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Chandrayaan 2: 'लैंडर विक्रम' पर मंडराया माइनस 200 डिग्री का खतरा, जानिए क्या कर रहा है ISRO?

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    Chandrayaan 2 Mission के तहत Vikram Lander से contact के लिए अब ये कर रहा है ISRO | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। चंद्रयान-2 का लैंडर विक्रम इसरो के प्लान के मुताबिक सॉफ्ट लैंडिंग नहीं कर सका और स्पेस एजेंसी से इसका संपर्क टूट गया, हालांकि, ऑर्बिटर की मदद से विक्रम की लोकेशन का पता लग चुका है और उससे संपर्क साधने की पूरी कोशिश की जा रही है लेकिन अब तक पांच दिन बीत गए हैं लेकिन लैंडर से कोई संपर्क नहीं हो पाया है, 21 सितंबर तक ही वे लैंडर विक्रम से संपर्क साधने की कोशिश कर सकते हैं, इसके बाद 'लूनर नाइट' की शुरुआत हो जाएगी,जिससे हालात एकदम से बदल जाएंगे।

    'लैंडर विक्रम' पर मंडराया माइनस 200 डिग्री का खतरा

    'लैंडर विक्रम' पर मंडराया माइनस 200 डिग्री का खतरा

    क्योंकि चांद की सतह बहुत ज्यादा ठंडी है, साउथ पोल में तो तापमान माइनस में पहुंच जाता है, ऐसे में अब लैंडर विक्रम पर माइनस 200 डिग्री का भी कहर बरपा रहा है, आपको बता दें कि चंद्रमा के दक्षिण छोर से प्रवेश करने वाला भारत पहला देश है, विक्रम से संपर्क करने के लिए इसरो हर संभव प्रयास कर रहा है।

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    कर्नाटक के गांव बयालालु से 32 मीटर के एंटीना का इस्तेमाल...

    कर्नाटक के गांव बयालालु से 32 मीटर के एंटीना का इस्तेमाल...

    खबर है कि उसने कर्नाटक के गांव बयालालु से 32 मीटर के एंटीना का इस्तेमाल लैंडर विक्रम से संपर्क करने लिए किया है, हालांकि अभी तक उसे सफलता नहीं मिली है, इसका स्पेस नेटवर्क सेंटर बेंगलुरु में है,कुछ वैज्ञानिकों ने इसरो के संभावित प्रयासों पर कुछ बेहद तथ्यात्मक प्रकाश डाला है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इसरो को पता है कि विक्रम से किस फ्रीक्वेंसी पर संचार स्थापित हो सकता है और उसी के अनुसार वह रोजाना उस तक कई कमांड भेजने की कोशिश कर रहा है। इसरो को उम्मीद है कि जैसे ही विक्रम को उसकी फ्रीक्वेंसी मिलेगी वह तत्काल उसपर प्रतिक्रिया देने लगेगा।

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    यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ईएसए) की रिपोर्ट

    यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ईएसए) की रिपोर्ट

    इससे पहले यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ईएसए) की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि जिस जगह विक्रम की लोकेशन ट्रैक की गई है, वो एक बेहद ही जटिल और खतरनाक इलाका है। दरअसल यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने खुद अपने 'लूनर लैंडर मिशन' के लिए ये रिपोर्ट तैयार की थी लेकिन पैसों की कमी के पीछे ये मिशन तो पूरा नहीं हो पाया लेकिन उसकी रिपोर्ट से कई अहम जानकारियां निकलकर सामने आई हैं।

    'लूनर लैंडर मिशन'

    इस रिपोर्ट के मुताबिक 'लूनर लैंडर मिशन' को साल 2018 में लैंड होना था लेकिन उसे बीच में बंद करना पड़ा, लेकिन इस मिशन के लिए ईएसएस ने लैंडिग के दौरान चांद के दक्षिणी ध्रुव में होने वाले संभावित खतरों पर एक रिपोर्ट तैयार की थी, जिसके मुताबिक चांद का साउथ एरिया काफी जटिल है।

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    धरती से जुदा हैं चांद के हालात...

    धरती से जुदा हैं चांद के हालात...

    चांद की सतह धरती की सतह से एकदम अलग है, यहां बहुत उबड़-खाबड़ रास्ते हैं, यहां पर चार्ज्ड पार्टिकल्स और रेडिएशन चांद की धूल से मिलते हैं, जिससे यंत्र के मशीनें खराब हो सकती हैं, चांद की धूल के बारे में ज्यादा जानकारी ना होने की वजह से इस इलाके के बारे में सही अनुमान लगा पाना मुश्किल है।

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    English summary
    The south polar region of the moon, receives very little sunlight.The temperature of the lunar cold traps can go as low as minus 200 degrees Celsius,so cold that most gases freeze.
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