लोकसभा चुनाव: नेहरू से लेकर राहुल तक 68 सालों में कांग्रेस को इस सीट पर नहीं दिला पाए हैं जीत
नई दिल्ली। देशभर की 543 लोकसभा सीटों के लिए चुनाव अपने आखिरी दौर में है। सभी राजनीतिक पार्टियां पूरे दमखम के साथ चुनाव प्रचार में लगी हुई हैं। लेकिन आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि देश में एक सीट ऐसी भी है जहां देश की सबसे पुरानी पार्टी कभी भी जीत हासिल नहीं कर पाई है। 1951 के बाद से देश की यह इकलौती ऐसी सीट है जहां पर कांग्रेस पार्टी अभी तक अपना खाता नहीं खोल पाई है। इन 68 सालों में कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता में रही और भारत के अधिकांश राज्यों में शासन किया।

व्यापक प्रभाव के बाद भी सीट जीत नहीं पाई कांग्रेस
कांग्रेस का सरकार के गठन पर इस तरह का एकाधिकार था कि लोकसभा चुनाव शुरू होने के बाद 1977 में पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार का गठन हुआ। यह जनता पार्टी की सरकार थी जो केवल तीन साल तक चली, इसके बाद फिर कांग्रेस सत्ता में और 10 साल तक राज की। यहां तक 90 के दशक तक भारतीय मतदाताओं पर कांग्रेस का व्यापक प्रभाव था, यही वजह रही है कि भारत के अधिकांश राज्यों में विशेष रूप से कांग्रेस का शासन था। इसके बाद भी देश की एक छोटी सी लोकसभा सीट के मतदाताओं ने कांग्रेस को वोट देना बेहतर नहीं समझा। आज हम आपको इस सीट के बारे में बताएंगे जहां कांग्रेस को आज तक जीत हासिल नहीं मिली है।

ये है वो सीट जिस पर आज तक कांग्रेस को नहीं मिली जीत
इस सीट का नाम है पोन्नानी, जिसकी गिनती केरल की एक छोटी लोकसभा सीट के रूप में होती है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक यह एक छोटा सा शहर है जो कभी मसाले के व्यापार के लिए जाना जाता था। अरब देश के साथ एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ और बाद में पुर्तगालियों ने अपने मसाला व्यापार को नियंत्रित करने के लिए इस पर कई बार हमले भी किए। अब पोन्नानी मछली पकड़ने को लेकर प्रसिद्ध है।

पोन्नानी लोकसभा सीट पर कब किसको मिली जीत, ये रहा पूरा विवरण
1951 में हुए पहले लोकसभा चुनाव के बाद से इस सीट पर कभी भी कांग्रेस को जीत हासिल नहीं हुई। 1951 के चुनाव में यह सीट किसान मजदूर प्रजा पार्टी के कब्जे में रही। इसके बाद लगातार तीन लोकसभा चुनाव 1962, 1967 और 1972 में इस सीट पर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) को जीत हासिल हुई। इसके बाद 1977 से 2014 तक, 11 बार यह सीट इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के कब्जे में रही है। ऐसा नहीं है कि कांग्रेस ने इस सीट से उम्मद्वार नहीं उतारे, उतारे थे लेकिन जीत आज तक नसीब नहीं हुई।
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