केंद्र सरकार ने वैक्सीन की खरीद पर खर्च किए हैं 19675 करोड़ रुपए, 35000 करोड़ का था बजट
नई दिल्ली, दिसंबर 24। देश में 21 जून 2021 से टीकाकरण अभियान की जिम्मेदारी पूरी तरह से केंद्र सरकार ने अपने हाथों में ली थी। तब से देश में सभी लोगों को मुफ्त वैक्सीन दी जा रही है और टीकाकरण अभियान ने भी कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए हैं। हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री ने बताया था कि देश की 60 फीसदी योग्य आबादी को पूरी तरह से वैक्सीनेट किया जा चुका है। ये संभव हो पाया है केंद्र सरकार की कोशिशों की वजह से और रिकॉर्ड स्तर पर वैक्सीन की खरीद से, जी हां एक आरटीआई में ये पता चला है कि भारत सरकार 1 मई से 20 दिसंबर तक 19675 करोड़ रुपए मुफ्त वैक्सीनेशन पर खर्च कर चुकी है।

वैक्सीनेशन के लिए 35 हजार करोड़ रुपए था बजट
दरअसल, एक सोशल वर्कर अमित गुप्ता के द्वारा दायर की गई RTI के जवाब में सरकार ने बताया है कि केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मुफ्त कोरोना वैक्सीन की सप्लाई करने पर 19675 करोड़ रुपए खर्च कर दिए हैं। हालांकि ये अभी केंद्रीय बजट 2021-2022 में वैक्सीन के लिए रखे गए 35 हजार करोड़ रुपए के बजट से कम है।
सरकारी वैक्सीनेशन सेंटर पर लगे अधिक टीके
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के कोविड-19 वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन सेल की तरफ से कहा गया है कि 1 मई से 20 दिसंबर तक सरकारी कोविड टीकाकरण केंद्रों में 117.56 करोड़ यानी 96.5 प्रतिशत खुराक दी गई है। साथ ही प्राइवेट वैक्सीनेशन सेंटरों पर लगभग 4.18 करोड़ डोज दी गई हैं, जिसमें कोविशील्ड की 3.55 करोड़ खुराक, कोवैक्सिन की 0.51 करोड़ खुराक और स्पुतनिक वी वैक्सीन की 0.11 करोड़ खुराक शामिल हैं।
वैक्सीन उत्पादन का 25 प्रतिशत हिस्सा निजी अस्पतालों को
आपको बता दें कि देशभर में 21 जून से प्रभावी 'राष्ट्रीय COVID टीकाकरण कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए संशोधित दिशानिर्देश' के तहत, घरेलू वैक्सीन निर्माताओं के पास अपने मासिक वैक्सीन उत्पादन का 25 प्रतिशत तक सीधे निजी अस्पतालों को उपलब्ध कराने का विकल्प है और कोई भी बचा हुआ टीका भी सरकार द्वारा खरीदा जाता है।












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