सदन में केंद्र सरकार का दावा- मैला ढोने से किसी की मौत नहीं हुई दर्ज
सदन में केंद्र सरकार का दावा- मैला ढोने से किसी की मौत नहीं हुई दर्ज
नई दिल्ली, 03 अगस्त: लोकसभा के मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने मंगलवार को दावा किया कि मैला ढोने से किसी की भी मौत नहीं हुई है। इस बयान में कहा गया देश में हाथ से मैला ढोने में लगे लोगों की इस दौरान मौत होने की रिपोर्ट नहीं है।

केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री रामदास अठावले ने ये जानकारी मंत्री बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सांसद गिरीश चंद्र द्वारा देश में हाथ से मैला उठाने वालों की स्थिति और उनके रोजगार की स्थिति के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कही।
2013 से हाथ से मैला ढोने पर प्रतिबंध है
उन्होंने कहा मैनुअल स्कैवेंजर्स के रूप में रोजगार का निषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 (एमएस अधिनियम, 2013)" की धारा 2 (1) (जी) के तहत परिभाषित के रूप में वर्तमान में मैनुअल स्कैवेंजिंग में लगे लोगों की कोई रिपोर्ट नहीं है। मालूम हो 2013 से हाथ से मैला ढोने पर प्रतिबंध है।
टैंक की खतरनाक सफाई के दौरान हुई दुर्घटनाओं में हुई 330 लोगों की मौत
रामदास अठावले ने कहा कि कोई भी व्यक्ति या एजेंसी उपरोक्त तिथि से किसी भी व्यक्ति को हाथ से मैला ढोने के काम में नहीं लगा सकती है और न ही नियुक्त कर सकती है। रामदास अठावले ने स्वीकार किया कि पिछले पांच वर्षों में "सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई के दौरान हुई दुर्घटनाओं" के कारण लगभग 330 लोग मारे गए हैं। सबसे ज्यादा संख्या उत्तर प्रदेश में दर्ज की गई जहां 47 लोगों की मौत हुई, इसके बाद तमिलनाडु में 43, दिल्ली में 42 और हरियाणा में 36 लोगों की मौत हुई।
हाथ से मैला ढोने वालों को सहायता प्रदान कर रही सरकार
मंत्रालय ने बताया कि सरकार पहचाने गए हाथ से मैला ढोने वालों को सहायता प्रदान कर रही है। सरकार परिवार में एक पहचाने गए हाथ से मैला ढोने वाले के लिए ₹40,000 की एकमुश्त नकद सहायता प्रदान करती है। केंद्र मैनुअल मैला ढोने वालों और उनके आश्रितों को 3,000 रुपये प्रति माह के वजीफे के साथ दो साल तक कौशल विकास प्रशिक्षण भी प्रदान करता है।












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