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क्या पॉर्न वेबसाइट पर कस सकता है सरकारी फंदा?

By Bbc Hindi
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1. क्या आपने कभी कोई पॉर्न वीडियो देखा है?

2. क्या आपको याद है पहली बार पॉर्न देखते वक़्त आपकी उम्र क्या थी?

3. आप, हफ़्ते में कितनी बार पॉर्न वेबसाइट पर जाते हैं?

ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब शायद ही कोई खुलकर देना पसंद करे. हो सकता कोई अपनी बोल्डनेस दिखाने के लिए शुरुआती दो सवालों के जवाब दे भी दे लेकिन बहुत संभव है कि तीसरे सवाल के जवाब में वह महज़ अपनी मुस्कान ही आप तक पहुंचाए.

इन सवालों के जवाब भले ही हमें किसी के मुंह से ना सुनाई पड़ें, लेकिन जब कभी भी पॉर्न वेबसाइटों पर बैन लगने की बात निकलती है तो कई चेहरों पर निराशा और परेशानी के भाव अपने आप झलकने लगते हैं.

दरअसल भारत के दूरसंचार विभाग ने देश में इंटरनेट सेवा उपलब्ध करवाने वाले तमाम सर्विस प्रोवाइडर्स को आदेश दिया है कि वे 827 पॉर्न वेबसाइटों को ब्लॉक कर दें.

यह आदेश उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस फ़ैसले के बाद दिया गया जिसमें उन्होंने देश में पॉर्न वेबसाइटों को बंद करने की बात कही थीं.

हाईकोर्ट में बलात्कार के एक मामले की सुनवाई के दौरान अभियुक्त ने कहा था कि उसने पीड़िता का बलात्कार करने से पहले पॉर्न वीडियो देखा था.

दूरसंचार विभाग के इस आदेश के बाद पॉर्नहब सहित कई जानी मानी पॉर्न वेबसाइट भारत में खुलनी बंद भी हो गईं.

इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने #PORNBAN के साथ अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया.

https://twitter.com/ekta_amazing/status/1055341804151697408

https://twitter.com/blah_blah_nari/status/1055118703166029824

https://twitter.com/nirdeshakikeeda/status/1055153644729962496

कितना देखा जाता है पॉर्न?

ऊपर दी गई सोशल मीडिया की टिप्पणियों के ज़रिए आपने अंदाज़ा लगा ही लिया होगा कि पॉर्न वेबसाइटों पर नकेल कसने से इसे इस्तेमाल करने वाले लोग कितना प्रभावित होते हैं.

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार पॉर्न वेबसाइटों के सच में रोक लगा सकती है. इस सवाल का जवाब पढ़ने से पहले यह भी जान लीजिए कि साल 2015 में भी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लगभग 850 पॉर्न वेबसाइटों ब्लॉक कर दिया था.

लेकिन इसके कुछ वक़्त बाद ही तमाम तरह की नई वेबसाइटें हमारे इंटरनेट के मायाजाल में उपलब्ध हो गईं.

दुनियाभर में पॉर्न सामग्री उपलब्ध करवाने वाली जानी मानी वेबसाइट पॉर्नहब के एक सर्वे में यह बात सामने आई थी कि साल 2017 में भारत में पॉर्न वीडियो देखने में 75 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

इसकी सबसे बड़ी वजह मोबाइल डेटा का बहुत ज़्यादा सस्ता होना बताया गया था. दुनियाभर में तुलना करें तो भारत पॉर्न देखने के मामले में तीसरा सबसे बड़ा देश है. साल 2014 तक भारत पांचवे पायदान पर था.

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पॉर्न पर क्या है क़ानून?

जब किसी क्षेत्र में किसी चीज़ की बहुत अधिक मांग हो तो उसे प्रतिबंधित करना उतना ही मुश्किल हो जाता है. कुछ-कुछ यही हाल भारत में पॉर्न के बारे में कहा जा सकता है.

क्या भारत में पॉर्न को नियंत्रित करने के लिए कोई ख़ास क़ानून है. इस विषय में साइबर मामलों के विशेषज्ञ पवन दुग्गल का मानना है कि भारत में फ़िलहाल पॉर्न को नियंत्रित करने के लिए कोई विशेष क़ानून नहीं है.

पवन दुग्गल कहते हैं, ''कुछ क़ानून ऐसे हैं जो पॉर्नोग्राफ़ी पर भी लागू हो सकते हैं. जैसे, सूचना प्रोद्योगिकी क़ानून है वह कहता है कि किसी भी तरह की अश्लील इलैक्ट्रोनिक सामग्री को प्रकाशित-ट्रांसमीशन या ऐसा करने में सहायता करना ग़ैरक़ानूनी है. इसमें पांच साल की सज़ा और तीन लाख रुपए का ज़ुर्माना है''

पवन दुग्गल बताते हैं असल में यह बताना बहुत मुश्किल है कि किस तरह की सामग्री किसी के मन-मस्तिष्क पर क्या असर करेगी. यही वजह है कि कौन से कंटेंट को अश्लील माना जाए इसे परिभाषित करना भी मुश्किल हो जाता है.

वे कहते हैं, ''अश्लील सामग्री में सिर्फ वीडियो ही नहीं है, इसमें तस्वीरें-स्कैच और टेक्स्ट भी शामिल होता है. वहीं चाइल्ड पॉर्नोग्राफ़ी पर तो उस समाग्री को देखना भी ग़ैरक़ानूनी है और उसकी सज़ा निर्धारित है.''

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पॉर्न पर हमारे शरीर पर असर

पवन दुग्गल एक बात स्पष्ट करते हैं कि किसी सामग्री का किसी व्यक्ति पर क्या असर पड़ेगा इसे कोई बता नहीं सकता और इसे क़ानून की किताबों में भी साफ़-साफ़ लिखना मुश्किल है.

ऐसे में सवाल यह भी बनता है कि पॉर्न देखने का हमारे शरीर पर कैसा असर पड़ता है. इस पर सेक्सोलोजिस्ट विनोद रैना कहते हैं कि जिस देश में सेक्स एजुकेशन के नाम पर कुछ भी ना बताया जाता हो वहां लोगों के पास पॉर्न ही एकमात्र विकल्प बच जाता है.

विनोद कहते हैं, ''पॉर्न देखने के फ़ायदे और नुक़सान दोनों होते हैं. फ़ायदा इस लिहाज़ में कि हमारे देश में सेक्स एक टैबू है, इसलिए लोग सेक्स एजुकेशन के नाम पर पॉर्न के ज़रिए ही तमाम चीज़ें सीखते हैं और नुक़सान इस लिहाज़ में कि इसकी सही जानकारी ना होने की वजह से पॉर्न वीडियो से प्रेरित होकर लोग ग़लत धारणाएं भी बना लेते हैं.''

विनोद का मानना है कि बालिग उम्र का कोई व्यक्ति अगर पॉर्न सामग्री देख रहा है तो उसे रोका नहीं जाना चाहिए. वे कहते हैं, ''हमारे देश में कामसूत्र लिखा गया, यहां खुजराहो के मंदिरों में सेक्स से जुड़े दृश्य अंकित है ऐसे में हम इन वेबसाइटों को कितना नियंत्रित कर सकेंगे. अगर पॉर्न देखने से कोई बलात्कार कर रहा है तो सबसे पहले सरकार को नशे से जुड़ी तमाम चीज़ें प्रतिबंधित करनी चाहिए क्योंकि बलात्कार के पीछे सबसे ज़्यादा वजह यही होती हैं.''

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क्या संभव है पॉर्न पर नियंत्रण?

पॉर्न वेबसाइटों को प्रतिबंधित करने की बात सामने आने के बाद ही पॉर्नहब ने अपनी एक दूसरी वेबसाइट भारतीय दर्शकों के लिए तैयार कर दी.

इसकी जानकारी उन्होंने अपने ट्विटर पर भी दी.

https://twitter.com/Pornhub/status/1055931244129615874

पॉर्नहब की तरह की कई दूसरी वेबसाइटें है जो प्रतिबंध लगने के बाद भी देश में पॉर्न सामग्री उपलब्ध करवा देती हैं. आख़िरकार यह संभव कैसे है.

इस पर पवन दुग्गल बताते हैं, ''असल में भारत में जो भी पॉर्न सामग्री उपलब्ध करवाई जाती है उसमें बहुत बड़ा हिस्सा विदेशी वेबसाइटों का होता है. ऐसे में वे सीधे-सीधे भारतीय क़ानून के अंतर्गत नहीं आती. और अगर किसी वेबसाइट को बैन किया भी जाता है तो इंटरनेट में संसार इतना अधिक विस्तृत है कि कोई भी इसे सीमाओं में नहीं बांध सकता, यही वजह है कि पॉर्न वेबसाइटें बैन होने के बाद भी दोबारा कुछ फ़ेरबदल के साथ उपलब्ध हो जाती है.''

साइबर विशेषज्ञ पवन दुग्गल और सेक्सोलोजिस्ट विनोद रैना दोनों का मानना है कि भारत जैसे बड़े लोकतंत्र में इंटरनेट पर किसी सामग्री को रोक पाना सचमुच असंभव है.

तो इसका समाधान क्या होना चाहिए? इस पर दोनों ही विशेषज्ञों की एक राय है वह है जागरूकता. विनोद रैना कहते हैं कि स्कूली पाठ्यक्रम में 6वीं के बाद ही सेक्स से जुड़ी पढ़ाई शुरू होनी चाहिए जिससे छात्र बड़े होने पर गलत रास्तों में ना जाएं और सही जानकारी जुटा सकें.

वहीं पवन दुग्गल कहते हैं कि लोगों को जागरुक करना होगा कि वे कम से कम पॉर्नोग्राफिक वेबसाइटों पर जाएं क्योंकि इन वेबसाइटों में बहुत से ऐसे लिंक होते हैं जो धोखाधड़ी से जुड़े होते हैं. लोग अक़्सर पॉर्न देखने के साथ-साथ इस धोखे का शिकार भी हो जाते हैं.

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कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि इस तरह के प्रतिबंध भले ही वक़्त बेवक़्त लगते रहते हों लेकिन इन पर सरकारी फंदा नहीं डाला जा सकता.

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English summary
Can the porn website tighten the government scandal

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