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छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक जीत में भी इस सीट पर हुई कांग्रेस की ऐतिहासिक हार, जोगी की पत्नी बनीं वजह

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में 15 साल बाद कांग्रेस को जश्न मनाने का मौका मिला है। पार्टी यहां बहुमत के साथ सरकार बनाएगी लेकिन उसकी इस जीत के पीछे टीम जोगी का भी हाथ है। पहली बार बीएसपी और सीपीआई के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन करके अजीत जोगी की पार्टी ने चुनावों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। हालांकि, उनके किंगमेकर बनने का सपना कांग्रेस की लहर के साथ बह गया लेकिन उनका पूरा कुनबा जीत हासिल करने में सफल रहा। लहर के बावजूद भी कांग्रेस को एक ऐसी सीट पर हार का सामने करना पड़ा जो आजादी से लेकर अबतक उसी की झोली में थी। यह सीट छीना अजीत जोगी की पत्‍नी रेणु जोगी ने। रेणु जोगी ने कांग्रेस प्रत्याशी विभोर सिंह को 5200 मतों से करारी शिकस्त दी है।

रेणु जोगी ने रोका कांग्रेस का विजय रथ

रेणु जोगी ने रोका कांग्रेस का विजय रथ

इस सीट से भाजपा के नए चेहरे काशी साहू और कांग्रेस के विभोर सिंह थे। कोटा विधानसभा से शुरूआत से ही कांग्रेस का गढ़ रहा है। लेकिन 2018 के चुनाव परिणाम में तीसरी नंबर पर रहा। इस सीट में रेणु जोगी को भाजपा के काशी राम साहू ने कड़ी टक्कर दी। लेकिन रुझानों के बाद रेणु जोगी विजयी हुई। रेणु जोगी लगातार जीत हासिल करती हुई आ रही है। रेणु जोगी की जीत से कांग्रेस का विजय रथ रूक गया।

5200 मतों से कांग्रेस के विभोर सिंह को रेणु जोगी ने हराया

5200 मतों से कांग्रेस के विभोर सिंह को रेणु जोगी ने हराया

अजीत जोगी को उनकी पारंपरिक सीट मारवाही से 46,000 वोटों से जीत मिली जबकि उनकी पत्नी ने कोटा सीट से 5200 के अंतर से जीत दर्ज की। रेणु जोगी को 48880 वोट मिले हैं जबकि भाजपा के काशी राम साहू को 45774 वोट मिले। हालांकि जोगी की बहू रिचा जोगी जो बीएसपी के टिकट से चुनाव लड़ रही थीं उन्हें अकलतारा से हार मिली और बीजेपी के उम्मीदवार सौरभ सिंह ने इस सीट से जीत दर्ज की। सीपीआई का राज्य में खाता तक नहीं खुला। हालांकि नक्सली प्रभावित कोंटा निर्वाचन क्षेत्र में सीपीआई के मनीष कुंजम ने कांग्रेस नेता कवासी लकमा को कड़ी टक्कर दी।

आजादी के बाद से इस सीट पर अबतक नहीं हारी थी कांग्रेस

आजादी के बाद से इस सीट पर अबतक नहीं हारी थी कांग्रेस

1952 से लेकर अब तक कोटा विधानसभा सीट पर 14 बार चुनाव हुए हैं। काशीराम तिवारी पहले विधायक बने थे। जबकि मथुरा प्रसाद दुबे 4 बार, राजेंद्र शुक्ल 5 बार चुने गए। इसके अलावा 2006 में डॉ. रेणु जोगी बनीं। पहली महिला विधायक भी रेणु जोगी थी। वे पिछले 3 बार से विधायक हैं। इस जीत के साथ रेणु जोगी ने लगातार चार बार चुनाव जीतने का रिकार्ड अपने नाम कर लिया। छत्तीसगढ़ में तीसरी शक्ति बनकर चुनाव लड़ रहे अजीत जोगी की जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने चुनाव भारी मतों से जीतने का दावां किया था। जोगी परिवार ने इस दावों को सच करने में कुछ हद तक सफल हुए हैं।

पार्टी चलाना बड़ी चुनौती है

पार्टी चलाना बड़ी चुनौती है

जोगी परिवार के लिए अपनी पार्टी को चलाना बड़ी चुनौती है। चुनाव के पहले आर्थिक संकट को दूर करने के लिए कई तरह की कवायद की। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तरह लोगों से चंदा लेकर डिप्लोमेसी डिनर पार्टी का आयोजन किया। ऑनलाइन आर्थिक मदद मांगी। इस कारण जोगी परिवार के लिए करिश्माई प्रदर्शन करना या सरकार का हिस्सा बनना बहुत ही जरूरी है, ताकि पार्टी को ऑक्सीजन मिलता रहे।

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English summary
Chhattisgarh Assembly Elections 2018: Ajit Jogi's wife Renu Jogi wins from Kota, Congress holding this seat last 66 years.
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