मोदी ने दी जिनपिंग को चीन को सीमा पर स्थिति स्पष्ट करने की हिदायत
नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच हैदराबाद हाउस में मुलाकात खत्म हो गई है। दोनों की ओर से जो साझा बयान जारी किया गया उसमें वीजा नीति से लेकर कई और अहम पहलूओं का भी जिक्र हुआ लेकिन खासबात रही कि एलएसी को लेकर दोनों देशों के बीच दुविधा नजर आई है।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा के अपने दूसरे दिन पर दिल्ली पहुंच गए। उनकी भारत यात्रा का आज दूसरा दिन है। चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग को राष्ट्रपति भवन में सेना की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
वार्ता के बाद देशों के बीच हुए समझौते
- भारत और चीन के बीच कुल 12 समझौते हुए
- भारत में टेलीकॉम मीडियम में निवेश
- रेलवे पर दो एमओयू पर चीन ने किए साइन।
- अंतरिक्ष के क्षेत्र में अनुसंधान
- रेडियाे, फिल्म एंड टेलीविजन क्षेत्र
- चीन के शंघाई और मुंबई के बीच समझौता
- दो इंडस्ट्रीयल पार्क बनाने पर रजामंदी
क्या कहा मोदी ने
- खुशी है कि राष्ट्रपति जिनपिंग भारत आए।
- चीन से अनुरोध कि भारतीय कंपनियों को चीन में मार्केट उपलब्ध कराया जाए।
- सीमा पर शांति होगी तभी दोनों देशों को विकास संभव।
- जिनपिंग के साथ सभी तरह की बातचीत का मौका मिला।
- भारत में दो चाइनीज इंडस्ट्रीयल पार्क बनाने पर समझौता।
- पांच वर्ष तक भारत में 20 बिलियन डॉलर का निवेश चीन की ओर से।
- एक दूसरे की चिंताओं, संवेदनशीलताओं, दोनों देशों के बीच शांति और स्थायीत्व के मुद्दे को जिनपिंग के सामने रखा गया।
- चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नाथुला के नए रास्ते को मंजूरी दी।
- सीमा पर पिछले कुछ दिनों से पेश आई घटनाओं पर चिंता
- चीन की सीमा पर पिछले कुछ दिनों से जारी तनाव से जिनपिंग को अवगत कराया गया।
- सीमा विवाद को जल्द से जल्द हल करना चाहिए।
- एलएसी की स्थिति को साफ करने के लिए चीन से कहा गया।
- भारत का चीन को सुझाव सीमा पर शांति और स्थिरता के लिए के लिए जो वैरीफिकेशन प्रॉसेस चलती थी, उसे फिर से शुरू किया जाए।
- चीन की वीजा पॉलिसी और ट्रांस रिवर प्रोजेक्ट पर अपनी चिंताओं से भारत ने चीन को अवगत कराया।
क्या कहा जिनपिंग ने
- चीन की ओर से भारत को शुक्रिया
- राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का शुक्रिया अदा किया।
- आतंकवाद पर मिलकर काम करेंगे।
- चीन और भारत दोनों बहुत ही अहम देश।
- चीन और भारत एक जैसे विकास लक्ष्य को ही हासिल करने का सपना रखते हैं।
- प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत को नई ऊंचाईयां मिलेंगी।
- प्रधानमंत्री मोदी को वर्ष 2015 में दिया चीन आने का आधिकारिक आमंत्रण।
- दोनों देशों के बीच रणनीतिक मुलाकात जारी रहनी चाहिए।
- भारत ने काफी तेज गति से विकास गति को हासिल किया।
- चीन खुश है कि भारत ने जो सपना अपने लिए देखा था, वह उसे हासिल कर सका है।
- दोनों देशों को शातिं, स्थिरता, आपसी साझेदारी और विकास के लिए मिलकर काम करना होगा।
- सबसे ज्यादा जरूरी भारत और चीन सभी स्तरों पर आदान-प्रदान करते रहें।
- गुजरात और महाराष्ट्र में दो इंडस्ट्रीयल पार्कों के लिए चीन रजामंद।
- चेन्नई और मैसूर के बीच हाई स्पीड ट्रेन चलाने का वादा
- आर्थिक कॉरीडोर पर बातचीत।
- भारत और चीन दोनों ही पक्ष संवेदनशील मुद्दों पद बात करने को राजी।
- चीन और भारत की सीमा पर शांति सबसे अहम मुद्दा।
- बीसीआईएम कॉरिडोर बनाने पर राजी।
- भारत चीन सीमा विवाद का समाधान जरूरी।
- सीमा पर स्थिति साफ करने से पहले सीमा का सम्मान जरूरी।
- सीमा पर रेखांकन काफी जरूरी नहीं तो होती रहेंगी लद्दाख जैसी घटनाएं।
- चीन और भारत दोनों ही एक-दूसरे के लिए काफी जरूरी प़ड़ोसी।
- जल्द से जल्द सीमा विवाद को दूर करने के लिए चीन प्रतिबद्ध।
- भारत के साथ सांस्कृतिक संबंध मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध।
जहां एक तरफ जिनपिंग, मोदी के साथ बातचीत में बिजी थे, तो वहीं चीन की प्रथम महिला यानी जिनपिंग की पत्नी पेंग ल्यूआन ने दिल्ली स्थित टैगोर इंटरनेशनल स्कूल का दौरा किया। ल्यूआन ने यहां पर बच्चों के साथ मुलाकात की तो कैलीग्राफी में भी अपने हाथ अाजमाए।
उन्होंने कहा कि बुधवार को अहमदाबाद में भारत पहले ही इस मुद्दे को उठा चुका है। गौरतलब है कि गुरुवार को लद्दाख क्षेत्र में करीब 1,000 चीनी सैनिक भारतीय सीमा में दाखिल हो गए हैं।
राष्ट्रपति भवन से निकलकर जिनपिंग राजघाट गए जहां पर उन्होंने महात्मा गांधी की समाधि पर फूल चढ़ाए।
जिनपिंग ने इस दौरान कहा कि वह पहली बार बतौर राष्ट्रपति पहली बार भारत आए हैं। उनका लक्ष्य सिर्फ तीन अहम बातों पर रहेगा।
चीनी अधिकारियों के मुताबिक, चीन भारत में 6 लाख करोड़ रुपए के निवेश का ऐलान कर सकता है। हैदराबाद हाउस में सुबह 11 बजे होने वाली मुलाकात के दौरान भारत और चीन के बीच कारोबारी समझौते पर चर्चा होगी।
इस बीच हैदराबाद हाउस में नरेंद्र मोदी और जिनपिंग की मुलाकात का विरोध करने वाले प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया है। इस बात से तिब्बतियों के धर्म गुरु दलाई लामा काफी निराश दिखे। उन्होंने कहा कि तिब्बत की समस्या का समाधान कभी भी बलपूर्वक नहीं हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी तरह के मसले का हल सिर्फ बातचीत से ही निकाला जा सकता है। चीन और भारत के बीच मौजूदा संबंध आपसी सहमति और विश्वास पर बने हैं। यह काफी जरूरी है।












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