केंद्र सरकार ने मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी बढ़ाई, औसतन 20 रुपये का इजाफा
नई दिल्ली- कोरोना वायरस की वजह से जारी लॉकडाउन को देखते हुए केंद्र सरकार ने मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी बढ़ा दी है। गौरतलब है कि देश के जिन इलाकों में सोमवार से लॉकडाउन में थोड़ी ढील देने की इजाजत मिली है, उनमें मनरेगा से जुड़े काम भी शामिल हैं। जाहिर है कि संकट की इस घड़ी में अगर मजदूरों की पारिश्रमिक बढ़ाने का फैसला किया गया है तो यह उनके लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है।(तस्वीर प्रतिकात्मक)

केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी एंप्लॉयमेंट गारंटी ऐक्ट के तहत देश में मनरेगा मजदूरों की पारिश्रमिक बढ़ा दी है। केंद्रीय ग्रामीण और पंचायती राज मंत्रालय के मुताबिक यह फैसला कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के मद्देनजर किया गया। जिसके तहत मजदूरों की मजदूरी में औसतन 20 रुपये का इजाफा किया गया है।
बता दें कि सोमवार से ही केंद्र सरकार ने लॉकडाउन में जिन क्षेत्रों को राहत दी है उनमें ग्रामीण इलाकों में मनरेगा से जुड़े कार्य भी शामिल हैं। बता दें कि देश के ग्रामीण इलाकों में यह रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत है और 5 से 6 करोड़ परिवारों को इसके जरिए रोजगार मिलता है। हालांकि, केंद्र सरकार ने मनरेगा से जुड़ी सभी परियोजनाओं में हाथ लगाने की मंजूरी दी है, लेकिन उसमें भी जल संरक्षण और सिंचाई से जुड़ी परियोजनाओं पर ज्यादा ध्यान देने को कहा गया गया। माना जा रहा है कि लॉकडाउन और कोरोना वायरस की वजह से अभी जो प्रवासी मजदूर अपने गांवों की ओर लौटे हैं, उन्हें सरकार के इस फैसले से बहुत बड़ी राहत मिल सकती है, जिनकी रोजी-रोटी में फिलहाल दिक्कत आ गई है। एक आंकड़े के मुताबिक इस वक्त देश में बड़े शहरों से लगभग 5 से 6 लाख प्रवासी मजदूर अपने गांवों में पहुंच गए हैं।
गौरतलब है कि पिछले 14 अप्रैल को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाने की घोषणा की थी, उसी दिन केंद्र सरकार ने मनरेगा से जुड़े तमाम बकाए गरीबों के खातों में ट्रांसफर कर दिए थे। इसके लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय को पूरे साल के लिए आवंटित बजट का 14 फीसदी हिस्सा इस्तेमाल किया गया था, ताकि गरीब मजदूरों को लॉकडाउन में होने वाली मुश्किलों से बचाया जा सके।












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