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'राज्य मशीनरी की पूर्ण नाकामी का सबूत', कोलकाता अस्पताल में हुई तोड़फोड़ पर HC की सख्त टिप्पणी

Kolkata doctor case: कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार 16 अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई बर्बरता पर संज्ञान लिया। हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना करते हुए कहा, 'यह राज्य मशीनरी की पूर्ण विफलता है।'

कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने राज्य सरकार की व्यवस्था बनाए रखने में असमर्थता पर चिंता व्यक्त की। पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, 'यह राज्य मशीनरी की पूर्ण विफलता है। वहां (मौके पर) पुलिस बल मौजूद था। वे अपने लोगों की सुरक्षा नहीं कर सके? यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। ये डॉक्टर निडर होकर कैसे काम करेंगे?'

calcutta high court

खबर के मुताबिक, हाईकोर्ट ने कहा कि बेहतर होगा कि अस्पताल को बंद किया जाए और मरीजों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया जाए। इस दौरान कोर्ट रूम में पश्चिम बंगाल सरकार के वकील भी वहां मौजूद थे। इस दौरान चीफ जस्टिस ने राज्य सरकार से कहा कि इ घटना के बाद आप क्या कर रहे हैं?

एहतियात के तौर पर क्या कदम उठाए गए थे? इसपर सरकार की ओर से मौजूद वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन ने कहा कि दोपहर तीन बजे सीबीआई जांच के निर्देश दिए गए थे। राज्य सरकार की वकील ने कहा कि अचानक 7,000 लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई थी। जिसकी वजह से अफरा-तफरी मच गई और तोड़फोड़ की घटना हुई।

कोर्ट ने कहा, 'आप किसी भी कारण से सीआरपीसी की धारा 144 लागू कर देते हैं। जब इतना हंगामा हो रहा हो, तो आपको इलाके की घेराबंदी कर देनी चाहिए थी।' उन्होंने आगे कहा, 7,000 लोग पैदल नहीं आ सकते। इस दौरान कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा, अगर 7000 लोग इकट्ठा हुए तो यह प्रशासन की 100 फीसदी नाकामी है।

कोलकाता पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के रूप में लगभग 40 लोग अस्पताल परिसर में घुस आए। उन्होंने संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, पुलिस कर्मियों पर पथराव किया और काफी नुकसान पहुंचाया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा।

उपद्रवियों ने अस्पताल के विभिन्न हिस्सों को निशाना बनाते हुए लाठी, ईंट और रॉड से हमला किया। उन्होंने इमरजेंसी वार्ड, उसके नर्सिंग स्टेशन, दवा स्टोर और ओपीडी के एक हिस्से को नुकसान पहुंचाया। इलाके में और उसके आसपास के कई सीसीटीवी कैमरे भी तोड़ दिए गए। उपद्रवियों ने एक पुलिस वाहन को पलट दिया और कई दोपहिया वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया।

इस दौरान कुछ पुलिसकर्मियों को चोटें भी आईं। कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद ट्रेनी लेडी डॉक्टर की मौत की जांच कोलकाता पुलिस से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई है। इस निर्णय का उद्देश्य दुखद घटना की गहन और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है।

आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुई बर्बरता को उजागर करने वाले ईमेल प्राप्त होने के कारण न्यायालय ने यह मामला उठाया। मुख्य न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी घटनाएं अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों के लिए भय का माहौल पैदा करती हैं।

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