Chandrayaan 3 Launching: चांद पर लैंडिंग क्यों है खतरनाक, जानिए 4 सबसे बड़े खतरे
Chandrayaan-3 Mission: आज भारत के अंतरिक्ष के क्षेत्र में ऐतिहासिक दिन है क्योंकि आज चंद्रयान-3 की सफलतापूर्वक लॉन्चिंग हो गई है। इस मिशन को सफलतापूर्वक चांद पर पहुंचाने के लिए हमारे वैज्ञानिकों ने काफी मेहनत की है। आम लोगों में भी इसे लेकर जबरदस्त उत्साह है। इस मिशन के सामने कई चुनौतियां भी हैं जिसे पार करना थोड़ा कठिन होगा लेकिन हमारे वैज्ञानिकों के आत्मविश्वास को देखकर ऐसा लग रहा है कि इस बार चंद्रयान-3 मिशन में कामयाबी मिल जाएगी। चलिए अब जानते हैं चांद पर चंद्रयान-3 की लैंडिंग खतरनाक क्यों है? जानिए कौन से 4 चुनौतियो को करना होगा पार?
चांद पर लैंडिंग खतरनाक क्यों? ये हैं 4 कारण
दरअसल, चांद पर वायुमंडल नहीं होने के कारण लैंडिंग खतरनाक साबित होती है। क्योंकि ऐसे में लैंडर के टूटने की संभावनाएं बढ़ होती हैं। इसके अलावा चांद पर GPS काम नहीं करता है जिससे लैंडर को सही जगह तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती होती है। इसके अलावा चांद के दक्षिणी पोल पर साफ नहीं दिखना भी वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी चुनौती होता है। लैंडर को सूर्य के विकिरण के असर से कोई सुरक्षा नहीं मिलती है. इसीलिए ये भी मिशन के लिए काफी खतरनाक होता है।

चंद्रयान-3 मिशन है क्या? (What is Chandrayaan-3 Mission)
इसरो के अधिकारियों के अनुसार चंद्रयान-3 मिशन, चंद्रयान-2 का ही अगला चरण है। चंद्रयान-3 मिशन का मुख्य लक्ष्य इसे चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक लैंड करवाना है। यह आकार में चंद्रयान-2 की तरह ही दिखेगा, जिसमें एक लैंडर और एक रोवर होगा। हालांकि इस बार पिछली गलती से सीखते हुए मिशन की सफलता के लिए नए उपकरण बनाए गए हैं। एल्गोरिदम को बेहतर किया गया है। चंद्रयान-2 मिशन में जो गलती हुई थी उसे दुरुस्त किया गया है।
मिशन मून का लक्ष्य क्या है?
इसरो के वैज्ञानिकों का पहला मकसद इसे चंद्रयान-3 को सफलतापूर्वक चांद पर लैंड करवाना है। इसमें सबसे पहला मकसद लैंडर की सुरक्षित और सॉफ्ट लैंडिंग होगा। इसके बाद रोवर को चांद की सतह पर घूमकर और वहां के वायुमंडल का अध्ययन करना होगा।












Click it and Unblock the Notifications