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कोरोनाः घर में मास्क लगाने से बच सकते हैं वायरस से?

By BBC News हिन्दी

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'अब घर में भी मास्क पहनने का वक़्त आ गया है’ - ये सलाह जब सोमवार को नीति आयोग के स्वास्थ्य सदस्य डॉक्टर वीके पॉल ने दी, तो घर-घर में चर्चा शुरू हो गई कि क्या लोग अब घर में भी सुरक्षित नहीं हैं.

घर में कोई कोरोना संक्रमित हो जाए तो बाक़ी सदस्यों का मास्क पहनना समझ आता है, लेकिन अगर घर में कोई संक्रमित नहीं भी है तो भी घर पर मास्क पहनना आपको कोरोना से बचाएगा, ये सलाह कितनी अहम है?

ये समझने के लिए हमने कुछ विशेषज्ञ डॉक्टरों से बात की है. इसके अलावा इससे जुड़े और भी कई सवालों के जवाब आपके लिए तलाशने की कोशिश की है.

घर पर मास्क पहनने से क्या है फ़ायदा?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि घर में मास्क पहनने से कोई नुकसान नहीं है, शायद थोड़ा बहुत फायदा ही होगा, क्योंकि संक्रमण इस तेज़ी से फैल रहा है कि अब पूरे के पूरे परिवार संक्रमित हो रहे हैं.

गुरुग्राम स्थित फ़ोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट में वैस्कुलर और एंडोवैस्कुलर सर्जरी के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर हिमांशु वर्मा बीबीसी से बातचीत में कहते हैं कि भारत बहुत ही ज़्यादा घनी आबादी वाला देश है. ख़ासकर दिल्ली समेत कई जगहों पर एक-एक घर या यहां तक कि एक कमरे में कई लोग एक साथ रहते हैं.

उनका कहना है कि इस बार किसी के संक्रमित होने की आशंका बहुत ज़्यादा है.

डॉक्टर हिमांशु वर्मा कहते हैं, "अगर आपके घर में कोई कोरोना संक्रमित है तब तो मास्क पहनना ही है. लेकिन अगर नहीं भी है और आप घनी आबादी वाले इलाक़े में या बुहमंज़िला इमारत में रहते हैं तो मास्क पहनकर घर पर रह सकें तो अच्छा होगा."

दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में रेस्पिरेटरी एंड क्रिटिकल केयर के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर राजेश चावला ने बीबीसी से कहा कि उन्होंने लोगों को ये सलाह पहले ही देनी शुरू कर दी थी.

डॉक्टर राजेश चावला कहते हैं,"अगर कोई व्यक्ति घर से बाहर नहीं जा रहा तब तो ठीक है लेकिन अगर कोई एक भी घर से बाहर जा रहा है तो वो बाहर से संक्रमण ला सकता है. हो सकता है वो ख़ुद एसिम्प्टोमैटिक हों और घर के बाक़ी बड़े लोगों को संक्रमित कर दें. इसलिए बहुत ज़रूरी है कि ये करना चाहिए.”

डॉक्टरों की सलाह है कि जिन घरों से लोग बाहर नहीं जा रहे या किसी खुली जगह रह रहे हैं, जहां उनके किसी के संपर्क में आने की संभावना कम है, वहां पर घर में मास्क पहनना इतना अनिवार्य नहीं है, लेकिन अगर घर का कोई सदस्य किसी भी तरह से किसी के संपर्क में आ रहा है, चाहे वो ज़रूरी सामान ख़रीदते वक़्त ही क्यों ना आ रहा हो, तो उसे घर में मास्क पहनकर रखना चाहिए.

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सिर्फ मास्क पहनने से संक्रमण की चेन टूटेगी?

डॉ हिमांशु मानते हैं कि कहने के लिए ये आसान तरीक़ा है लेकिन व्यावहारिक रूप से इसका पालन कर पाना लोगों के लिए बहुत मुश्किल होगा. कई लोग कह भी रहे हैं कि हमेशा मास्क पहनकर कैसे रख सकते हैं.

इसपर डॉक्टर राजेश चावला कहते हैं कि जब आप कमरे में अकेले हैं तब आप मास्क उतार सकते हैं. उनका कहना है कि साथ-साथ हाथ धोते रहने की आदत बनाए रखना ज़रूरी है.

वहीं डॉक्टर हिमांशु का मानना है कि कुंभ मेले और चुनावों के बाद 'अब तो सब चलता है’ वाला जो माइंडसेट बना, उसको ये कहीं ना कहीं ज़रूर बदलेगा.

हालांकि वो ज़ोर देकर ये बात भी कहते हैं कि इस वक़्त एक सख़्त लॉकडाउन लागू करने की ज़रूरत थी. उनका कहना है कि लॉकडाउन की इससे ज़्यादा ज़रूरत कभी नहीं रही. वो घर में मास्क पहनने वाली सरकार की बात को जनता का ध्यान हटाने का एक तरीक़ा भी बताते हैं, 'जिससे लोगों को कम-से-कम लगे कि ये कुछ कर रहे हैं’.

अगर घर में सभी को वैक्सीन लग जाए, तब भी घर में मास्क पहनना पड़ेगा?

वायरोलॉजिस्ट और वैल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर डॉ गगनदीप कंग ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में बताया कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में इसके लिए विशेष सलाह दी गई है, अमेरिका के सीडीसी यानी सेंटर्स फ़ॉर डिसीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन का कहना है कि अगर परिवार के हर सदस्य को वैक्सीन लग जाती है तो आप मास्क के बिना घर में एक दूसरे के साथ रह सकते हैं, यानी वैक्सीन लगवाने का ये एक बड़ा फायदा होगा.

किस तरह का मास्क पहनना चाहिए?

एन 95 मास्क महंगे हैं और हर कोई उन्हें नहीं ख़रीद सकता. लेकिन डॉ कंग के मुताबिक़, एन95 मास्क जिनमें वॉल्व ना लगा हो, वो सबसे सुरक्षित हैं.

हालांकि ये बहुत ज़रूरी है कि एन95 या सर्जिकल मास्क आप बहुत अच्छे से पहनें. डॉ हिमांशु कहते हैं कि ध्यान रखें कि मास्क नाक के नीचे ना हो. उनका कहना है कि अगर मास्क नाक के नीचे लटक रहा है और ठीक से नहीं लगाया है तो उसका कोई फायदा नहीं है.

डॉ गगनदीप इस लेख में कहती हैं, अगर मास्क लगाने के बाद आपके चश्मे पर धुंध आ रही है तो मतलब आपने मास्क ठीक से नहीं पहना है. यानी आपके चश्मे के नीचे के हिस्से से हवा मास्क से बाहर आ रही है. इसलिए ये सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि अगर मास्क पर नोज़ पीस है तो वो नाक पर ठीक से लगा हो.

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कहां कौन-सा मास्क पहनना चाहिए?

डॉक्टर कंग के मुताबिक़, अगर आप रिस्क वाली जगह पर हैं तो एन95 मास्क पहनें.

बाक़ी जगहों के लिए तीन लेयर वाला अच्छी क्वालिटी का सर्जिकल मास्क.

सिर्फ कपड़े का मास्क पहनने से काम नहीं चलेगा. आप ये कर सकते हैं कि पहले सर्जिकल मास्क ठीक से पहन लें और उसके ऊपर से कपड़े का मास्क पहन लें.

क्या वायरस हवा में घूम रहा है?

घर में मास्क लगाने की सलाह मिलने पर ये कई लोगों के दिमाग में आ रहा है कि क्या वायरस हवा में तैर रहा है और खिड़कियों और वेंटिलेशन की जगह से घर में आकर उन्हें संक्रमित कर सकता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा लग रहा है कि इस बार वायरस के हवा में फैलने की क्षमता पहले से ज़्यादा है.

डॉ हिमांशु कहते हैं,"अगर आप भीड़भाड़ वाली जगह रह रहे हैं या बहुमंज़िला इमारत में रह रहे हो जहां पर कई लोग आस-पास रहते हैं और घर में भी कई लोग हैं, वहां बिल्कुल कोशिश करें कि मास्क पहनकर रखें, क्योंकि इस समय ऐरो ट्रांस्मिशन हो रहा है यानी हवा में वायरस है."

डॉ गगनदीप भी अख़बार में छपे अपने लेख में बताती हैं कि वायरस एक तरह से हमेशा से ही एयरबोर्न था, क्योंकि ये एक रेस्पिरेटरी वायरस है. ये वायरस आपके रेस्पिरेटरी ट्रैक से बाहर आता है यानी आपके मुंह और नाक से. वायरस दो तरह से बाहर आता है, एक में अणु बहुत छोटे हो सकते हैं और दूसरे में बहुत बड़े.

https://www.youtube.com/watch?v=xAVcSfZm63E

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि सबसे पहले जब वायरस के बारे में सुना गया था तो पक्के तौर पर नहीं पता था कि ये इंसान से इंसान में फैल सकता है, लेकिन जब बाद में पता चला कि इंसान से इंसान में संक्रमण हो सकता है तो सोचा गया कि ये ड्रॉपलेट इंफेक्शन की वजह से हो रहा है.

ड्रॉपलेट इंफेक्शन बड़े अणु होते हैं. मतलब जब आप सांस बाहर छोड़ते हैं तो वो अणु आपके आस-पास ही गिरेंगे यानी करीब तीन फीट से 6 फीट तक. दो गज़ दूरी रखने की बात इसी लिए कही जाती है ताकि आप उस ज़ोन से बाहर रहें.

विशेषज्ञों के मुताबिक़, अब हम जानते हैं कि संक्रमण सिर्फ ड्रॉपलेट नहीं, बल्कि एयरोसोल भी है. जिसका मतलब कि वायरस के अणु पांच माइक्रॉन कटऑफ से छोटे हैं. अगर वो अणु इतने छोटे हैं तो वो ज़्यादा वक़्त तक हवा में तैर सकते हैं. और अगर आप एक संक्रमित व्यक्ति के साथ एकदम बंद कमरे में हैं तो वो अणु वक्त के साथ बिल्डअप होंगे.

इसलिए वेंटिलेशन ज़रूरी है क्योंकि इससे हवा का सर्कुलेशन बना रहता है और अणु को बाहर डायल्यूट कर देता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों की माने तो यही वजह है कि घर में सही वेंटिलेशन बहुत ज़रूरी है.

हालाँकि डॉ हिमांशु कहते हैं कि खिड़कियां खोलना बंद रखना, ये एक विवादित चीज़ है.

वो कहते हैं, “अगर हम खिड़की खोलकर रखते हैं तो वेंटिलेशन बढ़ा रहे हैं, और अगर घर पर कोई पॉज़िटिव है और खिड़की बंद करके रख रहे हैं तो वायरस घर से बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं. इसलिए ये विवादित है इसपर कुछ भी कहना मुश्किल होगा.”

https://www.youtube.com/watch?v=2ow5B4VJdow

लेकिन कई लोग घर से बाहर निकले बगैर कैसे संक्रमित हो जा रहे हैं?

अगर कोई व्यक्ति हमेशा घर में ही रहा तो वो कैसे संक्रमित हो जा रहा है? ये सवाल कई लोग पूछ रहे हैं.

डॉ गगनदीप कांग के मुताबिक़, ऐसा होने के दो तरीके हो सकते हैं. पहले कि आपको पता नहीं चला कि आपके घर आने वाला कोई शख्स संक्रमित था.

और ये बहुत मुमकिन है कि अगर आप युवा लोगों के साथ रहते हैं तो हो सकता है उन्हें बिना लक्षण वाला यानी एसिम्प्टोमैटिक इंफेक्शन हो जाए, जिसने उन्हें परेशान नहीं किया लेकिन उनके ज़रिए संक्रमण घर के अधिक उम्र वाले या कमज़ोर इम्यूनिटी वाले शख़्स में चला गया.

एक दूसरा तरीका, जिसकी बात तो होती है लेकिन साबित नहीं हुआ है वो है कि जब आपको ड्रॉपलेट इंफेक्शन हो और ड्रॉपलेट आपके आस-पास गिरते हैं और जब उसे आप बाद में साफ करते हैं तो बड़े ड्रॉपलेट के बजाए अब एयरोसोल बन जाते हैं. हो सकता है फिर वो यहां-वहां तैरने लगें, वो दूसरे को संक्रमित कर सकते हैं.

घर पर मास्क पहनकर रखने का कोई वैज्ञानिक आधार है क्या?

डॉ हिमांशु के मुताबिक़, इसके वैज्ञानिक आधार के बारे में सुनने में नहीं आया है, लेकिन उनका मानना है कि प्रैक्टिकल और कॉमन सेंस के आधार पर इसे सही कहा जा सकता है.

उनके मुताबिक़, “हम अभूतपूर्व हालातों का सामना कर रहे हैं, ऐसे हालातों में वैज्ञानिक आधार देना थोड़ा मुश्किल है. वैज्ञानिक तौर पर तो ऐसा नहीं सुना गया है और अगर अन्य देशों में ऐसा देखे जाने की बात करें तो ये देखना होगा कि उनकी आबादी हमसे कम है. ऐसी स्थिति उनके सामने कभी आई ही नहीं है.”

घर में सुरक्षित रहने के लिए मास्क पहनने के अलावा और क्या करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्राणायाम जैसे श्वास संबंधी व्यायाम से काफ़ी फायदा हो सकता है. डॉक्टरों के मुताबिक़, अगर कुछ लक्षण हो रहे हैं तो शुरू में लोग मानने को तैयार नहीं होते कि उन्हें कोविड हो सकता है, लेकिन अगर शुरुआती लक्षणों में ही डॉक्टर से सलाह ले लें तो ज़्यादा अच्छा होगा. फिलहाल कई डॉक्टर फोन के ज़रिए इस तरह के मरीज़ों की मदद कर रहे हैं.

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English summary
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