चीन के वीगर मुसलमानों ने क्या आपकी जींस के लिए अपना पसीना बहाया है?

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि शिनजियांग के वीगर मुसलमानों को डरा-धमकाकर, जबरन काम कराया जाता है.

चीन में कपास की खेती
Getty Images
चीन में कपास की खेती

चीन के शिनजियांग प्रांत में तैयार होने वाले सूती कपड़े को दुनिया की सबसे बेहतरीन कपड़ों में शुमार किया जाता है. हालांकि मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली एजेंसियों और लोगों का कहना है कि इस कपड़े को तैयार करने वाले मजदूरों से जबर्दस्ती काम लिया जाता है. यहां तक कि पश्चिमी देशों के कुछ ब्रैंड्स ने अपने सप्लाई चेन से शिनजियांग कॉटन को हटा दिया है. यानी अब कुछ पश्चिमी ब्रैंड्स चीन के शिनजियांग में तैयार किए जाने वाले सूती कपड़े का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं. इंटरनेट और सोशल मीडिया पर ये बड़ी बहस का मुद्दा रहा है और चीन की मशहूर हस्तियां और आम लोग इन पाबंदियों पर एतराज जताते रहे हैं.


शिनजियांग कॉटन को लेकर क्या चिंताएं हैं?

जींस
Getty Images
जींस

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि शिनजियांग के वीगर मुसलमानों को डरा धमकाकर और उनसे जबरन काम कराया जाता है. बीबीसी को मिले सबूतों से ये पता चलता है कि तकरीबन पांच लाख वीगर मुसलमानों को कपास के खेतों में कड़ी सुरक्षा निगरानी के बीच उन पर दबाव डालकर काम कराया जाता है. वीगर क्षेत्र में जबरन काम कराने की इस व्यवस्था के ख़िलाफ़ काम कर रहा रहा समूह 'कोएलिशन टू इंड फोर्स्ड लेबर इन द वीगर रीजन' दरअसल कई संगठनों का एक साझा मंच है. इसके सदस्यों में एंटी स्लेवरी इंटरनेशनल और वर्ल्ड वीगर कांग्रेस जैसे संगठन शामिल हैं.

'कोएलिशन टू इंड फोर्स्ड लेबर इन द वीगर रीजन' का कहना है, "फिलहाल ये बात हम पक्के तौर पर कह सकते हैं कि वीगर क्षेत्र से कपड़ा, कपास या सूत खरीदने वाले ब्रैंड्स मानवाधिकारों के उल्लंघन से मुनाफा कमा रहे हैं और इसमें जबरन कराया गया श्रम भी शामिल हैं. ऐसा वीगर क्षेत्र के अलावा तकरीबन पूरे चीन में हो रहा है."

वीगर मुसलमान: चीन कर रहा है जनसंहार, ब्रिटेन की रिपोर्ट का दावा

जो बाइडन ने चेताया- अमेरिका नहीं संभला तो चीन से पिछड़ जाएगा


शिनजियांग कॉटन का इस्तेमाल कौन करता है?

किसी एक कंपनी या देश का नाम लेना मुश्किल हो सकता है क्योंकि शिनजियांग में जितने कॉटन का उत्पादन होता है, उसका बड़ा हिस्सा कॉटन के वैश्विक सप्लाई चेन में शामिल हो जाता है. आप इसे यूं भी समझ सकते हैं कि चीन में जितने कपास का उत्पादन होता है, उसका 85 फीसदी शिनजियांग से आता है और ग्लोबल सप्लाई में शिनजियांग कॉटन की हिस्सेदारी 20 फीसदी के करीब है. इस बात की संभावना काफी रहती है कि आपके वार्डरोब में भी चायनीज़ कॉटन से बना कोई कपड़ा हो. इसे देखने के दो नज़रिये हो सकते हैं और इस बात से फर्क पड़ता है कि सड़क के किस सिरे पर खड़े हैं. जैसे रिटेलर को केवल सप्लाई चेन के पहले प्वॉयंट का पता होता है. मान लीजिए कि उसने एक वेंडर को कमीज़ बनाने का ऑर्डर दिया है. वेंडर ने कमीज़ के लिए कपड़ा किसी मिल से खरीदा, मिल ने कपड़े के लिए सूत किसी और मिल से खरीदा हो और सूत बनाने वाले मिल ने कपास जिस एजेंट से लिया हो उसने इसकी खरीदारी कई खेतों और किसानों से की हो.

इसलिए कपड़े के लिए कॉटन कहां से आया, ये पता करना तकरीबन नामुमकिन हो जाता है क्योंकि ये कई ठिकानों से गुजरकर आप तक पहुंचता है. दुनिया भर में सैकड़ों, हज़ारों की संख्या में कपास के खेत हैं और तकरीबन उतनी ही संख्या में गार्मेंट फैक्ट्रियां हैं. इन सब के बीच कपड़ा तैयार करने वाले मिल हैं जहां कॉटन में दूसरे धागे मिलाकर कपड़े तैयार किए जाते हैं. कॉटन मिलों के लिए सर्टिफिकेट जारी करने की 'यार्न एथिकली एंड सस्टेनेबली सोर्स्ड' (येस) जैसी भी व्यवस्थाएं हैं जिसका मक़सद जबरन मजदूरी कराने के सिस्टम को ख़त्म करना है.

लेकिन इससे आपको सीमित मदद ही मिल पाती है क्योंकि बतौर उपभोक्ता आप रिटेलर की वेबसाइट पर महज एक जोड़ी जींस ऑर्डर कर रहे होते हैं. कपड़ा उद्योग के लिए कच्चे माल के स्रोत को मॉनीटर करने वाली संस्था 'कॉमन ऑब्जेक्टिव' की क्लेयर लीज़ामैन सलाह देती हैं, "अगर आप अपनी जींस के कपड़े के स्रोत के बारे में आश्वस्त होना चाहते हैं तो आपको सॉयल एसोसिएशन का सर्टिफिकेट देखना चाहिए."

वो वीगर औरतें जिनके साथ सिर्फ़ रेप नहीं होता, ख़ौफ़नाक यातनाएं भी दी जाती हैं

चीन ने ट्रंप के विदेश मंत्री रहे माइक पोम्पियो पर लगाया प्रतिबंध


सांकेतिक तस्वीर
Getty Images
सांकेतिक तस्वीर

चीन का क्या कहना है?

शिनजियांग में जबरन मजदूरी कराने के आरोपों से चीन इनकार करता है. वो वीगर मुसलमानों को डिटेंशन कैंपों में रखने की बात को भी खारिज करता है. उसका कहना है कि ये कैंप दरअसल शिक्षा केंद्र हैं जिनका इस्तेमाल आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में किया जा रहा है. शिनजियांग कॉटन के ख़िलाफ़ उभरते विरोध के जवाब में बहुत से चीनी लोग भी मुखर हुए हैं. उन्होंने पश्चिमी ब्रैंड 'नाइके' और 'एचएंडएम' के बहिष्कार की अपील भी की है.

इन कंपनियों ने वीगर मुसलमानों से जबरन मजदूरी कराये जाने को लेकर चिंता जाहिर की थी. कुछ चीनी ईकॉमर्स वेबसाइटों ने 'एचएंडएम' को अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया था. बरबरी की ब्रैंड एंबैसडर झोउ डोंग्यू कंपनी से अलग हो गईं. इतना ही नहीं 48 घंटों में चीन के 27 सिलेब्रिटीज़ ने एडिडास, कैल्विन क्लीन और नाइके से अपने संबंध ख़त्म कर लिए.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+