छोटी सी जांच के लिए महीने भर से इस अस्पताल में हैं छगन भुजबल, ED ने किया निरीक्षण

महाराष्ट्र के पूर्व उप-मुख्यमंत्री छगन भुजबल कुछ घंटो की जांच के लिए बीते 1 महीने से अस्पताल में भर्ती हैं। इस पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

मुंबई। नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता और महाराष्ट्र के पूर्व उप-मुख्यमंत्री छगन भुजबल अब भी अस्पताल में हैं।

उन्हें 2 नवंबर को थैलियम स्कैन के लिए बॉम्बे हॉस्पिटल लाया गया था। बता दें कि भुजबल पर कई करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया गया है।

शुक्रवार और शनिवार को (2 और 3 दिसंबर) के दिन प्रवर्तन निदेशालय (ED)के अधिकारियों ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। यह निरीक्षण इसलिए किया गया छगन को 'विशेषाधिकारों वाला इलाज' तो नहीं मिल रहा है?

chhagan bhujbal

1 घंटे की पूछताछ

औचक निरीक्षण पर पहुंचे ED के अधिकारियों ने अस्पताल के डॉक्टरों और छगन भुजबल से करीब 1 घंटे पूछताछ की।

अंग्रेजी अखबार मुंबई मिरर के मुताबिक जांच से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि अधिकारियों को यह पता चला है कि भुजबल को 'अत्यधिक शानदार सुइट' अलॉट किया गया है। इस सुइट का रूम नंबर है 1360 और यह अस्पताल के तेरहवें फ्लोर पर है।

कुछ घंटे में हो सकती थी जांच

बताया गया कि जिस जांच के लिए 2 नवंबर को भुजबल को अस्पताल लाया गया था वो कुछ घंटे की जांच थी।

ED के अधिकारियों की ओर से किए गए औचक निरीक्षण के बाद सभी संबंधित विभागों- बॉम्बे हॉस्पिटल, राज्य सरकार के जेजे हॉस्पिटल और ऑर्थर रोड जेल के लिए अधिकारियों का कहना है कि यह तय करने वो कोई नहीं हैं कि भुजबल को कितने दिन अस्पताल में रहना है।

हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ बीके गोयल ने कहा कि इस बात का कोई सवाल ही नहीं है कि अस्पताल किसी को 'विशेषाधिकारों वाला इलाज' दे रहा है।

गोयल ने आगे कहा कि टेस्ट रिपोर्ट में सामने आई बात 4 नवंबर को ही जेजे अस्पताल को भेज दी गई थी। वो अगले कदम के लिए हमें या जेल प्रशासन को बताएंगे। कहा कि जहां तक हमारा इस मामले से संबंध है, वो भुजबल को इलाज उपलब्ध कराना है, जो हम कर रहे हैं।

अखबार के अनुसार जब गोयल से भुजबल के इलाज के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनकी हालत स्थिर है। उन्हें हाई ब्लड प्रेशर और दिल से संबंधित बीमारी छोटी बीमारी की शिकायत है।

होनी थी यह जांच

बता दें कि भुजबल को बॉम्बे अस्पताल इसलिए लाया गया था क्योंकि थैलियम स्कैन जो कि एक साधारण ओपीडी प्रक्रिया है,वो शहर के किसी सरकारी अस्पताल में नहीं हो सकती।

सरकारी केईएम अस्पताल में अभी काम चल रहा है और जेजे अस्पताल के डीन डॉक्टर टीपी लहाने ने टेस्ट के लिए लीलावती, जसलोक और बॉम्बे हॉस्पिटल की सिफारिश की थी।

अब डॉक्टर लहाने ने गेंद ऑर्थर रोड जेल प्रशासन के पाले में डाल दी है। लहाने ने कहा कि बॉम्बे हॉस्पिटल की रिपोर्टस 6 नवंबर को जेल प्रशासन को सौंप दी गई थीं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भुजबल की एंजियोग्राफी होनी है। अब यह फैसला जेल प्रशासन को लेना है कि यह प्रक्रिया को वो कहां पूरा कराएंगे?

इस मामले पर जेल प्रशासन ने तल्ख लहजे में सवाल किया कि हम डॉक्टरों पर भुजबल को डिस्चार्ज करने का दबाव नहीं बना सकते। क्या हम ऐसा कर सकते हैं?

जेल प्रशासन ने कहा...

अखबार के मुताबिक जब अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (जेल) बीके उपाध्याय को डॉक्टर लहाने के कही बात बताई गई तो उन्होंने कहा यह बॉम्बे अस्पताल और जेजे हॉस्पिटल के डॉक्टरों पर हैं जो भुजबल के स्वास्थ्य पर राय देने के लिए सक्षम प्राधिकारी हैं।

कहा कि हमारी ओर से किसी को भी विशेषअधिकार वाली सुविधा किसी को नहीं दी जा रही है। कहा कि जेजे और बॉम्बे अस्पताल के डॉक्टर हमसे बेहतर तरीके से समन्वय बना सकते हैं।

बता दें कि एक्टिविस्ट अंजली दमानिया की ओर से यह सवाल उठाया गया था कि भुजबल कथित तौर पर जेल से परहेज कर रहे थे। उन्होंने सवाल किया था कि क्या डॉक्टरों पर इस बात का राजनीतिक दबाव तो नहीं है कि भुजबल को जेल में ही रखा जाए।

आगे भी हो सकता है औचक निरीक्षण

वहीं ED के सूत्रों का कहना है कि अधिकारी आगे भी बॉम्बे अस्पताल आ सकते हैं। कहा कि शुक्रवार और शनिवार को किए गए निरीक्षण के दौरान कुछ बातें हमारे सामने आई हैं। इसकी जानकारी कोर्ट को दी जाएगी।

गौरतलब है कि इससे पहले भी दांत में परेशानी के बाद उन्हें सेंट जॉर्ज अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसे लेकर भी खूब बवाल हुआ था।

कहा जा रहा था कि आखिर दांत में छोटी सी समस्या को लेकर भुजबल को सामान्य अस्पताल के बजाय सेंट जॉर्ज अस्पताल क्यों भर्ती कराया गया, जिसे लेकर बाद में बयान आया कि क्योंकि भुजबल को डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर है इसलिए उन्हें सेंट जॉर्ज में भर्ती कराया गया था।

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