कृष्णा नदी मामले में सुनवाई से CJI एनवी रमना हुए अलग, कहा- मेरा दोनों राज्यों से है नाता

नई दिल्ली, अगस्त 02। कृष्णा नदी को लेकर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच चल रहे विवाद को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमना ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया है। अब इस मामले पर नई बेंच सुनवाई करेगी। एनवी रमना का कहना है कि वो इस केस की सुनवाई नहीं कर सकते, क्योंकि उनका नाता दोनों राज्यों से है। साथ ही उन्होंने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की सरकारों से मध्यस्थता के जरिए विवाद को सुलझाने का आग्रह किया है।

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    मध्यस्थता से निकले हल तो बेहतर है- एनवी रमना

    मध्यस्थता से निकले हल तो बेहतर है- एनवी रमना

    एनवी रमना ने एक आधिकारिक बयान में कहा है, "मैं इस मामले को कानूनी रूप से नहीं सुनना चाहता, क्योंकि मेरे संबंद्ध दोनों राज्यों से हैं। अगर मामला मध्यस्थता से सुलझाया जा सकता है, तो ये बहुत अच्छा रहेगा। हम इसमें मदद कर सकते हैं। अन्यथा मैं इस केस को दूसरी बेंच को ट्रांसफर कर दूंगा।"

    कैसे सुप्रीम कोर्ट पहुंचा विवाद

    कैसे सुप्रीम कोर्ट पहुंचा विवाद

    - आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में ये मामला आंध्र प्रदेश की तरफ से पहुंचा है। आंध्र प्रदेश ने तेलंगाना के खिलाफ एक याचिका दाखिल की है, जिसमें कहा गया है कि तेलंगाना पीने और सिंचाई के लिए पानी में उनके वैध हिस्से को मुहैया नहीं करा रहा है।

    याचिका में कहा गया है कि तेलंगाना की श्रीशैलम बांध परियोजना के कारण पानी की मात्रा गंभीर रूप से कम हो गई है। याचिका में मांग की गई है कि तेलंगाना से आंध्र को मिलने वाला उसके हिस्से का पानी उसे मुहैया कराया जाए।

    - आंध्र प्रदेश ने तेलंगाना पर आरोप लगाया है कि वह अपनी बिजली की जरूरतों के लिए कृष्णा नदी से से अंधाधुंध पानी खींच रहा है, जो कि 2015 में हुए समझौते के खिलाफ है। आपको बता दें कि इस समझौते से एक साल पहले ही तेलंगाना को नया राज्य बनाया गया था।

    बुधवार को होगी मामले की अगली सुनवाई

    बुधवार को होगी मामले की अगली सुनवाई

    इस मामले पर सुनवाई को लेकर अब एनवी रमना तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि ये एक राजनीतिक मुद्दा भी है, मैं चाहता हूं कि दोनों राज्य सरकारें आपस में ही इसका समाधान निकाल लें और मामला सुलझ जाए, हम गैर जरूरी हस्तक्षेप नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है तो मुझे मजबूरन इस मामले को दूसरी बेंच के सामने भेजना होगा। आपको बता दें कि अब इस मामले में अगली सुनवाई बुधवार को होगी।


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