जिला न्यायपालिका कानून का स्तंभ और न्यायपालिका की रीढ़ है: चीफ जस्टिस चंद्रचूड़
Chief Justice of India (CJI) D Y Chandrachud: भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़ ने शनिवार (31 अगस्त) को जिला न्यायपालिका को "न्यायपालिका की रीढ़" कहा है। उन्होंने कहा है कि यह कानून के शासन का एक महत्वपूर्ण घटक है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा यहां आयोजित 'जिला न्यायपालिका के राष्ट्रीय सम्मेलन' में बोलते हुए सीजेआई ने कहा,''जिला न्यायपालिका को अधीनस्थ कहना बंद करना होगा। आजादी के 75 साल बाद, अब समय आ गया है कि हम ब्रिटिश काल के एक और अवशेष अधीनता की औपनिवेशिक मानसिकता को दफना दें।''

न्याय की तलाश सबसे पहले लोग जिला न्यायपालिका के पास जाते हैं: सीजेआई
सीजेआई ने कहा, ''न्याय की तलाश कर रहा कोई नागरिक सबसे पहले जिला न्यायपालिका के पास जाता है। इसलिए ये कानून का अहम घटक है।''
उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि न्याय के वितरण की गुणवत्ता और परिस्थितियां न्यायिक प्रणाली में जनता के विश्वास को बनाती है। उन्होंने कहा, "इसलिए जिला न्यायपालिका को अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निभाने के लिए कहा जाता है क्योंकि ये न्यायपालिका की रीढ़ की हड्डी है। रीढ़ तंत्रिका तंत्र का अहम अंग है।''
महिलाओं की भागीदारी पर क्या बोले सीजेआई?
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने न्यायपालिका के जनसांख्यिकी में बदलावों को भी संबोधित किया। हाल के वर्षों में जिला न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती संख्या को उन्होंने अच्छा बताया है। राजस्थान में 2023 में सिविल न्यायाधीशों के लिए कुल भर्ती में महिलाओं का हिस्सा 58 प्रतिशत था। दिल्ली में 2023 में नियुक्त न्यायिक अधिकारियों में 66 प्रतिशत महिलाएं थीं।
उत्तर प्रदेश में 2022 में सिविल न्यायाधीश जूनियर डिवीजन के लिए 54 प्रतिशत नियुक्तियां महिलाओं की थीं। केरल में न्यायिक अधिकारियों में महिलाओं का हिस्सा 72 प्रतिशत है। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि ये "ये उदाहरण भविष्य की एक आशाजनक न्यायपालिका की तस्वीर पेश करते हैं।












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