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राफेल डील को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर CAG ने लगाई मुहर, चिदंबरम ने पूछा- क्या गड़बड़ियों का पिटारा खुला?

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नई दिल्‍ली। राफेल लड़ाकू विमान को लेकर फ्रांस की एविएशन कंपनी दसॉ एविएशन से हुई डील को लेकर नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (CAG) ने रक्षा मंत्रालय की आलोचना की है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के द्वारा 23 सितंबर को संसद में पेश हुई रिपोर्ट में सौदे की कई कमियों को उजागर किया गया है। कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि लड़ाकू विमान बनाने वाली फ्रांस की कंपनी दसॉ एविएशन और यूरोप की मिसाइल निर्माता कंपनी एमबीडीए ने 36 राफेल जेट की खरीद से संबंधित सौदे के हिस्से के रूप में भारत को उच्च प्रौद्योगिकी की पेशकश के अपने ऑफसेट दायित्वों को अभी तक पूरा नहीं किया है।

राफेल डील को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर CAG ने लगाई मुहर, चिदंबरम ने पूछा- क्या गड़बड़ियों का पिटारा खुला?

CAG की इस रिपोर्ट बाद से राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने एक बार फिर से 36 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए हुए 58,000 करोड़ की राफेल डील के मुद्दे पर मोदी सरकार से सवाल पूछने शुरू कर दिए हैं। इसपर कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने गुरुवार को इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमला बोलते हुए कई ट्वीट किए। उन्होंने लिखा, 'CAG को पता चला है कि राफेल एयरक्राफ्ट के वेंडर्स ने अभी तक ऑफसेट समझौते के तहत टेक्निकल सहायता देने की शर्त को पूरा नहीं किया है।'

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    उन्होंने लिखा कि 'ऑफसेट दायित्व 23 सितंबर, 2019 को शुरू हो जाने चाहिए थे और उन्हें 23 सितंबर 2020 को खत्म हो जाना चाहिए था, जो कल था. क्या सरकार ये कहेगी कि ये दायित्व पूरे किए गए हैं? क्या कैग की रिपोर्ट गड़बड़ियों का पिटारा खोल रही है?' गौरतलब है कि 2019 लोकसभा चुनाव में राफेल विवाद का मुद्दा भी छाया रहा। तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 'चौकीदार चोर है' का नारा बुलंद कर राफेल का महंगा सौदा करने समेत ऑफसेट में धांधली का आरोप लगाया था।

    संसद में बुधवार को पेश कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत बड़े पैमाने पर विदेशों से हथियारों की खरीद करता है। रक्षा खरीद नीति के तहत 30 फीसदी ऑफसेट प्रावधान लागू किए गए हैं। इसके तहत विदेशी कंपनी को 30 फीसदी रकम भारत में निवेश करनी होती है। इसके साथ ही घरेलू स्तर पर तकनीक की मदद से संबंधित क्षेत्र में विकास करना होता है। राफेल के सौदे की ऑफसेट नीति के तहत दसॉल्ट एविएशन ने सौदे में ऑफसेट वादे पर डीआरडीओ को उच्च तकनीक देने का प्रस्ताव देने को कहा था।

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    English summary
    Chidambaram on Rafale makers failing offset obligations: The opening of a can of worms?
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