'एक देश-एक चुनाव के लिए हम तैयार', मुख्य चुनाव आयुक्त ने दिया बड़ा बयान
नई दिल्ली। ईवीएम को लेकर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के आरोपों पर मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने जवाब दिया है। सुशील चंद्रा ने कहा कि यहां ईवीएम से छेड़छाड़ का कोई सवाल ही नहीं है। भारतीय निर्वाचन आयोग ने हमेशा पारदर्शिता बनाए रखा है। न्यूज एजेंस एएनआई से बातचीत करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने बताया कि वाराणसी के एडीएम को इसलिए निलंबित कर दिया गया क्योंकि उन्होंने ईवीएम को ले जाते वक्त राजनीतिक दलों को इस बात की सूचना नहीं दी थी, जो एक प्रक्रिया होती है।

इसके अलावा सुशील चंद्रा ने कहा कि ईवीएम से छेड़छाड़ का तो सवाल ही पैदा नहीं होता है। ईवीएम का साल 2004 से लगातार इस्तेमाल हो रहा है। साल 2019 तक हमने प्रत्येक बूथ पर वोटर-वैरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रायल ( VVPAT ) का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। उन्हें देखने के बाद ईवीएम को राजनीतिक दलों के पोलिंग एजेंट के सामने सील किया जाता है और उनसे हस्ताक्षर लिये जाते हैं।
इसके अलावा उन्होंने बताया कि ईवीएम को त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरे में स्ट्रांग रूम में रखा जाता है। वहां सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाती है। स्ट्रांग रूप पर राजनीतिक दलों के एजेंटों की नजर रहती है तो ईवीएम से किसी भी तरह की छेड़छाड़ का तो सवाल ही नहीं उठता है और ना ही कोई ईवीएम स्ट्रांग रूम से बाहर ले जा सकता है।
मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने कहा कि वाराणसी में जिस ईवीएम पर सवाल उठाए गए हैं। वह प्रशिक्षण के लिए थी। एडीएम की गलती यह थी कि उन्होंने प्रशिक्षण के लिए ईवीएम ले जाने की जानकारी राजनीतिक दलों को नहीं दी, जो कि एक प्रक्रिया है। जब राजनीतिक दल के लोग सवाल उठाए तो हमने उन्हें नंबर दिखा दिये तब स्पष्ट हो गया कि ये ईवीएम से चुनाव नहीं कराए गए हैं।
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इसके अलावा मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने कहा कि एक राष्ट्र एक चुनाव एक अच्छा सुझाव है लेकिन इसके लिए संविधान में बदलाव की जरूरत है। चुनाव आयोग पूरी तरह से तैयार है और एक साथ सभी चुनाव कराने में सक्षम है। हम 5 साल में सिर्फ एक बार चुनाव कराने के लिए तैयार हैं।












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