माफ किया जाएगा। किसानों से पार्टी ने वादा किया है कि सत्ता में आने पर उत्पादन लागत में 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य किसानों को दिया जाएगा। इसके साथ ही सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के अलावा आर्थिक रूप से पिछड़ी महिलाओं को उनकी शादी के लिए 5 लाख रुपये देने का भी वादा किया गया है। पार्टी ने राज्य के प्रत्येक परिवार में से एक व्यक्ति को नौकरी देने और बेरोजगार युवाओं को 15 हजार रुपये बेरोजगारी भत्ता देने का भी वादा किया है। आईएनएलडी ने निजी उद्योगों और नौकरियों में राज्य के युवाओं को 75 प्रतिशत आरक्षण देने का भी वादा किया। पार्टी ने हरियाणा को मादक पदार्थ मुक्त राज्य बनाने और अनुबंधित कर्मचारियों को 58 साल की आयु से पहले नौकरी से नहीं निकालने का भी वादा किया है। इसके अलावा पार्टी ने सफाई कर्मचारियों और चौकीदारों को 18,000 रुपये प्रतिमाह वेतन देने का भी वादा किया है। पार्टी ने सत्ता में आने पर वरिष्ठ नागरिकों को 5,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन और पांच लाख रुपये का बीमा कराने का भी वादा किया। जबकि, जेजेपी के मुताबिक वह सत्ता में आई तो 58 वर्ष के पुरुष और 55 वर्ष की महिलाओं को 5,100 रुपये मासिक पेंशन देगी। लेकिन, इन घोषणाओं के बावजूद इन दोनों पार्टियों में जो घरेलू घमासान मिल रहा है, उससे कांग्रेस को ही ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है। क्योंकि, जाट वोटों का एकतरफा झुकाव अगर कांग्रेस की ओर हो जाए तो कोई आश्चर्यजनक बात नहीं है।

कांग्रेस को हुड्डा से बाजी पलटने की उम्मीद

कांग्रेस को हुड्डा से बाजी पलटने की उम्मीद

कांग्रेस का चुनावी घोषणा पत्र जहां सभी दलों पर भारी पड़ता नजर आ रहा है, वहीं शुरुआती उठापटक के बाद पार्टी ने हरियाणा में नेतृत्व संकट पर भी पूरी तरह से कंट्रोल कर लिया है। करीब 25 फीसदी जाट आबादी वाले प्रदेश में भूपिंदर सिंह हुड्डा अभी निर्विवाद रूप से जाटों के सबसे बड़े नेता के रूप में मौजूद हैं। दूसरी तरफ कुमारी शैलेजा को पार्टी की कमान सौंपकर लीडरशिप ने एक साथ महिला को भी सम्मान दिया है और ऊपर से करीब 30 फीसदी दलित आबादी वाले राज्य में पार्टी की ताकत और मजबूत कर ली है। इनके मुकाबले दूसरी तरफ मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर हैं, जिनके खिलाफ 2016 के आरक्षण आंदोलन के लिए जाटों के एक वर्ग में अभी भी नाराजगी है। खट्टर को मुख्य रूप से गैर-जाट जातियों के वोट पर भरोसा है, लेकिन हकीकत ये है कि राम रहीम पर हुई कार्रवाई के चलते दलितों का एक वर्ग भी बीजेपी से मायूस है। इन सबके ऊपर अगर खट्टर के पास 5 साल तक हरियाणा में सरकार चलाने का अनुभव है तो इस मामले में भूपिंदर सिंह हुड्डा को उनसे दोगुना या 5 साल ज्यादा का अनुभव है। 2014 में भूपिंदर सिंह हुड्डा को एंटी-इन्कंबेंसी की वजह से जो चुनौतियां झेलनी पड़ी थीं, इसबार उसका उससे खट्टर साहब और बीजेपी को दो-चार होना पड़ रहा है। खट्टर के शासनकाल के शुरुआती दौर में राज्य सरकार ने जिस तरह से जाट आंदोलन से निपटा था, वैसा अनुभव हुड्डा के कार्यकाल में कभी देखने को नहीं मिला। खट्टर ने गलतियों से सीख-सीख कर खुद को स्थापित किया है, लेकिन हुड्डा के जमाने में मुख्यमंत्री में अनुभवहीनता को शायद ही कभी किसी ने महसूस किया। ये बात सही है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में खट्टर ने हरियाणा की सभी 10 सीटें बीजेपी की झोली में डाली हैं, लेकिन तब चुनाव नरेंद्र मोदी के नाम पर हुआ था। अबकी बार खट्टर के सामने भूपिंदर सिंह हुड्डा जैसा कद्दावर जाट नेता मौजूद है, जो हाल में सभी बाधाओं को तोड़कर खुले मैदान में उतरा है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी या मनोहर लाल खट्टर के लिए हुड्डा की अगुवाई वाली कांग्रेस का सामना करना आसान नहीं होगा और घोषणापत्र की जुगलबंदी से फिलहाल कांग्रेस, भाजपा पर भारी ही पड़ती दिख रही है।

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English summary
congress may outnumber bjp in its manifesto in haryana elections,hooda's experience is an advantage
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