पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्राओं को 'ढंग के कपड़े' पहनकर बाहर निकलने का फरमान जारी
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में चंडीगढ़ में पहली बार एक युवती छात्र संघ चुनावों में क्या चुनी गई, यहां पढ़ रही छात्राओं के लिये चुनाव परिणाम के दो दिन बाद ही एक नई आफत सामने आ गई। कॉलेज के इस फरमान के बाद यहां पढ़ रही छात्राओं में खासा आक्रोश देखने को मिल रहा है। दरअसल, एक ओर चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में पहली बार मर्दों का दबदबा तोड़ एक युवती छात्रसंघ चुनावों में जीती है, तो दूसरी ओर यहां एक ऐसा फरमान जारी हुआ है,जिसे आधुनिक समाज आसानी से पचा नहीं पा रहा है।

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने यहां पढऩे वाली छात्राओं खासकर जो हॉस्टल में रहती हैं, उन्हें फरमान जारी कर दिया है कि वह कमरों से बाहर निकलते समय सही पहरावा ही पहनें। यानि दूसरे शब्दों में सलवार कमीज ही पहनें। ऐसा न करने वाली छात्राओं के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही गई है। इस फरमान के खिलाफ यहां के पढ़ने वाले छात्र और छात्र संगठनों ने विरोध करना शुरू कर दिया है।
विवादास्पद नोटिस यूनिवर्सिटी के माता गुजरी हॉस्टल नंबर-1 के सूचना पट्ट पर लगाया गया है। इस नोटिस के जरिए हॉस्टलर्स को निर्देश दिए गए हैं कि छात्राएं कॉमन रूम, डाइनिंग हॉल, हॉस्टल ऑफिस या किसी कार्यक्रम में सही से कपड़े पहनकर ही निकलें। हॉस्टल रूल बुल पेज संख्या पांच, बिंदु नंबर 20 के मुताबिक, जो भी इस निर्देश का पालन नहीं करेगा, उसके खिलाफ हॉस्टल वॉर्डन पेनाल्टी लगा सकती हैं। दलील दी जा रही है कि छात्राओं द्वारा अपनी मर्जी के कपड़े पहनकर घूमने में कुछ गलत नहीं है और इसको लेकर इस तरह के निर्देश का दिया जाना सरासर गलत है।
यहां दिलचस्प बात यह है कि यह नोटिस तब सामने आया है, जब यहां पहली बार कोई युवती छात्रसंघ अध्यक्ष चुनी गई है। यूनवर्सिटी में इसे लोगों की सोच में हुए परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा था, मगर युवतियों के कपड़ों को लेकर जारी किए नोटिस ने कैंपस में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस नोटिस को लेकर विद्यार्थियों का कहना है कि छात्राओं के लिए ही इस प्रकार के नियम क्यों बनाए गए हैं? ऐसे नियम खत्म कर दिए जाने चाहिए। भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने भी इस नोटिस को गलत बताते हुए कहा है कि एक तरफ हम पहली बार विवि में एक महिला अध्यक्ष के जीतने का जश्न मना रहे हैं। दूसरी ओर इस तरह के नोटिस सामने आ रहे हैं। एबीवीपी ने कहा है कि इसकी जिम्मेदारी यूनिवर्सिटी की महिला अध्यक्ष को ही लेनी चाहिए।
गौरतलब है कि इस बार पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव 2018 के लिए हुए मतदान में स्टूडेंट्स फॉर सोसाइटी (एसएफएस) ने भारी मतों से जीत दर्ज की थी और कनुप्रिया यूनिवर्सिटी की पहली महिला अध्यक्ष बनी हैं।












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