Congress: गांधी परिवार पर जब भी राजनीतिक संकट आया तब दक्षिण भारत ही बना "संकटमोचन"
Congress: गांधी परिवार पर जब भी राजनीतिक संकट आया तब दक्षिण भारत ही बना "संकटमोचन"
Congres: कांग्रेस पार्टी की भारत जोड़ो यात्रा ने कार्यकर्ताओं के अंदर नया जोश भर दिया है। तमिलनाडु के पवित्र चारधाम की नगरी रामेश्वरम से 7 सितंबर को शुरू हुई ये कांग्रेस की ये यात्रा अब कर्नाटक पहुंच चुकी है, ये यात्रा यहां 21 दिन रुकने वाली है। कर्नाटक में यात्रा पहुंचते ही सोनिया गांधी भी इसमें शामिल हो चुकी हैं। एक महीने पहले कोरोना से उबरी सोनिया गांधी इस यात्रा में ना केवल शामिल हुईं बल्कि बेटे राहुल गांधी के साथ पदयात्रा भी की। याद रहे इस साल की शुरूआत में देश के पांच अहम राज्यों में चुनाव हुए लेकिन सोनिया गांधी कहीं भी पहुंची वहीं अब वो कर्नाटक में यात्रा में शामिल होकर साबित कर दिया कि कांग्रेस और गांधी परिवार के लिए कर्नाटक राज्य कितना महत्वत्वपूर्ण है ?

याद रहे स्वर्गीय राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी का कर्नाटक से गहरा संबंध रहा है। यही नहीं जब भी गांधी परिवार पर संकट आया तो दक्षिण भारत ने ही संकटमोचन बनकर उसे संकट से बाहर निकाला है। सोनिया गांधी ही नहीं उनकी दिवंगत सास इंदिरा गांधी के अलावा बेटे राहुल गांधी के लिए भी संकट के समय दक्षिण भारत संजीवनी बूटी साबित हुआ। आइए जानते हैं कांग्रेस और गांधी परिवार का दक्षिण भारत से खास कनेक्शन क्या है।

स्वर्गीय इंदिरा गांधी का कर्नाटक की इस सीट ने बचाया था मान
इमरजेंसी के बाद स्वर्गीय इंदिरा गांधी की सरकार गिर गई थी तो उन्हें 1980 में हुए लोकसभा चुनाव में एक जिताऊ यानी कांग्रेस की सुरक्षित सीट चाहिए थी तो उन्होंने कर्नाटक के चिकमंगलूर से चुनाव लड़ा था। इसी के साथ उन्होंने यूपी की रायबरेली सीट से पर्चा भरा था और बाद में वहां से नाम वापस ले लिया था।

सोनिया गांधी को संकट के समय कर्नाटक की इस सीट ने बचाई थी प्रतिष्ठा
सास इंदिरा गांधी के नक्शेकदम पर चलते हुए सोनिया गांधी ने भी ये ही किया। बात 1999 की है जब यूपी की अमेठी सीट से लोकसभा लड़ने में हार का डर सोनिया गांधी को सता रहा था तब उन्होंने कर्नाटक की बेल्लारी सीट का सहारा लिया और वहां से नामांकन पर्चा दाखिल किया हालांकि उनके वहां से चुनाव लड़ने को छिपाया गया। 1999 के चुनाव इस चुनाव में सोनिया गांधी ने भाजपा की दिग्गज नेता सुषमा स्वराज को परास्त किया था।

राहुल गांधी ने भी केरल का लिया था सहारा
अब बात करते हैं गांधी परिवार के बेटे राहुल गांधी की। राहुल गांधी ने 2019 लोकसभा चुनाव में जब देश भर में मोदी की लहर चली तो उन्होंने उत्तर प्रदेश का कांग्रेस का गढ़ माना जाने वाले अमेठी लोकसभा सीट से हार का डर सताया तो वो सीट छोड़कर दक्षिण भारत के केरल राज्य की वायनाड सीट चुकी और जीत हासिल कर सांसद बने।

कांग्रेस के पास ये ही है आखिरी मौका
गौरतलब है कि 2023 की शुरूआत में कर्नाटक समेत अन्य कई महत्वपूर्व राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। पिछले साल और इस साल हुए राज्यों में विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी का परिणाम बहुत ही निराशाजनक रहा वहीं मध्यप्रदेश समेत अन्य राज्य भी उससे छिन गए। कर्नाटक जहां कांग्रेस प्रमुख विपक्षी पार्टी है वहां पर कांग्रेस की स्थिति को मजबूत करने के लिए भारत जोड़ो यात्रा बड़ा मौका है। इसके साथ ही ये यात्रा अन्य राज्यों में भी आगामी विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनाव 2024 से पहले अधिकांश राज्यों में हाशिए पर पहुंच चुकी कांग्रेस को उबारने का आखिरी मौका है।
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