भारत के T-90 के सामने नहीं टिक पाएंगे चीनी टैंक, ये है T-90 भीष्म की खासियत

नई दिल्ली। भारतीय टैंक कमांडरों को दावा है कि भारत और चीन के बीच अगर दुनिया के सबसे ऊंचे टैंकों की लड़ाई के मैदान में जंग होती है तो भारत के T-90 भीष्म टैंक के सामने चीनी सेना के हल्के टैंक मैदान में टिक नहीं पाएंगे। पिछले पांच महीने से पूर्वी लद्दाख (Ladakh) और तिब्बत के पठारी क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने जमी हुई हैं।

भारत ने तैनात किए हैं लद्दाख में टैंक

भारत ने तैनात किए हैं लद्दाख में टैंक

भारत ने पूर्वी लद्दाख में चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी को जवाब देने के लिए पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में एलएसी पर बड़ी संख्या में टैंक तैनात किए हैं। T-90 टैंक को भारत ने रूस से 2001 में खरीदा था। लंबे समय से भारत LAC पर सुरक्षा के मद्देनजर अपनी T-90 टैंकों की क्षमता को बढ़ाने में लगा हुआ था।

गलवान घाटी में जून में हुए भारत-चीन सीमा पर हुए संघर्ष के बाद दोनों देशों में तनाव बढ़ गया था। तब से ही दोनों देशों की सेनाएं एलएसी पर बनी हुई हैं। तनाव के बीच पीएलए ने अपने टैंक और बख्तरबंद वाहनों को कई जगहों पर तैनात किया है। कई जगहों पर ये टैंक आमने-सामने तैनात हैं।

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    भारतीय टैंक के सामने बेकार साबित होंगे चीनी टैंक

    भारतीय टैंक के सामने बेकार साबित होंगे चीनी टैंक

    एलएसी पर तैनात भारतीय सेना के टैंक कमांडर ने नाम न छापने की शर्त पर एएनआई को बताया कि "अगर आज के हालात में जंग होती है और चीनी अपने हल्के टैंक मैदान में उतारते हैं तो मैं विश्वास दिलाता हूं चीनी टैंक भारत के T-90 और T-72 के सामने टिक नहीं पाएंगे।" भारतीय टैंक कमांडर का ये बयान ऐसे समय में आया है जब हाल की रिपोर्टों में ये सामने आया था कि चीन ने पूर्वी लद्दाख में अपने इलाके में लाइट वेट T-15 टैंक तैनात किए हैं। इनमें उत्तरी उप सेक्ट से लेकर दक्षिणी-पूर्वी क्षेत्र के साथ ही चुमार-डेमचोक क्षेत्र शामिल हैं। चीनी मीडिया में ये दावा किया गया था कि लद्दाख की ऊंची पहाड़ी घाटियों में लड़ाई के दौरान हल्के टैंक अधिक उपयुक्त होंगे।

    एक दूसरे टैंक कमांडर ने बताया कि भारतीय टी-90 भीष्म और टी-72 BMP-2 कॉम्बैट वाहन के साथ 50 डिग्री से लेकर -40 डिग्री तापमान के बीच काम करने में सक्षम है। ये दुनिया में सभी संभावित ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात हैं।

    लद्दाख की कड़ाके की ठंड का नहीं होगा असर

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    वहीं ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में टैंक के प्रदर्शन पर कमांडर ने बताया कि रूस में बने टी-90 अत्यधिक ठंड में भी ऑपरेशन को अंजाम देने में सक्षम हैं। जो कि इस क्षेत्र की भी जरूरत है। इन्हें एलएसी के साथ ही डेपसांग और डीबीओ सेक्टर में भी तैनात किया गया है। इनकी स्पैंगुर गैप एरिया के साथ ही पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे और चुमार-डमेचोक सेक्टर में तैनाती की गई है।

    सूत्रों के मुताबिक भारतीय सेना का मुकाबला करने के लिए पीएलए ने भारी संख्या में चीनी टैंक और पैदल सेना के लड़ाकू वाहन टी-99 एस और पीटीजेड को तैनात किया है। साथ ही अप्रैल-मई में लंबी दूरी की तोपें और जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की तैनाती भी की थी।

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