चीन फिर कर रहा है 1962 जैसी हरकतें, लद्दाख से सटे तिब्बत में बन रही है सड़क
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच टकराव को अब चार माह होने वाले हैं। ये टकराव कहां और कैसे खत्म अब कोई नहीं जानता है। इस बीच चीन के तेवरों में भी नरमी के कोई संकेत नहीं हैं। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में कुछ सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए दावा किया गया है कि चीन, लद्दाख को जोड़ने वाली एक नई सड़क का निर्माण कर रहा है। ये सड़क लद्दाख से सटे बॉर्डर एरियाज में है। यहां पर इस सड़क के होने से पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों को एक-जगह से दूसरी जगह तक जाने में सुविधा हो सकेगी। जो बात सबसे खास है वह है कि चीन ने उसी तरह की स्थितियां सड़क निर्माण से पैदा कर दी हैं, जो साल 1962 में युद्ध की वजह बन गई थीं।

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पूर्वी लद्दाख के हिस्से में है नई सड़क
सैटेलाइट तस्वीरों से साफ है कि सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिला है कि पीएलए पूर्वी लद्दाख के उत्तर-पूर्व में नई सड़क तैयार कर रहा है। इसमें ल्हासा से काशगर तक नेशनल हाइवे 219 यानी जी219 का पिछला हिस्सा भी शामिल है। पूर्वी लद्दाख के क्षेत्रों से गुजरने वाली इन सड़क का निर्माण सन् 1950 के दशक के मध्य में शुरू किया गया था जो 1957 तक पूरा हुआ। सड़क का निर्माण भारत और चीन के बीच तनाव की शुरुआत थी जो अंततः सन् 1962 के युद्ध की वजह बना था। युद्ध के बाद चीन ने नई सड़क जी219 के जरिए पश्चिम के क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था। जी219 चीनी युद्ध स्मारक इस बात की याद दिलाता है कि कैसे भारतीय सेना इस क्षेत्र में बहुत ही बहादुरी से लड़ी। उसके बाद से ही दोनों देशों की तरफ से लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के करीब सड़क निर्माण और बुनियादी ढांचे को शक के साथ एक-दूसरे की नजर में देखा जाता है। भारत का सड़क निर्माण भी लद्दाख में मौजूदा तनाव का एक कारण माना जाता है।
क्या सोच कर चीन बना रहा सड़क
जो नई सड़क बनाई जा रही है उसको लेकर पीएलए को लगता है कि पहाड़ी इलाकों में सड़क के पिछले हिस्से की काफी अहमियत है। पीएलए का मानना है कि प्राकृतिक घटनाओं जैसे कि भूस्खलन, अचानक बमबारी और गोलाबारी जैसे खतरों में इसका प्रयोग किया जा सकता है। चीन ने होतान और कांग्सीवा के बीच पहली सड़क का निर्माण कार्य पूरा कर लिया है, जिसे अब G580 प्रांतीय राजमार्ग नाम दिया गया है। जो नई सड़क बनाई गई है वो औसतन 10 मीटर चौड़ी और 190 किमी लंबी है। केवल एक ही जगह है जहां सड़क 5200 मीटर की ऊंचाई पर पहाड़ के पार जाती है। इस मार्ग पर सैनिकों के रहने और ड्यूटी के लिए पीएलए ने कई स्थानों को तैयार किया है। इस नई सड़क से मार्ग होटन और पूर्वी लद्दाख के प्रवेश बिंदु हाजी लंगर के बीच की दूरी को लगभग 400 किमी कम हो जाती है।












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