केंद्र सरकार बंद करेगी घाटे में चल रहे 15 सरकारी उपक्रम, हजारों की जा सकती है नौकरी
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने घाटे में चल रहे 15 सरकारी कंपनियों को बंद करने का फैसला किया है। इनमें से पांच सरकारी उपक्रमों को बंद करने की मंजूरी केंद्रीय मंत्रिमंडल पहले ही दे चुका है।

वहीं इसके अलावा तीन अन्य सरकारी कंपनियों को बंद करने की सलाह के बावजूद फिर से उसमें पूंजी लगाकर उसमें फिर से जान फूंकने का प्रस्ताव दिया गया है।
12 से ज्यादा सरकारी उपक्रम हैं जिनकी हालत अच्छी नहीं
टीओआई की खबर के मुताबिक देश में ऐसी 12 से ज्यादा सरकारी उपक्रम हैं जिनकी हालत अच्छी नहीं है। इन खराब हालत वाली कंपनियों की पहचान नीति आयोग ने की है। पर केंद सरकार में के भीतर कंपनियों को लेकर चल रही तेज पैरवी के कारण इन कंपनियों के भविष्य पर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।
आपको बताते चलें कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने एचपीसीएल बायोफ्यूल को बंद करने के फैसले नाराजगी जाहिर की है। वहीं दूसरी तरह कपड़ा मंत्रालय ने खराब हालत में पहुंच चुकी ब्रिटिश इंडिया कोर्पोरेशन और एर्गिन मिल्स को पीएमओ के स्तर पर बंद करवाने में सफलता हासिल कर ली है। वहीं तीन फार्मा कंपनियों के फ्यूचर को लेकर फैसला करने का निर्णय मंत्रियों के समूह के पास भेजा गया है। हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स को बंद करने के फैसले को सरकार की मंजूरी नहीं मिली है।
26 को बंद करने का प्रस्ताव
केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय ने एचएमटी की कुछ यूनिट को बंद करवाने के प्रस्ताव पर सफलता पाई है। वहीं शिपिंग मिनिस्ट्री को कैबिनेट की तरफ से अंतर्देशीय जल परिवहन निगम को बंद करने के लिए मंजूरी मिल चुकी है। लंबे समय से घाटे में चल रहे सार्वजनिक क्षेत्र के उन पीएसयू को बंद करने के बारे में सरकार ने सुझाव मांगे थे, जो कि सरकारी खजाने पर बोझ बन रहे थे।
नीति आयोग ने 74 ऐसी सरकारी कंपनियों की पहचान की है जो लगातार घाटा उठा रही हैं। इनको बंद करने और बेचने को लेकर पीएमओ की तरफ से हरी झंडी मिल चुकी है। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक 10 कंपनियों में निवेश, 22 कंपनियों में रणनीतिक तौर पर निवेश, छह कंपनियों के मलिकाना हक का ट्रांसफर, तीन कंपनियों का विलय, पांच को लंबे समय के लिए लीज पर देने और 26 को बंद करने का प्रस्ताव है।












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