राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पीएम मोदी को नेहरु, इंदिरा और वाजपेई की ही तरह प्रभावी पीएम बताया

मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ और पीएम मोदी को कहा तेजी से सीखने वाला व्‍यक्ति। कहा पीएम मोदी का चीजों को करने का है अपना तरीका।

मुंबई। राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कई बाद कई कार्यक्रमों में एक साथ देखा जा चुका है। लेकिन राष्‍ट्रपति ने व्‍यक्तिगत तौर पर आज तक पीएम मोदी की तारीफ किसी सार्वजनिक मंच से की हो, ऐसा शायद ही देखा गया है।

लेकिन राष्‍ट्रपति को है एक अफसोस

मुंबई में शुक्रवार को ऐसा हुआ जब राष्‍ट्रपति ने खुले दिल से पीएम मोदी की तारीफ की। राष्‍ट्रपति ने पीएम मोदी को तेजी से सीखने वाला व्‍यक्ति बताया है। राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मुंबई में जिस कार्यक्रम में शिरकत की उसमें उन्‍होंने अपने रिटायरमेंट की भी बात की। साथ ही इस बात पर भी दुख जताया कि कैसे बार-बार सदन की कार्यवाही में बाधा डालना आज एक फैशन की तरह हो गया है।

पीएम का है अपना एक तरीका

पीएम का है अपना एक तरीका

उन्‍होंने कहा कि पीएम मोदी का चीजों को करने का अपना ही तरीका है। राष्‍ट्रपति ने कहा कि हमें पीएम मोदी को उनका श्रेय जरूर देना चाहिए। वह काफी तेजी से सीखने वाले व्‍यक्ति हैं। वह एक राज्‍य के मुख्‍यमंत्री थे और फिर वह देश के मुखिया बनें। उन्‍होंने काफी तेजी से नई चीजों को सीखा खासतौर पर विदेशी देशों के साथ रिश्‍तों, बाहरी अर्थव्‍यवस्‍था और आतंरिक कारकों जैसे मुद्दों पर उन्‍होंने महारत हासिल की।

राष्‍ट्रपति की पांच प्रभावी पीएम की लिस्‍ट में मोदी

राष्‍ट्रपति की पांच प्रभावी पीएम की लिस्‍ट में मोदी

राष्‍ट्रपति के अनुसार उन्‍होंने अपने लंबे राजनीतिक करियर में पांच सबसे प्रभाव प्रधानमंत्रियों को देखा और उनकी इस लिस्‍ट में पीएम मोदी का नाम भी शामिल है। राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी जिन पांच लोगों को सबसे प्रभावी प्रधानमंत्री मानते हैं उनमें पंडित जवाहर लाल नेहरु, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेई, मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी शामिल हैं।

सदन न चलने पर राष्‍ट्रपति दुखी

सदन न चलने पर राष्‍ट्रपति दुखी

अपने इस संबोधन में राष्‍ट्रपति ने संसद की कार्यवाही न हो पाने पर राजनीतिक दलों की आलोचना की। उन्‍होंने कहा कि पहली लोकसभा जो वर्ष 1952 से 1957 तक उसमें 677 बैठकें हुई थीं और 319 बिल पास हुए थे। वहीं 15वीं लोकसभ में सिर्फ 357 बैठकें हुईं और 181 बिल ही पास हो सके हैं। उनका कहना था कि बार-बार कार्यवाही में आने वाली बाधा की वजह से ऐसा हुआ है इससे उनको काफी तकलीफ हुई है।

करदाताओं के पैसे से चलता है सदन

करदाताओं के पैसे से चलता है सदन

राष्‍ट्रपति ने कहा कि पहला बजट 397 करोड़ का था और वर्तमान बजट 17 लाख करोड़ का है। ऐसे में अब इस खर्च और सदन में होने वाला चर्चा की तुलना करिए और किसी को भी इस बात का नैतिक अधिकार नहीं है कि वह करदाताओं के पैसे से चलने वाले सदन की कार्यवाही में बाधा पैदा करे।

दूसरे कार्यकाल का कोई इरादा नहीं

दूसरे कार्यकाल का कोई इरादा नहीं

राष्‍ट्रपति ने अपने संबोधन में इस बात का खुलासा भी किया कि वह अपना कार्यकाल खत्‍म होने के बाद सक्रिय राजनीति से संन्‍यास लेंगे। इसके साथ ही उन्‍होंने यह साफ कर दिया कि दूसरी बार राष्‍ट्रपति बनने का उनका कोई इरादा नहीं है।राष्‍ट्रपति का कार्यकाल अब से कुछ माह के अंदर समाप्‍त हो रहा है। उन्‍होंने कहा कि अपने रिटायरमेंट के बाद वह पश्चिम बंगाल में स्थित अपने गृहनगर में रहेंगे और जब तक हो सकेगा दुर्गा पूजा का नेतृत्‍व करेंगे।

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