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हिटलर के नक्शे कदम पर चल रहे हैं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, देखिए सबूत

नई दिल्ली- 20वीं सदी में जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर के चलते दुनिया को दूसरे विश्वयुद्ध में झोंक दिया गया। नाजी पार्टी के नेता एडोल्फ हिटलर की मौत के करीब एक दशक बाद जर्मनी से हजारों किलोमीटर दूर चीन में एक शख्स का जन्म हुआ, जो 21वीं सदी में दुनिया को तीसरे विश्वयुद्ध में झोंकने की ठान चुका है। ये कोई और नहीं चीन के नए तानाशाह शी जिनपिंग हैं। अगर हम करीब 8 दशक पहले के हिटलर के रवैए और उसके चलते विश्व पर मंडराए खतरे की तुलना आज की परिस्थितियों से करें तो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का बर्ताव हूबहू हिटलर से मेल खाता है। सीधे शब्दों में कहें तो वह हिटलर के ही नक्शे कदम पर चल रहे हैं, जिसके चलते दुनिया पर तीसरे विश्वयुद्ध के खतरे महसूस किए जा रहे हैं। आइए शी जिनपिंग की कारगुजारियों और हिटलर की तानाशाही में किस कदर समानता नजर आ रही है, उसे तथ्यों पर सबूतों के साथ देखते हैं।

हिटलर के नक्शे कदम पर चल रहे हैं शी जिनपिंग

हिटलर के नक्शे कदम पर चल रहे हैं शी जिनपिंग

20वीं सदी में नाजी जर्मनी के शासक एडोल्फ हिटलर ने खुद में सारे अधिकार समाहित कर लिए, जिसका परिणाम दुनिया ने दूसरे विश्वयुद्ध के रूप में देखा था। इसी तरह आज की तारीख में चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी के नेता राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुद को अपनी पार्टी और चीन की सत्ता का सर्वेसर्वा बना लिया है, जिनकी विस्तारवादी नीति के चलते विश्व शांति फिर से खतरे में पड़ चुकी है। 1929-32 में आर्थिक मंदी, बेरोजगारी,गरीबी और भूखमरी से जनता को उबारने के वादे के साथ जर्मनी में सोशलिस्ट नारों के साथ एडोल्फ हिटलर नाम के नेता का उदय हुआ था। जिसने जर्मनी की खोयी हुई प्रतिष्ठा को भी बहाल करने का वादा किया। 2007-09 में वैश्विक मंदी और बेरोजगारी के दौरान चीन में अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी में साफ छवि वाले नेता शी जिनपिंग की पैदाइश हुई, जिन्होंने चीन को उसका वाजिब सम्मान दिलाने की ठानकर नीतियां तैयार करनी शुरू कर दी। 1933-34 में हिटलर ने अपने राजनीतिक विरोधियों का वजूद मिटा दिया, चुनौती देने वाले नेताओं की हत्याएं करवा दी और विरोधियों को कारागार में डाल दिया। 2014-17 में शी जिनपिंग ने हिटलर की नीति अपनाते हुए चीन में अपने राजनीतिक विरोधियों को जेल में डाल दिया, उनका वजूद मिटाना शुरू कर दिया। उनपर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर उन्हें बंदी बना लिया।

सत्ता के सभी अंगों पर एकाधिकार

सत्ता के सभी अंगों पर एकाधिकार

इसी तरह 1933-34 में एडोल्फ हिटलर ने जर्मनी की सत्ता के सभी अंगों पर अपना एकाधिकार कर लिया, जिसमें जर्मनी की सेना भी शामिल थी। 2014-19 के बीच जिनपिंग ने भी हिटलर के मार्ग को ही अपनाया और शासन के सभी अंगों का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया। उन्होंने आर्मी और आर्म्ड पुलिस के कमांडरों को किनारे करके खुद को पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी का कमांडर-इन चीफ घोषित कर दिया। 1934-35 में एडोल्फ हिटलर ने जर्मनी के सारे राजनीतिक अधिकार अपने हाथों में ले लिया, जिसमें वहां के राष्ट्रपति की शक्तियां भी शामिल थीं। इसी तरह से 2014 से 18 के दौरान शी जिनपिंग ने चाइनीज सत्ता के सभी बड़े दफ्तरों, अपनी पार्टी और सुरक्षा बलों को पूरी तरह से अपने कंट्रोल में ले लिया।

दोनों ने अपनी 'जय' करवाना शुरू किया

दोनों ने अपनी 'जय' करवाना शुरू किया

1933-35 के दौरान एडोल्फ हिटलर ने खुद को फ्यूरर (नेता) कहना शुरू कर दिया और जर्मनी के शासन के सभी अंगों को हिदायत दे दी कि अब वे उन्हीं के नाम का शपथ लेना शुरू कर दें और सिर्फ उन्हीं के प्रति सारी निष्ठा दिखाएं। Hail Hitler (हिटलर की जय) अभिवादन का आधिकारिक तरीका बना गया। 2016-18 में शी जिनपिंग ने खुद को सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी का 'कोर' घोषित कर दिया,पार्टी के सभी कैडरों,नेताओं और अंगों से कहा गया कि वह पार्टी के प्रति निष्ठा बनाए रखें, जिसके वो कोर हैं। वहां के संविधान में जिनपिंग के विचारों को तरजीह दी गई। जर्मनी में मीडिया का नियंत्रण भी हिटलर ने अपने हाथों में ले लिया था, विरोध के सुर दबा दिए गए थे। इसी तरह चीन में भी राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर मीडिया और साइबर को नियंत्रित करने के लिए नए कानून बनाए गए।

जंग की मकसद से सेना को शक्तिशाली बनाने का खेल

जंग की मकसद से सेना को शक्तिशाली बनाने का खेल

1933 के बाद हिटलर ने सेना को हथियारों से लैस करना शुरू कर दिया, युद्ध की तैयारियां शुरू कर दीं। चोरी-छिपे नेवी और एयरफोर्स का निर्माण करना शुरू कर दिया। सिर्फ 6 ही वर्षों में जर्मनी का एयरफोर्स बहुत ही शक्तिशाली बन गया। 2013 के बाद से शी जिनपिंग सेना की ताकत बढ़ाने की कोशिशों में लगातार जुटे हुए हैं। पीएलए की ताकत को बेहतरीन करने के लिए सारी शक्तियां झोंक दी हैं। 2030 तक चीन की नौसेना अमेरिका से ज्यादा ताकतवर बन जाएगी। 1935 में हिटलर के निर्देश पर नाजी जर्मनी की सेना Saarlang और Rhineland की ओर कूच कर गई, जहां से पहले हिटलर ने अपनी सेना की मौजूदगी कम करने का वादा किया था। 2015 में शी जिनपिंग ने Spratlys आइलैंड को चीन का हिस्सा बताते हुए पीएलए का जमावड़ा बढ़ाना शुरू कर दिया, जबकि एक समय अमेरिकी राष्ट्रपति की मौजूदगी में जिनपिंग ने सार्वजनिक रूप से वादा किया था कि ऐसा नहीं होगा। 2020 में शी जिनपिंग ने हॉन्गकॉन्ग के लिए एक नया सुरक्षा कानून पास करवाया, जो कि चीन और ब्रिटेन के समझौते के तहत बने मूल कानून का उल्लंघन है।

दूसरे देशों के इलाकों पर दावा जताने का खेल

दूसरे देशों के इलाकों पर दावा जताने का खेल

1938 में हिटलर ने आस्ट्रिया को नाजी जर्मनी में विलय की प्रक्रिया शुरू कर दी, इस दावे के साथ कि वहां जर्मन भाषा बोली जाती है। 2019 में शी जिनपिंग ने चाइनीज भाषा बोले जाने के दावे के साथ ताइवान को चीन में विलय की कोशिशें शुरू कर दी, इस धमकी के साथ कि वह इसके लिए सेना का भी इस्तेाल करेगा, जो कि 1949 से चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी का हिस्सा कभी नहीं रहा। 1938-39 के दौरान हिटलर ने स्वतंत्र देशों पर इस दलील के साथ दावा करना शुरू कर दिया कि वहां की आबादी जर्मन मूल की है। उसने इन्हें परंपरागत जर्मनी का भू-भाग बताना शुरू कर दिया। उस समय भी जर्मनी के विस्तारवाद का विरोध हुआ। उसी तरह 2019-20 के बीच शी जिनपिंग ने संप्रभुत्व मुल्कों के भू-भागों पर दावा ठोंकना शुरू कर दिया। भारत के अरुणाचल प्रदेश और भूटान के इलाकों पर इस आधार पर दावा शुरू कर दिया कि वहां कि आबादी या तो तिब्बती मूल की है या चाइनीज मूल की यानि यह परंपरागत तौर पर चीन का हिस्सा हुआ। यही तरीका चीन ने साउथ चाइना सी में भी अपना रखा है।

चोरी और सीनाजोरी के सबूत देखिए

1 सितंबर,1939 को हिटलर की सेना ने पोलैंड पर हमला कर दिया, जिसके चलते दूसरे विश्वयुद्ध की शुरुआत हुई। उसने उलटे पोलैंड पर आरोप लगाया कि उसकी सेना जर्मनी के इलाके में घुस आई थी और एक जर्मन रेडियो स्टेशन तबाह कर दिया। 5 मई, 2020 को शी जिनपिंग ने झूठ की बुनियाद पर पीएलए को पूर्वी लद्दाख के भारतीय इलाके में घुसपैठ कराया, इस झूठे दावे के साथ कि भारतीय सेना गलवान वैली, पैंगोंग लेक और दूसरे क्षेत्रों में चीन के इलाके में घुसी और चीन के पोस्ट को तबाह किया। स्टार न्यूज ग्लोबल के पोर्टल पर आई इस एनालिटिकल रिपोर्ट पर जैसे चीन को सांप सूंघ गया है। चीन के दूतावास ने सामरिक महत्त्व के इस आलोचनात्मक वीडियो को हटाने की धमकी भी दी, नहीं तो गंभीर परिणाम की चेतावनी भी दी, लेकिन वीडियो अभी यू ट्यूब पर उपलब्ध है और उसे 80 हजार से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं और चार हजार से ज्यादा लाइक्स भी।

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