Heatwave: लू के चलते 'खतरे' में भारत का 90% हिस्सा, दिल्ली वालों की नई रिसर्च ने बढ़ाई टेंशन!
Study On Heatwave: कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की स्टडी में कहा गया है कि लू की वजह के कारण भारत लक्ष्य से पिछड़ रहा है।

भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों का दौर जारी है। आलम यह है कि लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया। शहरों का तापमान तपिश की वजह से 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। इस बीच कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की रिसर्च स्टडी ने Heatwave पर टेंशन बढ़ाने वाला दावा किया है।
लू को लेकर किए गए नए अध्ययन में दावा किया गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में लगातार लू खतरनाक होती जा रही है। भारत का 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा और पूरा राजधानी दिल्ली लू के प्रभावों के 'खतरे के क्षेत्र' में है।
देश का हर राज्य 'तप' रहा
जैसी की अप्रैल में मौजूदा स्थिति बनी हुई है। इससे साफ हो चुका है कि गर्मी अभी अपने और सख्त तेवर दिखाने वाली है। दिल्ली के आसपास के राज्य हो या फिर पश्चिम बंगाल से लेकर ओडिशा तक हर तरफ गर्मी चरम पर है।
ऐसे में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की रिसर्च स्टडी में सामने आया है कि भारत गर्मी के नए रिकॉर्ड की तरफ बढ़ता जा रहा है। कई राज्य इतनी भीषण गर्मी का शिकार हो सकते हैं, जितना अनुमान सरकार ने भी नहीं लगाया होगा।
देश के लिए हो सकती है मुश्किल
लू पर की गई गई हालिया रिसर्च को कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में रमित देबनाथ और उनके सहयोगियों की तरफ से पूरा किया गया है। रिसर्च में दावा करते हुए कहा गया है कि 'लू' ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को हासिल करने की दिशा में उठाए गए भारत की प्रगति को पहले की तुलना में अधिक प्रभावित किया है।
अध्ययन में कहा गया है कि भारत में लगातार गर्मी बढ़ रही है। जिसके खतरे में देश की 80 फीसदी आबादी है। ऐसे में अगर वक्त रहते इस समस्या का समाधान नहीं खोजा गया तो भारत सतत विकास का लक्ष्य पाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। देबनाथ नेबताया कि लगभग भारत के कुल क्षेत्र में से 90 प्रतिशत भाग गंभीर हीट जोन बन चुका है।
50 सालों में लू से 17 हजार मौत
एक अन्य रिसर्च के अनुसार लू ने भारत में 50 सालों में 17 हजार से ज्यादा लोगों की जान ली। साल 2021 में पब्लिश हुई इस रिसर्च में बताया गया कि 1971 से 2019 तक लू की 706 घटनाएं हुईं है।












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