SC में केंद्र सरकार की अपील, अग्निपथ योजना पर किसी भी फैसले से पहले हमारा पक्ष जरूर सुनें
नई दिल्ली, 21 जून। सेना में भर्ती की अग्निपथ योजना का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस भर्ती योजना को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इसको लेकर कई याचिकाएं दायर की गई हैं। इस बीच केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर करके आग्रह किया गया है कि अग्निपथ सैन्य भर्ती योजना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर कोई भी निर्णय लेने से पहले हमारा पक्ष जरूर सुना जाए। बता दें कि अभी तक सुप्रीम कोर्ट में अग्निपथ सैन्य भर्ती योजना के खिलाफ तीन याचिकाएं दायर की गई हैं। हालांकि केंद्र की ओर से दायर कैविएट में किसी विशेष याचिका का जिक्र नहीं किया गया है।

वरिष्ठ एडवोकेट हर्ष अजय सिंह ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अग्निपथ योजना के खिलाफ याचिका दायर करके कोर्ट से केंद्र सरकार को निर्देश देने की अपील की थी कि वह इस योजना पर फिर से विचार करे। याचिका में कहा गया है कि इस योजना के ऐलान के बाद देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुआ है। इससे पहले दो याचिका एडवोकेट एमएल शर्मा और विशाल तिवारी में भी सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी। एमएल शर्मा ने जो याचिका दायर की है उमसे उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार ने सदियों से इस देश में सेना में भर्ती की चली आ रही पुरानी प्रक्रिया को खत्म कर दिया। सेना में भर्ती संवैधानिक प्राविधान है, लेकिन बिना संसद की स्वीकार्यता लिए इसके खत्म कर दिया गया।
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पिछले हफ्ते एडवोकेट विशाल तिवारी ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि वह इस भर्ती की समीक्षा के लिए एक कमेटी का गठन करे और इसका आंकलन करे कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सेना पर इसका क्या असर होगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से अपील की गई कि जिस तरह से इस योजना के खिलाफ देशभर में बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुआ, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया, उसकी जांच के लिए एसआईटी का गठन किया जाए। गौर करने वाली बात है कि अग्निपथ योजना के ऐलान के बाद से ही इसके खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है। जिसके बाद अग्निपथ योजना में भर्ती के लिए इस साल अधिकतम उम्र को 21 साल से बढ़ाकर 23 साल कर दिया गया है।












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