चीन के साथ युद्ध के 44 वर्ष पूरे और लद्दाख में चीनी सेना

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लद्दाख। भारत और चीन की सेनाएं इन दिनों लद्दाख में एक ज्‍वाइंट वॉर एक्‍सरसाइज में बिजी है। दोनों देशों के बीच यह युद्धाभ्‍यास उस समय शुरू हुआ है जब भारत और चीन की लड़ाई को 44 वर्ष पूरे हो चुके हैं।

आपको बता दें कि 20 अक्‍टूबर 1962 को भारत और चीन के बीच युद्ध छिड़ा था जो करीब एक माह चलकर 21 नवंबर को खत्‍म हुआ था।

इस युद्धाभ्‍यास के कई मायने हैं जिनमें सबसे अहम है चीन के साथ रिश्‍तों को नई तरह से तराशने की कोशिश करना। चीन और भारत की सेनाओं के बीच युद्धाभ्‍यास नई बात नहीं हैं और वर्ष 2007 से ही इस तरह की एक्‍सरसाइज होती आ रही है।

इस बार यह जिस जगह पर हुई है, उसकी वजह से यह काफी खास हो जाती है। लद्दाख में इस एक्‍सरसाइज को अंजाम दिया गया। वही लद्दाख जहां अक्‍सर चीन सेना की ओर से घुसपैठ की खबरें आती रहती हैं। आइए आपको बताते हैं कि लद्दाख में इस युद्धाभ्‍यास के दोनों देशों के रिश्‍तों के लिए क्‍या मायने हैं।

लद्दाख में ही हुई थी जंग

लद्दाख में ही हुई थी जंग

62 की जंग लद्दाख में ही लड़ी गई थी। 21 नवंबर को जब चीन ने युद्धविराम का ऐलान किया तब जाकर कहीं युद्ध थम सका था। वर्ष 2013 में भी लद्दाख के दौलत ओल्‍डी बेग में चीन की ओर से घुसपैठ की घटना को अंजाम दिया गया था। लद्दाख में इस तरह के युद्धाभ्‍यास के जरिए भारत कहीं न कहीं चीन को यह संदेश देना चाहता है कि इस जगह पर सिर्फ उसका अधिकार है।

 क्षेत्र में शांति कायम करना

क्षेत्र में शांति कायम करना

भारत और चीन के बीच लद्दाख में अक्‍सर तनाव कायम रहता है।इस क्षेत्र में शांति बनाए रखना और बॉर्डर के आसपास के इलाकों में सौहार्द स्‍थापित रखने के मकसद भारत अक्‍सर इस युद्धाभ्‍यास को आगे बढ़ाना चाहता है। विशेषज्ञों की मानें तो भारत फिलहाल चीन के साथ टकराव के मूड में नहीं है।

सेनाओं के बीच भरोसा बढ़ाने की कोशिश

सेनाओं के बीच भरोसा बढ़ाने की कोशिश

फरवरी में भारत और चीन के बीच 'हाथ से हाथ' नामक एक ज्‍वाइंट मिलिट्री एक्‍सरसाइज हुई थी। इंडियन आर्मी के मुताबिक वह एक्‍सरसाइज काफी सफल थी और उससे उत्‍साहित होकर ही फिर से इस एक्‍सरसाइज को कराया जा रहा है। सेना की मानें तो इस तरह की एक्‍सरसाइज से न सिर्फ सहयोग की भावना बढ़ती है बल्कि इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच भरोसा भी बढ़ता है।

नए सिरे से रिश्‍तों की शुरुआत करना

नए सिरे से रिश्‍तों की शुरुआत करना

भारत और चीन के युद्धाभ्‍यास से पहले ब्रिक्‍स सम्‍मेलन में चीन ने भारत की एनएसजी एंट्री का विरोध किया जो जैश-ए-मोहम्‍मद और लश्‍कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों का नाम लेने से भी परहेज दिखाया। भारत फिलहाल नहीं चाहता है कि अतंराष्‍ट्रीय समुदाय को यह संदेश दिया जाए कि ब्रिक्‍स के बाद दोनों देशों के बीच तनातनी बढ़ी है। ऐसे में इस एक्‍सरसाइज काफी हद तक भारत के लिए एक कामयाबी बन सकती है।

क्‍या अरुणाचल में एक्‍सरसाइज करेगा चीन

क्‍या अरुणाचल में एक्‍सरसाइज करेगा चीन

चीन लद्दाख में इसलिए युद्धाभ्‍यास के लिए राजी हुआ क्‍योंकि उसने कभी इस हिस्‍से पर अपना दावा नहीं जताया है। चीन अक्‍सर अक्‍साई चिन पर अपना हक जताता आया है और भारत उसे अपना हिस्‍सा बताता है। सवाल यह है कि क्‍या चीन, अरुणाचल प्रदेश में इस युद्धाभ्‍यास को करने के लिए हामी भरेगा। अगर चीन ऐसा करता है तो भारत और चीन के बीच सीमा विवाद में एक नया मोड़ आ सकता है।

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English summary
Indo-China joint military exercise in Ladakh and Kashmir on the anniversary of China war.
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