Coca Cola Bottle Cap Colour: क्या है कोका-कोला के लाल-पीले कैप का रहस्य? क्या वजह धर्म है?
Coca Cola: पूरी दुनिया में केवल दो जगह कोका-कोला नहीं खरीदा जा सकता है और ये देश हैं उत्तर कोरिया और क्यूबा, जिसके पीछे कारण अमेरिकी प्रतिबंध है।

Coca Cola Bottle Cap Colour: चुभती गर्म के मौसम में दो घूंट 'कोका-कोला' कोल्डड्रिंक प्रेमियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं और यही वजह है कि शीतल पेय के मार्केट में 'कोका कोला' की अपनी एक खास हुकूमत है। इस कोल्ड ड्रिंक को लोग आज से नहीं पी रहे हैं, बल्कि इतिहास पर गौर करें तो आप पाएंगे कि इस कंपनी में उत्पादन साल 1886 में शुरू हुआ था। इसे अटलांटा के एक फार्मिस्ट जॉन पेम्बर्टन ने अपने लैब में सोडा मिलाकर बनाया था और 12 मई 1886 में पहली बार मिसीसिपी के विक्सबर्ग में सॉफ्ट ड्रिंक 'कोका-कोला' की बोटल मार्केट में उतारी गई थी।
'यलो कैप' का रहस्य
तब से लेकर आज तक 'कोका-कोला' कई प्रारूपों में सामने आ चुकी है। बच्चों से लेकर बूढों तक की पसंद बना 'कोका -कोला' की बॉटल में लाल रंग का कैप होता है। बोतल छोटी हो या बड़ी, कैप उसका लाल ही रखा जाता है लेकिन क्या कभी आपने गौर फरमाया है कि प्रतिदिन दो अरब बॉटल बेचने वाली 'कोका कोला' कंपनी एक सीजन में 'यलो कैप' के साथ मार्केट में कोका-कोला बेचती है। आपको जानकर हैरत होगी कि दरअसल इसके पीछे कारण धार्मिक है।
कॉर्न-सिरप का प्रयोग
आपको बता दें कि 'कोका-कोला' में में 'कॉर्न सिरप' का प्रयोग होता है और साल में Passover के दौरान यहूदी धर्म के लोग कॉर्न नहीं खाते हैं, Passover का मौसम बसंत के दौरान आता है, इसी वजह से कंपनी इस दौरान बिना कॉर्न वाला 'कोको-कोला' बनाती है, जिसे कि 'कोशर कोक' कहा जाता है और मार्केट में इसे वो Yellow कैप के साथ उतारती है, जिससे कि लोगों को कोई कन्फयूजन ना हो।
यहूदी धर्म के लोगों के लिए बनाया जाता है पेय
पीले ढक्कन वाली बोतल का टेस्ट लाल कैप वाली 'कोका-कोला' से अलग होता है हालांकि इसका और लाल कैप वाली बोतल के रेट में कोई अंतर नहीं होता है इसलिए आगे से अगर आपको मार्केट में पीले कैप वाली 'कोका-कोला' बॉटल नजर आए तो आप सोच लीजिए ये 'कोशर कोक' है जो कि यहूदी धर्म के लोगों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।












Click it and Unblock the Notifications