राज्यों को बाल अधिकार आयोग ने लिखा पत्र, मदरसों की फंडिंग रोकने की सिफारिश
NCPCR Write Stop Funding Madrasa: राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने राज्य द्वारा दिए जाने वाले वित्त पोषण को बंद करने और पूरे भारत में मदरसा बोर्डों को बंद करने की वकालत की है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और प्रशासकों को संबोधित एक पत्र में एनसीपीसीआर ने मदरसों में बच्चों के शैक्षिक अधिकारों पर चिंता जताई है।
आयोग ने यह पत्र बच्चों के संवैधानिक अधिकार बनाम मदरसा रिपोर्ट के आधार पर लिखा है। एनसीपीसीआर द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में 11 अध्याय हैं, जिसमें मदरसों का इतिहास और बच्चों के शैक्षिक अधिकारों उल्लंघन में मदरसों की भूमिका का जिक्र किया गया है। इस बाबत NCPCR के प्रमुख प्रियांक कानूनगो ने मीडिया से बातचीत की।

उन्होंने कहा कि आयोग ने 9 साल तक इस मुद्दे का अध्ययन करने के बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट जारी की है। हमने पाया है कि करीब 1.25 करोड़ बच्चे अपनी बुनियादी शिक्षा के अधिकार से वंचित हैं। उन्हें इस तरह से पढ़ाया जा रहा है कि वे कुछ खास लोगों के इरादों के मुताबिक काम करें, यह गलत है।
जिन लोगों ने इन मदरसों पर कब्जा किया है, वे वही लोग हैं जो कहते थे कि वे भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय पूरे भारत में इस्लाम का प्रचार करना चाहते थे। 7-8 राज्यों में मदरसा बोर्ड हैं और हमने मदरसा बोर्ड को बंद करने के लिए कहा है क्योंकि वे इसी उद्देश्य से दाखिल हुए थे...मदरसों के लिए दान जुटाया जा रहा है।
इस फंडिंग को रोका जाना चाहिए और मदरसा बोर्ड को भंग किया जाना चाहिए और इन मदरसों में पढ़ने वाले हिंदू बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिया जाना चाहिए। बता दें, प्रियांक कानूनगो ने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों/प्रशासकों को पत्र लिखा है। इस पत्र में मदरसा का वित्त पोषण बंद बात कही है।
जानिए क्या लिखा है पत्र में?
पत्र में लिखा है कि यह सिफारिश की गई है कि सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मदरसों और मदरसा बोर्डों को राज्य द्वारा दिया जाने वाला वित्त पोषण बंद कर दिया जाए और मदरसा बोर्डों को बंद कर दिया जाए। यह भी सिफारिश की गई है कि सभी गैर-मुस्लिम बच्चों को मदरसों से निकालकर आरटीई अधिनियम, 2009 के अनुसार बुनियादी शिक्षा प्राप्त करने के लिए स्कूलों में भर्ती कराया जाए।
साथ ही, मुस्लिम समुदाय के बच्चे जो मदरसा में पढ़ रहे हैं, चाहे वे मान्यता प्राप्त हों या गैर-मान्यता प्राप्त, उन्हें औपचारिक स्कूलों में दाखिला दिलाया जाए और आरटीई अधिनियम, 2009 के अनुसार निर्धारित समय और पाठ्यक्रम की शिक्षा दी जाए।" इतना ही नहीं, आयोग ने लिखा कि इसलिए इस पत्र के जरिए सभी राज्य सरकारों को सिफारिश की गई है।
उन्होंने कहा कि मदरसों और मदरसा बोर्डों को दिया जाने वाला वित्त बंद कर देना चाहिए। इतना ही नहीं मदरसा बोर्डों को भी बंद कर देना चाहिए। आयोग ने कहा कि यह सिफारिश सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के तौर पर की जा रही है। आयोग ने कहा कि मदरसा में पढ़ने वाले सभी गैर-मुस्लिम बच्चों को मदरसों से निकालकर आरटीई अधिनियम 2009 के अनुसार बुनियादी शिक्षा प्राप्त करने के लिए स्कूलों में भर्ती कराया जाए।
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