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14 फरवरी से पंजाब में होंगे निकाय चुनाव, किसान विरोध प्रदर्शन के बीच भाजपा को सता रहा हार का डर

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नई दिल्ली। पंजाब निकाय चुनाव में अब केवल सात दिन का समय शेष है और जालंधर से बीजेपी नेता रमेश शर्मा कृषि कानूनों पर किसान विरोध प्रदर्शन की वजह से इस बार चुनावों को लेकर असमंजस में हैं। साल 2015 में तत्कालीन सत्तारूढ़ अकाली-दल और बीजेपी के गठबंधन ने निकाय चुनावों में शानदार जीत हासिल की थी और भाजपा ने अकाली-दल से ज्यादा सीटें प्राप्त की थीं। लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल अलग है। हाल यह है कि भाजपा निकाय चुनाव में दो-तिहाई सीटों के लिए उम्मीदवार तक नहीं ढूंढ पाई है और न ही बाकी सीटों पर प्रचार के लिए उसे उम्मीदवार मिल रहे हैं।

farmer protest
    Punjab Civic Polls: Kisan Andolan के कारण BJP को नहीं मिल रहे Candidate | वनइंडिया हिंदी

    दिल्ली बॉर्डर पर किसानों के विरोध के अलावा पंजाब के 30 से ज्यादा भाजपा नेताओं के घर के बाहर किसान पक्का धरना दे रहे हैं। पिछले लगभग चार महीने से चाहे रात हो या दिन किसान घर के बाहर ही जमे हुए हैं। उनके हाथों में 'काले कृषि कानूनों को वापस लो' के बैनर हैं और वे पूछते हैं कि किसानों को आतंकवादी क्यों समझा जा रहा है और वे सभी से 'आओ सारे दिल्ली चलिए' का आह्ववान करते हैं। रमेश शर्मा कहते हैं कि इस बार भाजपा के नेता चुनाव प्रचार करने से डर रहे हैं, प्रदर्शनकारियों के स्थान के आस-पास जाने से भी डर लग रहा है। डर के कारण कई नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है।

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    वे कहते हैं अकेले 20 लोगों ने जनवरी में पार्टी छोड़ी। वे कहते हैं कि राज्य की पार्टी की कोर कमेटी में एकमात्र सिख चेहरा मलविंदर सिंह कांग ने भी पार्टी छोड़ दी। भाजपा के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी के कई नेताओं ने अपनी गाड़ियों से बीजेपी का झंडा हटा दिया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में 26 जनवरी की हिंसा को उजागर करने के लिए पंजाब भर में तिरंगा यात्रा की योजना जिससे कुछ ही समय में सरकार को किसान नेताओं को बैकफुट पर खड़ा करने की उम्मीद दी थी, वह भी टूट गया है।

    जालंधर के पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष और जिला संगरूर में सुनाम चुनाव के प्रभारी शर्मा कहते हैं, "प्रदर्शनकारियों की जैसे ही हम पर नजर पड़ती है वे हमें घेर लेते हैं।" वे कहते हैं कि 14 फरवरी को आठ नगर निगमों की 2,303 सीटों पर होने वाले निकाय चुनाव और 109 नगर पंचायतों/नगर निगमों में होने वाले चुनावों में नए कृषि कानूनों को लेकर भाजपा के खिलाफ गुस्से का पहला प्रतिबिंब देखने को मिलेगा।

    शर्मा ने कहा कि लंबे समय से पंजाब में उनकी सहयोगी अकाली दल कानून को लेकर भाजपा से अलग होकर विरोध को बंद करने के लिए तैयार नहीं है। प्रदर्शनकारी किसान विरोध प्रदर्शन के बीच चुनाव कराने की जल्दी की वजह से

    सत्तारूढ़ कांग्रेस से भी नाराज हैं। रमेश शर्मा ने कहा कि कुल मिलाकर इन परिस्थितियों में इस बार का निकाय चुनाव भाजपा के लिए काफी चुनौती भरा साबित होने वाला है।

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    English summary
    civic polls to be held in Punjab from February 14, fear atmosphere in BJP amid farmer protests
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