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चाइनीज पटाखे क्यों हैं खतरनाक, क्या है भारत में बैन की वजह?

आम तौर पर चाइनीज पटाखे बेहद सस्ते होने के साथ-साथ काफी रौशनी देते हैं। जिसकी वजह से लोग इन्हें पसंद करते हैं। बावजूद इसके आपको बता दें कि ये बेहद खतरनाक हैं।

नई दिल्ली। देशभर में लोग दिवाली की तैयारियों में जुटे हुए हैं। ऐसे में पटाखों की खरीद नहीं की जाए ये तो हो ही नहीं सकता। अगर आप पटाखों की खरीद की योजना बना रहे हैं और आपकी नजर चाइनीज पटाखों पर है तो सावधान हो जाइये। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार ने इस पर बैन लगा रखा है।

chinese crackers

बैन हैं चाइनीज पटाखे, इनसे बचकर रहें

आम तौर पर चाइनीज पटाखे बेहद सस्ते होने के साथ-साथ काफी रौशनी देते हैं। जिसकी वजह से लोग इन्हें पसंद करते हैं। इस सबके बावजूद आपको बता दें कि ये हमारे लिए बेहद खतरनाक हैं।

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक कई चाइनीज पटाखों में अस्थिर केमिकल पोटैशियम क्लोरेट का इस्तेमाल होता है। जिसकी वजह से भारत में इसे बैन किया गया है। ऐसे पटाखे मिलने पर उसे जब्त किया जा रहा है।

इसके अलावा चाइनीज पटाखों के खिलाफ आंदोलन भी चलाया जा रहा है। जिसमें चीनी वस्तुओं के साथ-साथ चीनी पटाखों को भी खरीदने से रोका जा रहा है। सोशल मीडिया में ऐसी वस्तुओं के विरोध को लेकर संदेश तेजी से भेजे जा रहे हैं।

क्या वजह है जो भारत में चीनी पटाखों पर रोक है?

क्या वजह है जो भारत में चीनी पटाखों पर रोक है?

भारत में चीनी पटाखों पर रोक क्यों लगाई गई है इसकी वजह है इसमें इस्तेमाल होने वाला रसायन पोटैशियम क्लोरेट। कहने को तो चीनी पटाखे बेहद सस्ते होते हैं लेकिन इसमें इस्तेमाल होने वाले पोटैशियम क्लोरेट से तेज धमाका होता है। ये बेहद ज्वलनशील और अस्थिर रसायन है। इनके अलावा चीनी पटाखों में खतरनाक रसायन का भी इस्तेमाल होता है। जिससे त्वचा संबंधी बीमारी और एलर्जी होने की संभावना रहती है।

भारतीय पटाखों में पोटैशियम और सोडियम नाइट्रेट का इस्तेमाल होता है। जो आम तौर पर काफी सुरक्षित हैं। यही वजह है कि चीनी पटाखे भारतीय पटाखों से ज्यादा खतरनाक होते हैं क्योंकि इसमें पोटैशियम क्लोरेट या परक्लोरेट का इस्तेमाल होता है, जो तेजी से जलने में सक्षम हैं। इसीलिए इन्हें भारत में बैन किया गया है।

आखिर पटाखों में इस्तेमाल होने वाले इस रसायन से समस्या क्या है?

आखिर पटाखों में इस्तेमाल होने वाले इस रसायन से समस्या क्या है?

भारत में पोटैशियम क्लोरेट का पटाखों में इस्तेमाल 1992 से ही बंद है। केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक इस केमिकल का इस्तेमाल बहुत कम मात्रा में और खास स्थिति में करने की अनुमति दी गई है। इसका इस्तेमाल वैज्ञानिक वजहों, मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में कोहरे के दौरान रेलवे सिग्नल को लेकर इसका इस्तेमाल किया जाता है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सितंबर 2014 में कहा कि भारत में विदेशी मूल के पटाखों की बिक्री अवैध है और कानून के तहत दंडनीय अपराध है... कई पटाखा संगठनों ने इस बात की शिकायत की है कि 'पोटैशियम क्लोरेट' के इस्तेमाल वाले पटाखे स्मगल के जरिए यहां लाए जाते हैं। चीनी पटाखों को लेकर पहली बार 2013 में विरोध के सुर बुलंद हुए थे। बता दें कि चीन दुनिया का सबसे ज्यादा पटाखा बनाने वाला देश है।

चाइनीज पटाखे इतने लोकप्रिय क्यों हैं?

चाइनीज पटाखे इतने लोकप्रिय क्यों हैं?

चीनी पटाखों के सस्ते होने की वजह पोटैशियम क्लोरेट है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये पोटैशियम और सोडियम नाइट्रेट से एक तिहाई कम कीमत का होता है। ये जलकर ऑक्सीजन उत्पन्न करता है। इससे ज्यादा आग पैदा होती है और इसके इस्तेमाल से तापमान बढ़ जाता है। यही वजह है कि चाइनीज पटाखे सस्ते होने के साथ-साथ रौशनी ज्यादा होती है।

खरीदारों को इसीलिए इन पटाखों को खरीदने में फायदा नजर आता है। कई चाइनीज पटाखा कंपनियां अपने पटाखों में इस्तेमाल होने वाले रसायन की जानकारी भी मुहैया नहीं कराती हैं। साथ ही इसकी ध्वनि क्षमता का भी जिक्र नहीं होता, जो कि विस्फोटक नियम, 2008 के तहत बेहद जरूरी है।

इन पटाखों से शरीर और पर्यावरण में क्या प्रभाव होगा?

इन पटाखों से शरीर और पर्यावरण में क्या प्रभाव होगा?

स्मगल करके लाए गए चाइनीज पटाखों में सल्फर और पोटैशियम क्लोरेट के इस्तेमाल की वजह से पर्यावरण को काफी नुकसान होता है। इसके इस्तेमाल से प्रदूषण स्तर कई गुना बढ़ जाता है। पटाखों में सल्फर की वजह से आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी की शिकायत हो सकती है।

पोटैशियम क्लोरेट की वजह से त्वचा की बीमारी और सांस लेने की समस्या होने की संभावना ज्यादा होती है। यही वजह कि पटाखों को बेचने वाली कंपनियों को अपने प्रोडक्ट पर इसमें इस्तेमाल होने वाले तत्वों, रसायनों का जिक्र करना होता है।

भारतीय पटाखे क्या वाकई में कम प्रदूषण करते हैं?

भारतीय पटाखे क्या वाकई में कम प्रदूषण करते हैं?

ऐसा अकसर नहीं होता है। स्वंतत्र संस्थाओं द्वारा की गई जांच में पता चला है कि भारत के भी कुछ पटाखा निर्माता कंपनियां बैन केमिकल का इस्तेमाल कर रहे हैं। अप्रैल में कोल्लम मंदिर में आग की जांच कर रहे अनुसंधानकर्ताओं ने बताया था कि आग कि वो घटना इसलिए हुई थी क्योंकि वहां इस्तेमाल हुए पटाखों में पोटैशियम क्लोरेट का इस्तेमाल हुआ था।

आखिर स्मगल के जरिए हर साल चीन के बने पटाखे भारत लाए जाते हैं इसका कोई साफ आंकड़ा नहीं है, लेकिन कुछ रिपोर्ट से कहा जा सकता है कि हर साल 1500 करोड़ के पटाखे भारत में स्मगल करके लाए जाते हैं। इस महीने की शुरुआत में ही तुगलकाबाद डिपो से नौ करोड़ के पटाखे पकड़े गए हैं।

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