Census-2027: परिसीमन से क्यों डर रहा तमिलनाडु? स्टालिन ने केंद्र सरकार के फैसले का किया विरोध
Census-2027: जनगणना-2027 के साथ जातियों की गणना आयोजित करने का फैसला केंद्र सरकार ने बुधवार को सुनाया है। मार्च 2027 से दो चरणों में की जा रही जनगणना में इस बार जनसंख्या के साथ-साथ लोगों की जाति की गणना की जाएगी। केंद्र सरकार की इस घोषणा के बाद दक्षिण राज्यों खासकर तमिलनाडु जैसे राज्यों में परिसीमन को लेकर बहस छिड़ चुकी है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन ने केंद्र सरकार पर जनगणना देर से करवाए जाने का आरोप लगाया है और तमिलनाडु के संसदीय सीटों को कम करने की भाजपा की योजना बताया है।
बता दें स्टालिन ने केंद्र सरकार से वर्ष 1971 की जनगणना आधारित परिसीमन को 2026 से आगे 30 वर्षों तक बढ़ाने की मांग की थी। उन्होंने मांग की थी कि यथास्थिति तीन दशकों यानी 2056 तक ऐसे ही जारी रहनी चाहिए। वहीं अब सीएम एम स्टालिन ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, "भारत के संविधान के अनुसार 2026 के बाद पहली जनगणना के बाद परिसीमन होना चाहिए।" साथ ही स्टालिन ने भाजपा सरकार पर 2027 तक जनगणना जानबूझकर टालने का आरोप लगाया है।

स्टालिन ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, "ये तमिलनाडु के संसदीय प्रतिनिधित्व कम करने की भाजपा सरकार की योजना है। हमें केंद्र से स्पष्ठ जवाब चाहिए।" आइए जानते हैं तमिलनाडु समेत दक्षिण के राज्यों को परिसीमन से क्यों डर लगा रहा है और स्टालिन को इस पर आपत्ति क्यों है?
2027 में जनगणना के बाद क्या होगा बदलाव?
गृह मंत्रालय की घोषणा के अनुसार जनसंख्या जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि है। जनगणना लगभग 21 दिनों में पूरी होने की संभावना है, और अंतिम रिपोर्ट 2027 के अंत तक आ सकती है। संविधान के अनुसार, हर जनगणना के बाद लोकसभा और विधानसभा सीटों का परिसीमन किया जाना है। यानी इस जनगणना के बाद परिसीमन हो सकेगा। याद रहे सरकार ने परिसीमन के बाद संसद में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का वादा किया है। इसके साथ ही ये परिसीमन वन नेशन वन इलेक्शन का भी आधार बनेगा।
परिसीमन से क्यों डर रहा तमिलनाडु?
दक्षिण राज्यों की राजनीतिक पार्टियों को डर है कि अगर परिसीमन ताजा जनगणना के आधार पर किया गया, तो वे संसद में अपना प्रतिनिधित्व खो देंगे। उनका तर्क है कि उन्होंने उत्तर के राज्यों की तुलना में दक्षिण के राज्यों ने जनसंख्या पर बेहतर नियंत्रण किया है। जिससे जनसंख्या के आधार पर सीटें आवंटित होगी और उन्हें संसद में कम प्रतिनिधित्व मिलेगा।
यदि 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन होगा तो लोकसभा में इनकी सीटें घट जाएंगी और इनकी राजनीतिक ताकत कम हो जाएगी। याद रहे तमिलनाडु की डीएमके सरकार ने 2025 की शुरुआत में जनगणना आधारित परिसीमन का विरोध किया था और एक प्रस्ताव भी पारित किया था।
जनगणना 2027 के बाद परिसीमन आयोग का गठन होगा
जनगणना के बाद 2027 के अंत तक जो जनगणना का आंकड़ा आएगा, उसके बाद परिसीमन आयोग का गठन के लिए परिसीमन अधिनियम पारित करना होगा। परिसीमन आयोग राज्य सरकारों समेत अन्य हितधारकों की सलाह से प्रति निर्वाचन क्षेत्र जनसंख्या सूत्र के आधार पर परिसीमन होगा।
परिसीमन का खुलकर विरोध क्यों नहीं कर सकेंगी विपक्षी पार्टियां?
अनुच्छेद 81 के अनुसार, लोकसभा में अधिकतम 550 सीटें हो सकती हैं। संसद में सीटें बढ़ाने के लिए संवैधिानिक संशोधन पारित करवाना होगा। सीटें बढ़ाने के लिए संविधान संशोधन (2/3 बहुमत) जरूरी होगा। यदि संसद में कुल सीटें नहीं बढ़ाई जातीं, तो 543 सीटों के भीतर पुनर्वितरण से दक्षिण राज्यों को नुकसान हो सकता है। चूंकि 33% महिलाओं का आरक्षण, जो 2023 में पारित हुआ, सीटों के परिसीमन के बाद ही लागू होगा। परिसीमन का विरोध करने वाली पार्टियों को "महिला विरोधी" करार दिया जा सकता है।












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