चंद्रयान-2: इसरो को मिली बड़ी सफलता, स्‍पेसक्राफ्ट से अलग हुआ लैंडर विक्रम

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    Chandrayaan 2 मिशन के लिए बड़ी कामयाबी, orbiter से अलग हुआ Vikram lander |वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्‍ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का मून मिशन चंद्रयान-2 ने सफलता की तरफ कदम बढ़ा दिए हैं। इस मिशन में शामिल स्‍पेसक्राफ्ट से लैंडर विक्रम अलग हो गया है। अब छह दिन बाद चंद्रयान-2 चांद पर लैंड करेगा। रविवार को शाम 06 बजकर 21 मिनट पर चंद्रयान-2 चंद्रमा की पांचवी कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश किया था। कक्षा बदलने में इसे 52 सेकंड का वक्त लगा। इस कक्षा की चांद से न्यूनतम दूरी मात्र 109 किलोमीटर है। इससे पहले चंद्रयान-2 ने 30 अगस्त को चौथी कक्षा में प्रवेश किया।

    chandrayaan-2

    दुनिया का चौथा देश होगा भारत

    इसरो की ओर से जारी बयान में कहा गया कि, प्रणोदन प्रणाली का प्रयोग करते हुए चंद्रयान-2 अंतरिक्षयान को चंद्रमा की अंतिम एवं पांचवीं कक्षा में आज (एक सितंबर, 2019) सफलतापूर्वक प्रवेश कराने का कार्य योजना के मुताबिक छह बजकर 21 मिनट पर शुरू किया गया। चंद्रमा की पांचवीं कक्षा में प्रवेश कराने की इस पूरी प्रक्रिया में 52 सेकेंड का समय लगा। इसरो ने जानकारी दी है कि सफलतापूर्वक सामान्य परिस्थितियों में यह महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया गया है। इसरो के मुताबिक लैंडर विक्रम के चांद पर उतरने से पहले अभी वह चंद्रमा की 2 और कक्षाओं में प्रवेश करेगा। उसका अगला कदम चंद्रयान-2 ऑर्बिटर से विक्रम लैंडर को अलग करना है जो दो सितंबर को दोपहर 12 बजकर 45 मिनट से एक बजकर 45 मिनट के बीच किया जाएगा। विक्रम लैंडर सात सितंबर को तड़के डेढ़ बजे से ढाई बजे के बीच चंद्रमा की सतह पर पहुंचेगा। सबकुछ यदि ठीक रहता है तो अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत चांद पर 'सॉफ्ट लैंडिंग' करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा।

    कौन से मिशन को पूरा करेगा चंद्रयान

    चंद्रयान-2 में स्‍पेसक्राफ्ट तीन हिस्‍सों में हैं-ऑर्बिटर, लैंडर-विक्रम और रोवर-प्राग्‍यान। इसरो ने लैंडर का नाम विक्रम, देश में अंतरिक्ष प्रोग्राम के जनम विक्रम साराभाई के नाम पर रखा है और रोवर का नाम प्रज्ञान रखा है जो कि एक संस्‍कृत शब्‍द है। इसका मतलब होता है ज्ञान।इसरो ने बताया था कि विक्रम सात सितंबर 2019 को चांद के साउथ पोल के करीब लैंड करेगा। विक्रम तीन तरह के वैज्ञानिक प्रयोगों को पूरा करेगा। जब ऑर्बिटर चांद की सतह पर दाखिल हो जाएगा तो उसके चार दिन बाद लैंडर विक्रम उससे अलग हो जाएगा। चांद पर एक लूनर डे मतलब धरती पर 14 दिन के बराबर होता है। चंद्रयान 2 का मकसद चांद के करीब स्थित ध्रुवों पर मौजूद वाटर आइस और दूसरे जटिल पदार्थों का अध्ययन करना है। नेशनल जियोग्राफिक के मुताबिक इस रिसर्च से वैज्ञानिकों को चांद और सोलर सिस्‍टम के बारे में और बेहतर जानकारियां हो सकेंगी। साथ ही भावी अं‍तरिक्ष वैज्ञानिकों के लिए पानी के स्‍त्रोत का पता लगाने में भी मदद मिलेगी।

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