गंगा में तैरते मिले सैकड़ों शव, क्या नदी के पानी से फैल सकता है कोरोना वायरस? जानिए जवाब
नई दिल्ली, 12 मई। कोरोना वायरस की पहली लहर को काबू करने के बाद भारत सरकार और लोगों ने महामारी को हल्के में ले लिया। इसका परिणाम यह हुआ कि अब कोविड की दूसरी लहर ने देश में तांडव मचाया हुआ है। जानलेवा बीमारी के चलते अब तक लाखों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, रोजाना हो रही हजारों मौत की वजह से अब श्मशान घाट में भी दाह संस्कार के लिए जगह नहीं बची है। बीमारी की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही गंगा नदी में बहती 100 से अधिक कोविड मरीजों की लाशें निकाली गई हैं।

विचलित करने वाली तस्वीरें आईं सामने
सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरें विचलित करने वाली हैं, इन फोटोज में गंगा नदी में बहते सैंकड़ों शवों को दिखाया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बिहार और उत्तर प्रदेश में नदी से 70 से अधिक शव बरामद किए गए हैं। दावा किया जा रहा है कि कोविड मरीजों के 100 से अधिक शवों को नदी में फेंक दिया गया। नदी में कोरोना मरीजों की लाशें मिलने के बाद अब लोगों में इस बात को लेकर दहशत फैल गई है कि क्या गंगा नदी के पानी से भी कोरोना महामारी फैल सकती है?
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लोगों के मन में उठ रहे ये सवाल
यह सवाल अपने साथ दो और महत्वपूर्ण सवाल लाता है जिसके जवाब के बिना मूल प्रश्न का उत्तर पाना संभव नहीं है। पहला सवाल ये कि क्या कोविड -19 एक शव से फैलता है? और दूसरा ये कि क्या कोरोना वायरस पानी से फैलता है? पहले सवाल के जवाब की बात करें तो इस बात को लेकर जानकारी कम है कि मृत शरीर संक्रमण के लिए जिम्मेदार हो सकता है या नहीं। कई विशेषज्ञों ने इस संभावना को खारिज किया है, हालांकि फिर भी कोविड मृतकों के शवों का कोरोना प्रोटोकॉल के तहत ही अंतिम संस्कार किया जा रहा है। हालांकि अमेरिका की यूएस सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का कहना है कि मृत शरीर से कोविड-19 का संक्रमण होने का जोखिम बहुत कम है।

क्या कोरोना वायरस पानी से फैलता है?
इस सवाल के जवाब की बात करें तो स्वास्थ्य विशेषज्ञों और एजेंसियों के मुताबिक कोरोना वायरस संक्रमति व्यक्ति के छींक, खांसी या बोलने के दौरान निकले श्वसन बूंदों के जरिए दूसरे व्यक्ति में फैलता है। कुछ श्वसन बूंदों काफी छोटी होती हैं जिन्हें एरोसोल कहा जाता है, ये हवा में दो मीटर से अधिक दूरी तय कर सकती हैं। इसका मतलब यह हुआ की संक्रमित व्यक्ति के संपंर्क में आए पानी से कोरोना नहीं फैल सकता। कुछ स्टडी में संक्रमित व्यक्ति के मल में भी वायरल मिलने की बात कही गई है हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उससे कोई स्वस्थ्य व्यक्ति संक्रमित हो सकता है या नहीं?

नदी और बेकार पानी में मिला वायरस
हालांकि, इस बात की पुष्टि करने के लिए अभी कोई सबूत नहीं हैकि पानी या यहां तक कि एक स्विमिंग पूल भी कोरोना वायरस प्रसार का जरिया बन सकता है। हवा के द्वारा संक्रमण का प्रसार होता है जो की इसका एक मात्र जरिया है। कुछ अध्ययनों में वायरस को नदी और बेकार पानी में पाया गया है लेकिन इसके प्रमाण नहीं है कि उससे किसी को संक्रमण हुआ है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि पानी में तैरते समय कोरोना संक्रमण नहीं हो सकता। वायरस लोगों के बीच तभी फैलता है जब किसी व्यक्ति का किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ निकट संपर्क होता है।

क्या गंगा नदी के पानी से भी कोरोना महामारी फैल सकती है?
अब अपने मूल सवाल पर लौटते हैं कि क्या नदी में शवो को फेकने से पानी से कोरोना महामारी फैल सकती है? इसकी संभावना तो नहीं दिखाई देती जब तक कि इसका अध्ययन नहीं कर लिया जाता कि क्या पानी में रहने वाले जीवों से कोरोना संक्रमण फैल सकता है। फिर भी शवों को संक्रामक माना जाता है और इसमें बड़ी संख्या में बैक्टीरिया और वायरस होते हैं जो केवल इस मामले में गंगा में प्रदूषण के स्तर को बढ़ाते हैं। बहते हुए शवों के सीधे संपर्क में आने वालों के लिए स्वास्थ्य पर अन्य प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं।
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