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नागरिकता संसोधन विधेयक: जानिए क्या हैं वो अनुच्‍छेद, जिसके दम पर विपक्ष कर रहा हंगामा

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बेंगलुरु। नागरिकता संशोधन विधेयक को सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा में आसानी से पास करवा लिया। लोकसभा में बीजेपी के पास खुद अकेले दम पर बहुमत है। इस विधेयक पर वोटिंग के दौरान बीजेपी के 303 लोकसभा सदस्यों समेत कुल 311 सासंदों का समर्थन हासिल हुआ। अब राज्यसभा में इस विधेयक को रखा जाना है। जहां से पास होने की स्थिति में ही यह कानून की शक्ल लेगा।

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बीजेपी ने 10 और 11 दिसंबर को अपनी पार्टी के राज्यसभा सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है। राज्यसभा में सत्ताधारी एनडीए के पास बहुमत नहीं है। मगर जिस तरह से अल्पमत में होने के बावजूद सरकार ने तीन तलाक और अनुच्छेद 370 को हटाने वाले विधेयक को पास करवा लिया था माना जा रहा है ठीक उसी तरह वह इसे भी पास करवा ही लेगी।

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पहले बता दें नागरिकता संशोधन बिल इस विधेयक में तीन पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक प्रताड़ना के शिकार हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और इसाई धर्म के लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है। सोमवार को आधी रात तक चली लोक सभा में इस विधेयक के विरोध में 80 तो पक्ष में 311 वोट पड़े। जिसके बाद बुधवार को यह बिल राज्यसभा में पेश किया जाएगा।

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मोदी सरकार ने पिछले कार्यकाल में भी इसे मंजूरी दिलाने की कोशिश की थी और इस बार ये मोदी सरकार का दूसरा प्रयास है। यह बिल बीजेपी के चुनावी वादों में से एक रहा है । इतना ही नहीं केंद्र की मोदी सरकार की इसके पीछे एक दूरगामी सोच भी है। राष्‍ट्रीय स्‍तर पर भाजपा की सबसे बड़ी विरोधी पार्टी कांग्रेस है और वह नागरिकता संशोधन बिल का पुरजोर विरोध कर रही है। कांग्रेस ने बुधवार को इस बिल के विरोध में देशव्‍च्‍यापी प्रदर्शन करने का भी ऐलान किया हैं।

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गौरतलब है कि नागरिकता संसोधन बिल राज्यसभा में पहुंचने से पहले लोकसभा में विपक्षी पार्टियों ने जमकर शोर-शराबा किया। इस शोर शराबे के दौरान बार बार अर्टिकल 14, अर्टिकल 21 और आर्टिकल 25 का जिक्र आया। विपक्ष के नेताओं ने इन अर्टिकल का हवाला बार बार दिया और इसी आधार पर इस बिल को असंवैधानिक बताया। वहीं गृहमंत्री अमित शाह ने बिल के खिलाफ बोल रहे 48 सांसदों पर पलटवार करते हुए कहा कि यह विधेयक किसी भी तरह से उक्त संसोधनों का उलंघन बिल्कुल नही हैं। ऐसे में यह यह सवाल उठता है कि आखिर अनुच्‍छेद 14, अनुच्‍छेद 21 और अनुच्‍छेद 25 क्या हैं। आइए जानते ....

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आर्टिकल-14

भारतीय संविधान में अनुच्‍छेद 14 में समानता का अधिकार का वर्णन हैं। जिसके तहत समानता के अधिकार की जो परिभाषा दी गयी है उसमें लिखा है राज्य, भारत के किसी व्यक्ति को कानून के समक्ष समता से या कानून के समान संरक्षण से वंचित करेगा। इसका तात्पर्य है कि सरकार देश में किसी भी व्‍यक्ति के साथ भेदभाव नहीं करेगा। भारतीय संविधान के भाग-3 समता का अधिकार में अनुच्छेद-14 के साथ ही अनुच्छेद-15 जुड़ा है। इसमें कहा गया है, 'राज्य किसी नागरिक के खिलाफ सिर्फ धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर कोई भेद नहीं करेगा। इसी को आधार बना कर विपक्ष केन्‍द सरकार को इस बिल को लेकर घेर रहा है उसका आरोप है कि नागरिकता संशोधन बिल में एक खास धर्म के लोगों के साथ भेदभाव किया जा रहा है, जो अनुच्छेद-14 का उल्लंघन है। वहीं केन्‍द्र सरकार इस बात से इंकार कर रही है।

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आर्टिकल-21

भारतीय संविधान में अर्टिकल 21 के तहत सुरक्षा व आजादी का अधिकार का वर्णन हैं। जिसमें लिखा है कि कानून द्वारा तय प्रक्रिया को छोड़कर किसी भी व्यक्ति को जीने के अधिकार या आजादी के अधिकार से वंचित नहीं रखा जाएगा। यह भारत के नागरिक के मूलभूत अधिकारों में से एक है।

आर्टिकल-25

भारतीय संविधान के अर्टिकल 25 में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का वर्णन है जो देश के नागरिकों को धार्मिक स्‍वतंत्रता का अधिकार देता है। इसके तहत प्रत्येक नागरिक को धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का समान अधिकार होगा।

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English summary
Know what is The Article 14, Due to Which the Opposition is Creating a Ruckus
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